हिंदी में संभावना और संभाव्य रूप
संभावना (संभाव्य)
यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
संभाव्य रूप क्रिया का वह रूप है जो किसी काम को पक्की घटना न बताकर संभावना, इच्छा, उद्देश्य या शर्त के रूप में रखता है: शायद वह आए, मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ, हम जल्दी निकलें ताकि समय पर पहुँचें। इसके मुख्य रूप हैं मैं करूँ, तुम करो, वह करे, हम/आप/वे करें; साधारण संभाव्य रूप के बाद हूँ, है, हैं नहीं जोड़ते। वह आएगा भविष्य की बात कहता है, जबकि शायद वह आए उस बात को एक खुली संभावना के रूप में रखता है।
एक नज़र में
रोज़मर्रा की हिंदी में हम केवल यह नहीं बताते कि क्या हुआ या क्या होगा। हम चाहते हैं कि कोई आए, पूछते हैं कि अब क्या करें, और कोई काम इसलिए करते हैं कि दूसरा काम हो सके। इन बातों में आए, करूँ, जाएँ, हो जैसे छोटे रूप बहुत काम आते हैं। इन्हें इस लेख में संभाव्य रूप कहा गया है। व्याकरण की अलग पुस्तकों में इनसे जुड़े प्रयोगों को संभावनार्थक, इच्छार्थक या विधिलिंग जैसे नामों से भी समझाया जाता है। पहले नाम याद करने के बजाय वाक्य का भाव पहचानना अधिक उपयोगी है।
इस विषय का मूल उपयोग बी१ स्तर पर सीखा जाता है। यदि आपको भविष्य के करूँगा, करोगे, करेगा, करेंगे जैसे रूप आते हैं, तो संभाव्य रूप बनाना आसान लगेगा। फर्क केवल रूप में नहीं है: तुम जाओगे किसी भविष्य की घटना की बात है; मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ किसी की इच्छा है। इच्छा पूरी हो भी सकती है और नहीं भी।
हिंदी पढ़ते-बोलते आपको ये रूप पहले से परिचित हो सकते हैं। अब लक्ष्य है इनका सही चुनाव करना: किसके साथ करूँ, किसके साथ करे, कब करें, और कब देखने में मिलता-जुलता रूप आदेश या सलाह का काम कर रहा है।
रूप कैसे बनता है और वाक्य में कैसे काम करता है
१. क्रिया का आधार और उसका अंत
क्रिया काम या अवस्था बताने वाला शब्द है, जैसे करना, आना, होना। उसका आधार, यानी वह हिस्सा जिससे बाकी रूप बनते हैं, अक्सर ना हटाने पर मिलता है: करना → कर, चलना → चल। नियमित क्रियाओं में इसी आधार के अंत में अलग-अलग ध्वनियाँ जुड़ती हैं। लिखते समय मात्रा भी उसी के अनुसार बदलती है।
| किसके लिए | अंत | करना | चलना |
|---|---|---|---|
| मैं | ऊँ | करूँ | चलूँ |
| तू | ए | करे | चले |
| तुम | ओ | करो | चलो |
| यह, वह | ए | करे | चले |
| हम | एँ | करें | चलें |
| आप | एँ | करें | चलें |
| ये, वे | एँ | करें | चलें |
कर्ता वह व्यक्ति या चीज़ है जिसके बारे में क्रिया कही जा रही है। यहाँ क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार चुनें: शायद मैं चलूँ, लेकिन शायद वह चले। आदर के लिए एक व्यक्ति के साथ भी वे करें या शर्मा जी आएँ कहा जा सकता है। आप एक व्यक्ति हों या कई, इस ढाँचे में करें लेते हैं।
तू बहुत घनिष्ठ संबोधन है; कुछ स्थितियों में यह रूखा भी लगता है। इसका रूप पहचानना उपयोगी है, लेकिन सामान्य बातचीत में तुम और सम्मान के लिए आप अधिक सुरक्षित चुनाव हैं।
२. स्वर पर समाप्त होने वाली और विशेष क्रियाएँ
हर क्रिया में केवल ना हटाकर ऊपर के अंत जोड़ना पर्याप्त नहीं है। विशेष रूप से देना और लेना के रूप ध्यान से याद करें। नीचे रोज़ काम आने वाली क्रियाओं का पूरा समूह दिया है।
| किसके लिए | जाना | आना | खाना | पीना | देना | लेना |
|---|---|---|---|---|---|---|
| मैं | जाऊँ | आऊँ | खाऊँ | पिऊँ | दूँ | लूँ |
| तू | जाए | आए | खाए | पिए | दे | ले |
| तुम | जाओ | आओ | खाओ | पिओ | दो | लो |
| यह, वह | जाए | आए | खाए | पिए | दे | ले |
| हम | जाएँ | आएँ | खाएँ | पिएँ | दें | लें |
| आप | जाएँ | आएँ | खाएँ | पिएँ | दें | लें |
| ये, वे | जाएँ | आएँ | खाएँ | पिएँ | दें | लें |
होना भी बहुत आवश्यक है: मैं होऊँ, तू हो, तुम हो, वह हो, हम हों, आप हों, वे हों। ध्यान दें कि तुम हो का रूप साधारण वर्तमान से मिलता है; वाक्य बताएगा कि उसका काम क्या है। तुम घर पर हो में स्थिति बताई गई है; मैं चाहता हूँ कि तुम घर पर हो में इच्छा व्यक्त की गई है।
लिखित हिंदी में जाये, आयें जैसे रूप भी दिखाई देते हैं। इस लेख में एकरूपता के लिए जाए, आएँ, पिएँ जैसी वर्तनी रखी गई है। करूँ, करें, जाएँ में नाक से निकलने वाली ध्वनि महत्त्वपूर्ण है; करे और करें को एक जैसा न लिखें।
३. भविष्य काल से संबंध, लेकिन अर्थ अलग
भविष्य के रूप से गा/गी/गे हटाने पर कई परिचित संभाव्य रूप मिल जाते हैं: करूँगा → करूँ, जाएगी → जाए, करेंगे → करें, जाओगे → जाओ। यह याद रखने की तरकीब है, हर भविष्य-वाक्य को बदल देने का नियम नहीं।
| भविष्य की बात | संभाव्य प्रयोग | भाव में अंतर |
|---|---|---|
| मैं कल आऊँगा। | क्या मैं कल आऊँ? | आने की बात बनाम अनुमति या सलाह माँगना |
| वह समय पर आएगी। | शायद वह समय पर आए। | भविष्य का कथन बनाम खुली संभावना |
| आप यह काम करेंगे। | मेरी इच्छा है कि आप यह काम करें। | भविष्य की बात बनाम इच्छा |
| हम साथ जाएँगे। | क्यों न हम साथ जाएँ? | योजना का कथन बनाम सुझाव |
लिंग, यानी पुल्लिंग और स्त्रीलिंग का व्याकरणिक भेद, साधारण संभाव्य रूप को नहीं बदलता। रीना आए और रवि आए दोनों सही हैं। इसी तरह मैं आऊँ कहने वाला पुरुष भी हो सकता है और महिला भी। भविष्य में यही भेद आएगा/आएगी या आऊँगा/आऊँगी में दिखाई देता है।
४. संभावना और संदेह
मुख्य ढाँचे हैं शायद + वाक्य और हो सकता है कि + वाक्य:
- शायद वह आए। — आने की संभावना है, निश्चित खबर नहीं।
- हो सकता है कि दुकान आज जल्दी बंद हो। — जल्दी बंद होने की बात संभव है।
- संभव है कि वे रास्ता भूल जाएँ। — रास्ता भूलने की आशंका है।
यहाँ शायद वह आएगा भी सही हिंदी है। शायद के बाद हमेशा संभाव्य रूप ही आए, ऐसा नियम नहीं है। आए बात को खुली संभावना की तरह रखता है; आएगा भविष्य का अनुमान प्रस्तुत करता है। बातचीत में दोनों का फर्क हमेशा बहुत तीखा नहीं होता।
५. इच्छा और अपेक्षा
कि यहाँ एक जोड़ने वाला शब्द है। यह आगे वह बात लाता है जो किसी की इच्छा या अपेक्षा है:
- मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ।
- हम चाहते हैं कि सभी को बराबर मौका मिले।
- मेरी इच्छा है कि आप कुछ दिन और रुकें।
दोनों हिस्सों का कर्ता एक ही हो तो अक्सर छोटा ढाँचा अधिक सहज है: मैं जाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं जाऊँ भी किसी विशेष ज़ोर या तुलना में संभव है, पर सामान्य इच्छा के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है। जब कर्ता अलग हो, मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ बहुत उपयोगी ढाँचा है।
६. उद्देश्य, शर्त और छूट
ताकि किसी काम का उद्देश्य बताता है: पता लिख लो ताकि भूल न जाओ। लिख लेने से भूलने की संभावना कम होगी; उद्देश्य बताने से यह गारंटी नहीं मिलती कि कोई नहीं भूलेगा।
अगर के साथ संभाव्य रूप किसी खुली शर्त को रख सकता है: अगर समय मिले, तो मुझे फ़ोन करना। चाहे यह दिखा सकता है कि किसी स्थिति के होने या न होने से मुख्य बात नहीं बदलेगी: चाहे जो हो, हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन चाहे के हर प्रयोग में यही रूप नहीं आता; नीचे इनके दूसरे उपयोग भी दिए गए हैं।
प्रसंग के साथ उदाहरण
दूसरे खाने में अनुवाद के बजाय उसी बात का सरल हिंदी अर्थ दिया गया है। तीसरे खाने से पहचानें कि रूप संभावना, इच्छा या किसी और काम के लिए आया है।
| उदाहरण | सरल अर्थ | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| शायद वह आए। | उसके आने की संभावना है। | आने की पक्की सूचना नहीं है। |
| चाहे जो हो। | परिस्थिति कुछ भी हो। | स्वतंत्र कथन के रूप में दृढ़ता जता सकता है। |
| मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ। | मेरी इच्छा है कि जाने वाले तुम हो। | इच्छा रखने वाला और जाने वाला अलग हैं। |
| हो सकता है कि आज बिजली चली जाए। | आज बिजली जाने की संभावना है। | संभावना पूरे घटनाक्रम की है। |
| नाम साफ़ लिखें ताकि कोई गलती न हो। | साफ़ लिखने का उद्देश्य गलती से बचना है। | ताकि के बाद उद्देश्य है। |
| अगर आपको समय मिले, तो मुझे फ़ोन कीजिए। | समय मिलने पर मुझे फ़ोन करें। | शर्त को निश्चित नहीं माना गया है। |
| मैं खिड़की खोलूँ? | क्या आप चाहते हैं कि मैं खिड़की खोल दूँ? | छोटा प्रश्न प्रस्ताव या अनुमति माँगता है। |
| क्यों न हम बाहर बैठें? | मेरा सुझाव है कि हम बाहर बैठें। | साथ मिलकर करने का सुझाव है। |
| मेरी इच्छा है कि आप भी साथ चलें। | मैं आपके साथ चलने को अच्छा मानूँगा या मानूँगी। | आप के साथ चलें आता है। |
| ऐसा न हो कि हम आख़िरी बस चूक जाएँ। | हमें सावधान रहना चाहिए, वरना बस छूट सकती है। | अनचाही संभावना की चिंता है। |
| ईश्वर करे, तुम्हारा काम बन जाए। | मेरी शुभकामना है कि तुम्हें सफलता मिले। | कामना का प्रचलित ढाँचा है। |
| चाहे बारिश हो या धूप निकले, दुकान खुली रहेगी। | मौसम बदलने पर भी दुकान बंद नहीं होगी। | दोनों संभावनाओं में परिणाम समान है। |
आम गलतियाँ
१. साधारण रूप के बाद अनावश्यक सहायक क्रिया जोड़ना
सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ लगकर उसका समय या अवस्था बताती है, जैसे है, हूँ, हैं। साधारण संभाव्य रूप को ऐसे सहारे की आवश्यकता नहीं होती।
- गलत: शायद वह आए है।
- सही: शायद वह आए।
- क्यों: आए यहाँ पूरा संभाव्य रूप है। वह आया है अलग बनावट है और हो चुके काम की बात करता है।
२. आप के साथ तुम वाला रूप लगाना
- गलत: मेरी इच्छा है कि आप कल आओ।
- सही: मेरी इच्छा है कि आप कल आएँ।
- क्यों: मानक हिंदी में आप के साथ आएँ, और तुम के साथ आओ आता है। कृपया कल आइए सीधे विनम्र अनुरोध का दूसरा सही तरीका है।
३. भविष्य की स्त्रीलिंग बनावट को यहाँ भी रख देना
- इस इच्छा के लिए गलत चुनाव: मैं चाहता हूँ कि रीना आएगी।
- सही: मैं चाहता हूँ कि रीना आए।
- क्यों: यहाँ आने की भविष्यवाणी नहीं, इच्छा बताई जा रही है। आए को रीना के कारण स्त्रीलिंग रूप देने की आवश्यकता नहीं है।
४. देना और लेना को पूरी तरह नियमित मान लेना
- गलत: क्या मैं तुम्हें अपनी किताब देऊँ?
- सही: क्या मैं तुम्हें अपनी किताब दूँ?
- क्यों: इस अर्थ में मानक रूप दूँ है। इसी तरह क्या मैं यह किताब लूँ? कहें। देना और लेना के रूप पूरे समूह के साथ याद करें।
५. हर कि के बाद संभाव्य रूप लगा देना
- पक्की जानकारी बताने के लिए अनुचित: मुझे पता है कि वह घर पर हो।
- सही: मुझे पता है कि वह घर पर है।
- क्यों: कि केवल बातें जोड़ता है। उसके बाद तथ्य, इच्छा, अनुमान—कुछ भी आ सकता है। क्रिया का चुनाव अर्थ से होगा, केवल कि देखकर नहीं।
६. उद्देश्य को पूरी हो चुकी घटना समझ लेना
- वर्तमान निर्देश के उद्देश्य के लिए अनुचित: अभी धीरे बोलो ताकि बच्चा नहीं जागा।
- सही: अभी धीरे बोलो ताकि बच्चा न जागे।
- क्यों: बच्चे को जागने से बचाना अभी उद्देश्य है। नहीं जागा बीत चुकी घटना के बारे में बताता है, इसलिए इस निर्देश का उद्देश्य नहीं बताता।
प्रयोग संबंधी बातें
आदेश और संभाव्य रूप कभी एक जैसे दिखते हैं
आज्ञार्थक रूप सीधे आदेश, अनुरोध या निर्देश देने वाला रूप है। तुम जाओ में जाओ सीधे निर्देश का काम कर सकता है। लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम जाओ में यही रूप इच्छा के भीतर आता है। अब हम कहाँ जाएँ? में जाएँ किसी को दिया गया आदेश नहीं, रास्ता तय करने का प्रश्न है। इसलिए केवल अंतिम अक्षर देखकर पूरे वाक्य का भाव तय न करें।
सूचनाओं में कृपया यहाँ प्रतीक्षा करें बहुत सामान्य है। करें यहाँ औपचारिक निर्देश देता है। कीजिए, आइए, बैठिए जैसे रूप भी सीधे आदरपूर्ण अनुरोध में आते हैं। किंतु इच्छा वाले ढाँचे में मैं चाहता हूँ कि आप यहाँ प्रतीक्षा करें कहेंगे, न कि कि आप यहाँ प्रतीक्षा कीजिए।
न, नहीं और मत
उद्देश्य और इच्छा के वाक्यों में न बहुत सहज है: मैं चाहता हूँ कि वह देर न करे, धीरे चलो ताकि फिसल न जाओ। संभावना में नहीं भी स्वाभाविक है: शायद वह आज नहीं आए। ऐसा न हो कि… एक प्रचलित ढाँचा है जो चिंता बताता है।
मत मुख्य रूप से किसी को रोकने वाले सीधे निर्देश में लगता है: शोर मत करो। इसे बिना सोचे इच्छा या उद्देश्य के भीतर न रखें; मैं चाहता हूँ कि तुम शोर न करो कहें।
बातचीत और लिखित भाषा
मैं चलूँ?, क्या करें?, चलो, कुछ खाएँ सहज बातचीत के वाक्य हैं। संभव है कि…, मेरी अपेक्षा है कि… अधिक औपचारिक लग सकते हैं। काश वह आए! में प्रबल इच्छा है, जबकि भगवान करे वह जल्दी ठीक हो जाए में शुभकामना है। ये अलग भाव हैं; इन्हें केवल संदेह की एक ही श्रेणी में न रखें।
आगे की समझ
१. हो चुका काम और चल रहा काम
साधारण आए के अलावा संभावना दूसरी बनावटों से भी व्यक्त होती है। शायद वह आ गया हो में आने का काम पूरा हो चुकने की संभावना है। यहाँ हो को अनावश्यक मानकर हटाना गलत होगा: यह एक बड़े क्रिया-समूह का हिस्सा है।
| वाक्य | सरल अर्थ | बनावट |
|---|---|---|
| शायद वह आए। | उसका आना संभव है। | साधारण संभाव्य रूप |
| शायद वह आ गया हो। | संभव है कि वह अब तक पहुँच चुका हो। | पूरे हो चुके काम की संभावना |
| शायद रीना आ गई हो। | संभव है कि रीना पहुँच चुकी हो। | गई में स्त्रीलिंग दिखाई देता है। |
| शायद वे रास्ते में हों। | संभव है कि वे अभी रास्ते में हैं। | किसी वर्तमान स्थिति की संभावना |
| शायद वह काम कर रहा हो। | संभव है कि वह अभी काम में लगा है। | चल रहे काम की संभावना |
इसलिए संभाव्य रूप में लिंग नहीं बदलता वाला शुरुआती नियम साधारण करे, आए, जाए के लिए याद रखें। बड़े समूह में गया/गई और रहा/रही बदल सकते हैं: शायद रीना काम कर रही हो। हो/हों का चुनाव भी बनाए रखें: शायद वे काम कर रहे हों।
२. बीती इच्छा और अवास्तविक शर्त
काश वह कल आए! आगे की इच्छा है। काश वह कल आया होता! बीते हुए अवसर की अधूरी इच्छा है। दूसरे वाक्य में बोलने वाले को लगता है कि आने की बात पूरी नहीं हुई। समय पहचानने के लिए केवल कल पर्याप्त नहीं है, क्योंकि हिंदी में वह बीते या आने वाले दिन के लिए हो सकता है; क्रिया और प्रसंग देखें।
इसी तरह अगर समय मिले, तो आना खुली संभावना है। अगर समय होता, तो मैं आता में समय न होने की बाधा सामने आती है। संभाव्य रूप सभी प्रकार की शर्तों का अकेला समाधान नहीं है; अवास्तविक और बीती शर्तों के अलग ढाँचे सीखने होंगे।
३. चाहे और अनिश्चित चुनाव
तुम चाहे जो कहो, मेरा निर्णय नहीं बदलेगा में कहने की कोई खास बात पहले से तय नहीं है। अर्थ है: तुम कुछ भी कहो, मुख्य नतीजा वही रहेगा। जहाँ उचित समझें, वहाँ हस्ताक्षर करें में भी जगह पहले से एक निश्चित नाम से नहीं बताई गई है।
लेकिन चाहे तुम दिल्ली जाओ या मुंबई, मुझे बता देना विकल्प रखता है, जबकि चाहे वह कितना भी थका हो, काम पूरा करता है किसी बाधा के बावजूद होने वाली बात दिखाता है। हर जगह चाहे को केवल इच्छा रखने वाली क्रिया समझना गलत होगा।
४. केवल शब्द देखकर नियम न चुनें
मुझे लगता है कि वह आएगा एक अनुमान है; मैं चाहता हूँ कि वह आए एक इच्छा है। दोनों में कि है, लेकिन क्रिया अलग है। इसी तरह उम्मीद है कि वह आएगा और उम्मीद है कि वह आए दोनों मिल सकते हैं। पहले में अपेक्षित भविष्य का कथन अधिक स्पष्ट है, दूसरे में कामना का रंग हो सकता है। कोई एक जोड़ने वाला शब्द हर बार एक निश्चित क्रिया-रूप नहीं माँगता।
अभ्यास के तरीके
- एक क्रिया, कई कर्ता। पहले शायद मैं जाऊँ, शायद तुम जाओ, शायद वह जाए, शायद हम जाएँ, शायद आप जाएँ बोलें। फिर जाना की जगह देना, लेना, पीना रखें। इससे विशेष रूप और आदर वाला मेल साथ-साथ अभ्यास में आएँगे।
- तीन अलग भाव लिखें। किसी वास्तविक योजना पर तीन वाक्य बनाएँ: हम जल्दी निकलेंगे; मैं चाहता हूँ कि हम जल्दी निकलें; हम जल्दी निकलेंगे ताकि समय पर पहुँचें। फिर बताएँ कि कौन-सा कथन है, कौन-सी इच्छा और कौन-सा उद्देश्य। केवल अंतिम अक्षर बदलना अभ्यास का लक्ष्य न हो।
- छोटे प्रश्नों में प्रयोग करें। दिन के काम तय करते समय लिखें: पहले किसे फ़ोन करूँ?, क्या मैं खाना बनाऊँ?, क्यों न हम कल मिलें? अगली बार किसी बातचीत या कहानी में करे, हों, जाएँ दिखें, तो उनका पूरा वाक्य पढ़कर भाव पहचानें।
संबंधित विषय
- पहले दोहराएँ: भविष्य काल — आएगा और आए, करेंगे और करें का रूप और अर्थ अलग करने में सहायक।
- अगला कदम: शर्त वाक्य — खुली संभावना, अवास्तविक स्थिति और बीती शर्त का अंतर समझने के लिए।
- साथ में पढ़ें: संबंधवाचक सर्वनाम — जो, जहाँ, जैसा से जुड़ी बातों में निश्चित और अनिश्चित संदर्भ पहचानने के लिए।