हिन्दी में शर्त वाक्य
शर्त वाक्य
यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
शर्त वाक्य में एक बात का होना दूसरी बात पर निर्भर करता है: अगर समय मिला, तो मैं आऊँगा। खुली संभावना के लिए अगर बारिश हो, तो…, कल्पना के लिए अगर मेरे पास पैसे होते, तो…, और बीती हुई अधूरी संभावना के लिए अगर वह आया होता, तो… जैसे ढाँचे काम आते हैं। अगर और यदि दोनों शर्त बताते हैं; तो उसके परिणाम को सामने लाता है, लेकिन उसे हर बार लिखना ज़रूरी नहीं होता।
पहले बात समझें
रोज़मर्रा में हम योजनाएँ बनाते हैं, सलाह देते हैं, किसी फैसले का नतीजा बताते हैं और कभी बीती बात पर अफ़सोस करते हैं। इन सबमें शर्त वाक्य उपयोगी हैं: अगर दुकान खुली है, तो दूध ले आओ। यहाँ दूध लाने की बात तभी लागू होती है जब दुकान खुली हो। शर्त केवल भविष्य की नहीं होती; वह अभी की स्थिति, रोज़ होने वाली बात या बीते हुए अवसर से भी जुड़ सकती है।
बी१ स्तर पर मुख्य काम इन अर्थों को अलग पहचानना है: क्या बात अभी संभव है, क्या हम वास्तविकता से अलग कोई स्थिति सोच रहे हैं, या क्या अब बीती घटना बदल नहीं सकती? हिन्दी में इसके लिए सिर्फ़ अगर जोड़ देना काफ़ी नहीं है। क्रिया, यानी काम या स्थिति बताने वाले शब्द, का रूप भी बदलता है: हो, है, होता, हुआ होता।
इस लेख में उदाहरण और उनकी सरल व्याख्या दोनों हिन्दी में हैं। उद्देश्य एक ही वाक्य को दोहराना नहीं, बल्कि यह समझना है कि बोलने वाला किस बात को संभव, कल्पित या बीत चुका मान रहा है। शुरुआत में तीन मुख्य ढाँचे सीखें; आगे के हिस्सों में उनके सूक्ष्म अंतर मिलेंगे।
वाक्य कैसे बनता है?
१. शर्त और परिणाम को पहचानें
अगर तुम जल्दी निकलोगे, तो समय पर पहुँचोगे।
इस वाक्य में दो उपवाक्य हैं—अर्थात बड़े वाक्य के दो ऐसे हिस्से जिनमें अपनी-अपनी क्रिया है। अगर तुम जल्दी निकलोगे शर्त है और समय पर पहुँचोगे परिणाम है। शुरुआत के लिए यह ढाँचा याद रखें:
अगर/यदि + शर्त, तो + परिणाम।
क्रम उलटा भी हो सकता है: तुम समय पर पहुँचोगे अगर जल्दी निकलोगे। इस क्रम में सामान्यतः अलग से तो नहीं लगाते। शर्त पहले आए तो बीच में अल्पविराम लगाने से लंबा वाक्य पढ़ने में आसानी होती है।
| आशय | नमूना | स्थिति कैसी है? |
|---|---|---|
| खुली संभावना | अगर समय मिला, तो मैं आऊँगा। | समय मिलना अभी संभव है। |
| सामान्य नियम | अगर पानी को पर्याप्त गरम करते हैं, तो वह उबलता है। | बार-बार होने वाला संबंध बताया गया है। |
| अभी की कल्पना | अगर मेरे पास गाड़ी होती, तो मैं तुम्हें छोड़ देता। | बोलने वाले के पास अभी गाड़ी नहीं है। |
| बीती अधूरी संभावना | अगर हम जल्दी निकले होते, तो गाड़ी पकड़ लेते। | हम जल्दी नहीं निकले; अवसर निकल गया। |
२. वास्तविक या खुली शर्त
खुली शर्त में बोलने वाला किसी बात को संभव मानकर आगे का परिणाम बताता है। इसका मतलब यह नहीं कि घटना निश्चित है।
- अगर बारिश हो, तो मैं नहीं जाऊँगा।
- अगर कल छुट्टी है, तो हम आज देर तक बैठ सकते हैं।
- अगर वह समय पर पहुँचेगा, तो बैठक शुरू हो जाएगी।
- अगर दवा से आराम नहीं मिला, तो डॉक्टर को फिर दिखाएँगे।
इनमें शर्त के कई रूप हैं। हो संभाव्य रूप है—ऐसा क्रिया-रूप जो यहाँ घटना को निश्चित बताने के बजाय एक संभावना के रूप में रखता है। है मौजूदा स्थिति की शर्त बनाता है। पहुँचेगा भविष्य की शर्त बताता है। आराम नहीं मिला में पूरा हो जाने वाला परिणाम पहले रखा गया है, लेकिन पूरे वाक्य का संदर्भ आगे का भी हो सकता है।
इसलिए अगर समय मिला, तो आऊँगा में मिला देखकर उसे हमेशा बीता हुआ समय न मानें। अर्थ है: आगे समय मिलने पर आना होगा। इसी तरह अगर तुमने काम पूरा कर लिया, तो हम निकलेंगे में काम पूरा करना अभी बाकी हो सकता है। समय का अर्थ पूरे वाक्य से तय करें।
परिणाम केवल भविष्य की क्रिया नहीं होता। वह सलाह, अनुमति, अनुरोध या सामान्य तथ्य भी हो सकता है:
- अगर भूख लगी है, तो कुछ खा लो।
- अगर आप तैयार हैं, तो हम शुरू कर सकते हैं।
- अगर मुझे नींद कम मिलती है, तो सिर दुखता है।
३. संभाव्य रूप में कौन-सा रूप चुनें?
संभाव्य रूप में व्यक्ति के अनुसार क्रिया बदलती है। यहाँ व्यक्ति का अर्थ है कि बात मैं, सामने वाले या किसी तीसरे के बारे में हो रही है। नीचे आना और होना के उपयोगी रूप हैं।
| किसके लिए | आना | होना |
|---|---|---|
| मैं | आऊँ | होऊँ |
| तू | आए | हो |
| तुम | आओ | हो |
| वह / यह | आए | हो |
| हम | आएँ | हों |
| आप | आएँ | हों |
| वे / ये | आएँ | हों |
अगर आप कल आएँ, तो हम विस्तार से बात करेंगे। यहाँ आप के साथ आएँ है। अगर रीमा आए, तो उसे अंदर भेज देना। यहाँ रीमा के साथ आए है। इन रूपों में स्त्री और पुरुष के लिए अलग अंत नहीं लगता: अगर मोहन आए…, अगर रीमा आए…।
होऊँ और हूँ को एक न समझें। अगर मैं वहाँ होऊँ, तो मुझे बुला लेना किसी संभावित स्थिति की बात है। अगर मैं गलत हूँ, तो मुझे बताइए अभी अपने गलत होने की संभावना स्वीकार करके सुधार माँगना है। दोनों स्वाभाविक हैं; चुनाव अर्थ के अनुसार होता है।
४. अभी की काल्पनिक या वास्तविकता से अलग शर्त
जब हम ऐसी स्थिति सोचते हैं जो अभी सच नहीं है, तो अक्सर होता/होती/होते और करता/करती/करते जैसे रूप आते हैं।
अगर मेरे पास पैसे होते, तो मैं खरीदता।
यह वाक्य तब पूरा अर्थ देता है जब खरीदने की चीज़ बातचीत में पहले से मालूम हो। अधिक स्पष्ट रूप होगा: अगर मेरे पास पैसे होते, तो मैं यह किताब खरीदता। सामान्य अर्थ है कि अभी पैसे नहीं हैं, इसलिए किताब नहीं खरीद रहा हूँ।
अगर मुझे रास्ता पता होता, तो मैं तुम्हें बता देती। यहाँ रास्ता पता नहीं है। देती से पता चलता है कि बोलने वाली स्त्री है। पुरुष बोलेगा: बता देता।
इन रूपों को केवल देखकर बीती आदत न समझें। तुलना करें:
- मैं रविवार को घर पर रहता था। — बीती आदत।
- अगर दफ़्तर पास होता, तो मैं घर पर खाना खाता। — कल्पित स्थिति का परिणाम।
शर्त वाले अर्थ में करता के बाद हर बार था जोड़ना ज़रूरी नहीं है। अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं करता अपने-आप में पूरा और स्वाभाविक वाक्य है।
५. ता, ती, ते का मेल
क्रिया का मेल, यानी उससे जुड़े शब्द के अनुसार उसका रूप बदलना, यहाँ भी महत्त्वपूर्ण है। लिंग से आशय पुल्लिंग या स्त्रीलिंग और वचन से एक या अनेक का भेद है।
| रूप | उदाहरण | रूप किससे जुड़ा है? |
|---|---|---|
| होता | अगर मेरे पास समय होता… | समय पुल्लिंग, एकवचन है। |
| होती | अगर मेरे पास गाड़ी होती… | गाड़ी स्त्रीलिंग, एकवचन है। |
| होते | अगर मेरे पास पैसे होते… | पैसे पुल्लिंग, बहुवचन है। |
| करता | तो मैं मदद करता। | पुरुष बोलने वाला। |
| करती | तो मैं मदद करती। | स्त्री बोलने वाली। |
| करते | तो हम मदद करते। | पुरुषों का या मिश्रित समूह। |
| करतीं | तो हम मदद करतीं। | केवल स्त्रियों का समूह। |
मेरे पास पैसे होते में रूप पैसे के अनुसार है, बोलने वाले के अनुसार नहीं। इसलिए स्त्री भी अगर मेरे पास पैसे होते ही कहेगी; अगले हिस्से में वह तो मैं खरीदती कह सकती है।
६. बीते समय की अधूरी शर्त
बीती हुई घटना के बारे में विपरीत संभावना सोचने के लिए आया होता, बताया होता, निकले होते जैसे रूप उपयोगी हैं।
अगर वह आया होता, तो हम उससे मिल लेते।
सामान्य अर्थ है कि वह नहीं आया और मुलाक़ात नहीं हुई। केवल अगर वह आया होता… कहना भी बातचीत में संभव है, लेकिन तब आगे का परिणाम संदर्भ से समझा जाता है या बोलने वाला जानबूझकर बात अधूरी छोड़ता है। सीखते समय पूरा वाक्य बनाना बेहतर है।
परिणाम में दो प्रचलित ढाँचे मिलेंगे:
- अगर तुमने बताया होता, तो मैं मदद करता।
- अगर तुमने बताया होता, तो मैंने मदद की होती।
पहले में कल्पित प्रतिक्रिया मुख्य है। दूसरे में मदद करने को भी बीती हुई पूरी घटना के रूप में रखा गया है। हर वाक्य में दोनों हिस्सों पर एक जैसा अंत लगाना आवश्यक नहीं है।
पूर्ण रूप—यानी काम को पूरा हुआ दिखाने वाला रूप—बनाते समय ने का नियम भी लागू रहता है। अगर रीमा आई होती… में आना के साथ ने नहीं है। लेकिन अगर रीमा ने किताब पढ़ी होती… में पढ़ी होती बिना को वाले शब्द किताब के अनुसार है, क्योंकि किताब वह चीज़ है जिसे पढ़ा गया। अगर मोहन ने किताब पढ़ी होती… में भी यही रूप रहेगा।
संदर्भ में उदाहरण
दूसरे स्तंभ में अनुवाद के बजाय सरल हिन्दी में आशय दिया गया है, ताकि एक ही भाषा में भी शर्त का अर्थ साफ़ दिखे।
| वाक्य | सरल आशय | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| अगर बारिश हो, तो मैं नहीं जाऊँगा। | बारिश होने पर जाना रुक जाएगा। | खुली संभावना; संभाव्य रूप। |
| अगर शाम तक काम पूरा हो गया, तो हम साथ खाना खाएँगे। | काम पहले पूरा होना चाहिए। | पूरा होने का रूप आगे की घटना भी बता सकता है। |
| यदि आपको कोई कठिनाई हो, तो हमें बताइए। | परेशानी होने पर सूचना दें। | विनम्र अनुरोध। |
| अगर मैं देर से सोता हूँ, तो सुबह उठने में मुश्किल होती है। | देर से सोने का यह सामान्य असर है। | बार-बार होने वाली स्थिति। |
| अगर आप चाहें, तो खिड़की खोल सकते हैं। | खिड़की खोलने की अनुमति है। | संभाव्य रूप और अनुमति। |
| अगर कल बाज़ार बंद रहेगा, तो सामान आज ही ले लेते हैं। | कल की बंदी मानकर आज का सुझाव है। | भविष्य की शर्त, अभी का फैसला। |
| अगर मेरे पास पैसे होते, तो मैं यह सिलाई मशीन खरीदती। | अभी पैसे नहीं हैं। | काल्पनिक स्थिति; स्त्री बोल रही है। |
| अगर घर पास होता, तो हम पैदल जाते। | घर पास नहीं है। | मौजूदा वास्तविकता से अलग कल्पना। |
| अगर मैं आपकी जगह होता, तो पहले पूरी बात सुनता। | मेरी सलाह है कि पहले सुनें। | कल्पना के सहारे सलाह। |
| अगर तुमने पता भेजा होता, तो मैं सीधे घर पहुँच जाता। | पता नहीं मिला; सीधे पहुँचना संभव नहीं हुआ। | बीती हुई अधूरी संभावना। |
| अगर सीमा आई होती, तो हम उससे सलाह ले लेते। | सीमा नहीं आई, इसलिए सलाह नहीं ली। | स्त्रीलिंग में आई होती। |
| अगर हमने पहले से तैयारी की होती, तो आज इतनी परेशानी न होती। | तैयारी की कमी का असर अब है। | बीती शर्त, वर्तमान परिणाम। |
आम गलतियाँ
१. हर शर्त को काल्पनिक बना देना
- इरादे से मेल नहीं खाता: कल छुट्टी मिलने की संभावना है: अगर कल छुट्टी होती, तो हम घूमने जाएँगे।
- बेहतर: अगर कल छुट्टी मिली, तो हम घूमने जाएँगे।
- क्यों: छुट्टी होती वास्तविकता से अलग कल्पना की ओर ले जाता है। खुली संभावना में छुट्टी मिली, छुट्टी हो या संदर्भ के अनुसार छुट्टी है चुनें। अगर कल छुट्टी होती, तो हम घूमने जाते एक अलग, काल्पनिक अर्थ में सही है।
२. संभाव्य रूप के बाद अनावश्यक है लगाना
- गलत: अगर वह आए है, तो मुझे बताना।
- सही: अगर वह आए, तो मुझे बताना।
- क्यों: इस ढाँचे में आए अपने-आप में पर्याप्त है। अगर वह आया है, तो मुझे बताना भी सही है, लेकिन उसका अर्थ है कि शायद वह पहले ही आ चुका है।
३. पैसे के साथ होती लगाना
- गलत: अगर मेरे पास पैसे होती, तो मैं यह ले लेती।
- सही: अगर मेरे पास पैसे होते, तो मैं यह ले लेती।
- क्यों: पहले हिस्से में मेल पैसे से है। दूसरे हिस्से का लेती स्त्री बोलने वाली के अनुसार है।
४. बीती हुई शर्त में था लगा देना
- इरादे से मेल नहीं खाता: वह कल नहीं आया; उस अवसर की कल्पना है: अगर वह कल आया था, तो हम उससे मिल लेते।
- बेहतर: अगर वह कल आया होता, तो हम उससे मिल लेते।
- क्यों: आया होता नहीं हुई घटना की विपरीत कल्पना करता है। आया था बीते तथ्य को जाँचने वाली दूसरी तरह की शर्त में सही हो सकता है: अगर वह कल आया था, तो उसका नाम सूची में होगा।
५. आना के साथ ने जोड़ना
- गलत: अगर सीमा ने आई होती, तो अच्छा होता।
- सही: अगर सीमा आई होती, तो अच्छा होता।
- क्यों: इस प्रयोग में आना के साथ ने नहीं लगता। अगर सीमा ने खाना बनाया होता… में ने सही है; दोनों क्रियाओं का ढाँचा अलग है।
प्रयोग की बातें
अगर, यदि और तो
अगर बातचीत और सामान्य लेखन दोनों में सहज है। यदि अपेक्षाकृत औपचारिक है; निर्देशों, सूचनाओं और कार्यालयी लेखन में अक्सर मिलता है। यदि आवेदन अधूरा है, तो उसे वापस भेज दिया जाएगा और अगर फ़ॉर्म अधूरा है, तो उसे वापस भेज देंगे में मूल शर्त एक ही है, लेकिन बोलने का ढंग अलग है।
तो हटाने पर भी कई वाक्य सही रहते हैं: अगर समय मिले, मुझे फ़ोन करना। लंबे वाक्य में इसे रखने से शर्त और परिणाम की सीमा साफ़ रहती है। अगर तुम आओगे, तभी मैं जाऊँगा में तभी अधिक कड़ी शर्त लगाता है: तुम्हारे आने पर ही मेरा जाना होगा।
न और नहीं
दोनों मिलते हैं: अगर वह न आए, तो बैठक शुरू कर देना और अगर वह नहीं आए, तो बैठक शुरू कर देना। न आए कुछ अधिक संक्षिप्त या लिखित लग सकता है। बीती कल्पना में अगर तुमने मदद न की होती, तो काम पूरा न होता स्वाभाविक है; नहीं की होती भी संभव है। निषेध किस हिस्से में है, यह ज़रूर देखें: मदद न होना शर्त है या काम पूरा न होना परिणाम?
विनम्रता और संकेत
अगर आप चाहें, तो हम कल बात कर सकते हैं सामने वाले को विकल्प देता है। अगर आप दरवाज़ा बंद कर दें, तो अच्छा होगा रूप में शर्त है, लेकिन व्यवहार में विनम्र अनुरोध है। इसी कारण हर शर्त को कठोर नियम की तरह न पढ़ें।
आवाज़ और संदर्भ से स्वर बदल सकता है। अगर तुम ऐसा करोगे, तो मुश्किल होगी चेतावनी भी हो सकती है। अगर तुम साथ होते, तो अच्छा होता इच्छा या अपनापन प्रकट कर सकता है, सिर्फ़ तर्क का परिणाम नहीं।
आगे की बारीकियाँ
खुली बीती शर्त और बीती विपरीत कल्पना
यह अंतर विशेष रूप से उपयोगी है:
- अगर उसने चिट्ठी भेजी थी, तो दफ़्तर में उसका रिकॉर्ड होगा। — मुझे पता नहीं कि चिट्ठी भेजी गई थी या नहीं।
- अगर उसने चिट्ठी भेजी होती, तो मामला अब तक सुलझ गया होता। — सामान्य अर्थ है कि चिट्ठी नहीं भेजी गई; मैं उसका दूसरा परिणाम सोच रहा हूँ।
पहला वाक्य अतीत के बारे में अनिश्चित है, लेकिन घटना को असत्य नहीं मानता। दूसरे में वास्तविकता के विपरीत कल्पना है। इसलिए बीते समय की हर शर्त में होता लगाना भी उतना ही भ्रामक है जितना उसे हर जगह छोड़ देना।
शर्त और परिणाम अलग समय के हो सकते हैं
अगर मैंने तब बचत की होती, तो आज मेरे पास कुछ पैसे होते। शर्त बीते समय की है; परिणाम आज का है। अगर मुझे तैरना आता, तो मैं कल पानी में कूदकर उसकी मदद करता में मौजूदा क्षमता को कल की घटना से जोड़ा गया है। तब, कल, आज और अब जैसे शब्द समय समझने में मदद करते हैं।
अगर वह अभी यहाँ होता, तो हमारी मदद करता में होता अतीत नहीं बताता। इसी तरह अगर वह कल यहाँ होता, तो हमारी मदद करता में कल का अर्थ बीता या आने वाला दिन संदर्भ से तय होगा। ज़रूरत हो तो बीते सोमवार या आने वाले सोमवार कहकर अस्पष्टता दूर करें।
होती हुई घटना की कल्पना
अगर तुम ध्यान से सुन रहे होते, तो बात समझ जाते। यहाँ बात केवल सुनने की नहीं, उस समय सुनने का काम जारी होने की है। रहा होता / रही होती / रहे होते ऐसे जारी काम की कल्पना बनाते हैं।
तुलना करें: अगर तुमने सुना होता… पूरे सुन लेने पर ध्यान देता है; अगर तुम सुन रहे होते… उस दौरान ध्यान लगाने पर। संदर्भ दोनों को पास ला सकता है, पर उनका केंद्र अलग रहता है।
अगर हट जाए तो भी शर्त रह सकती है
तुम पहले बताते, तो मैं इंतज़ाम कर देता। यहाँ अगर नहीं है, फिर भी अर्थ है: अगर तुमने पहले बताया होता। ऐसी संक्षिप्त रचना बातचीत में सामान्य है। पहले बताते! अकेला कहा जाए तो शिकायत भी बन सकता है। शुरुआती अभ्यास में पूरा ढाँचा रखें; समझ बढ़ने पर ये छोटे रूप पहचानें।
जब, तभी, भले ही और जब तक
जब वह आएगा, तब बात करेंगे आने को अपेक्षित घटना मानकर उसके समय पर ध्यान देता है। अगर वह आएगा, तो बात करेंगे आने को शर्त बनाता है। दोनों पास हो सकते हैं, लेकिन हर जगह एक-दूसरे के बदले नहीं आते।
भले ही बारिश हो, हम जाएँगे में बारिश जाना रोक नहीं पाएगी। यह अगर बारिश हो, तो हम नहीं जाएँगे से अलग संबंध है। चाहे बारिश हो या धूप, हम जाएँगे दोनों स्थितियों में वही नतीजा रखता है।
जब तक पैसे नहीं मिलते, काम शुरू नहीं होगा काम शुरू होने से पहले पूरी होने वाली सीमा बताता है। काम तभी शुरू होगा जब पैसे मिलेंगे उसी ज़रूरी शर्त को दूसरे ढंग से उभारता है। ऐसे वाक्यों में केवल अलग-अलग शब्द नहीं, पूरे संबंध को समझें।
अभ्यास के तरीके
१. एक स्थिति के तीन रूप बनाएँ। जैसे: अगर समय मिला, तो आऊँगा; अगर समय होता, तो आता; अगर समय मिला होता, तो आया होता। हर वाक्य के बाद लिखें कि समय मिलना अभी संभव है, अभी उपलब्ध नहीं है या बीता अवसर निकल चुका है। स्त्री बोलने वाली के लिए आऊँगी, आती, आई होती करें।
२. रूप बदलते समय अर्थ भी जाँचें। समय की जगह छुट्टी, फिर पैसे रखें: समय होता, छुट्टी होती, पैसे होते। उसके बाद बोलने वाले को बदलें: मैं जाता, मैं जाती, हम जाते, हम जातीं। इससे दोनों हिस्सों के अलग-अलग मेल पर ध्यान जाएगा।
३. वास्तविक बातचीत से वाक्य चुनें। किसी संदेश, सूचना या कहानी में अगर, यदि, तो और तभी खोजें। शर्त को रेखांकित करें और परिणाम को घेरें। फिर पूछें: क्या यह संभावना है, सलाह है, सामान्य नियम है या बीती बात का अफ़सोस? पहचान की पुष्टि करने के लिए उसी वाक्य को दूसरी स्थिति में बदलकर देखें।
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