हिंदी में संबंधवाचक सर्वनाम और जोड़े
संबंधवाचक सर्वनाम
यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
हिंदी में जो–वह जैसे जोड़े किसी व्यक्ति या चीज़ की पहचान बताते हुए दो बातों को जोड़ते हैं: जो लड़का आया, वह मेरा भाई है। इसी तरह जहाँ–वहाँ जगह, जब–तब समय और जैसा–वैसा ढंग या समानता का संबंध दिखाते हैं। जोड़े के दोनों शब्द हमेशा एक ही रूप में नहीं रहते: जिससे मैंने बात की, उसे तुम जानते हो। हर हिस्से में शब्द का रूप उसके अपने काम के अनुसार चुनना होता है।
एक नज़र में
मान लीजिए, मेज़ पर तीन किताबें रखी हैं और आपको उनमें से एक चाहिए। केवल “किताब दो” कहने पर बात साफ़ नहीं होगी। आप कह सकते हैं: जो किताब ऊपर रखी है, वह मुझे दे दो। “जो किताब ऊपर रखी है” पहले किताब की पहचान करता है; “वह मुझे दे दो” बताता है कि उसके साथ क्या करना है। इस तरह बिना नाम दोहराए बहुत स्पष्ट बात कही जा सकती है।
संबंधवाचक सर्वनाम वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति या वस्तु की पहचान को वाक्य के दूसरे हिस्से से जोड़ते हैं; यहाँ मुख्य शब्द जो है। सर्वनाम का अर्थ है नाम की जगह आने वाला शब्द। संबंधवाचक उपवाक्य वाक्य का वह हिस्सा है जो यह पहचान या जानकारी देता है; उपवाक्य यानी बड़े वाक्य के भीतर अपनी क्रिया वाला हिस्सा। क्रिया काम या स्थिति बताने वाला शब्द है, जैसे “आया” या “है”। वह जैसे दूसरे शब्द को उसका सहसंबंधी कह सकते हैं: वह उसी व्यक्ति या चीज़ की ओर फिर संकेत करता है।
बी१ स्तर पर इन जोड़ों का अभ्यास इसलिए उपयोगी है कि इनसे बातचीत, निर्देश और अनुभवों का वर्णन अधिक सटीक बनता है। जगह और समय वाले शब्द भी इसी तरह वाक्य जोड़ते हैं, हालाँकि जहाँ और जब नाम की जगह आने के बजाय जगह और समय की जानकारी देते हैं। नाम याद करने से अधिक ज़रूरी है यह समझना कि दोनों हिस्सों के बीच संबंध क्या है।
बनावट और काम करने का तरीका
चार मुख्य जोड़े
| जोड़ा | किस बात का संबंध | उदाहरण |
|---|---|---|
| जो–वह | व्यक्ति या चीज़ की पहचान | जो छात्र तैयार हैं, वे अंदर आएँ। |
| जहाँ–वहाँ | जगह | जहाँ छाया है, वहाँ बैठिए। |
| जब–तब | समय या अवसर | जब घंटी बजी, तब सब बाहर निकले। |
| जैसा–वैसा | ढंग, प्रकार या समानता | जैसा तुमने बताया था, वैसा ही हुआ। |
पहला हिस्सा पहचान, जगह, समय या ढंग तय करता है। दूसरा हिस्सा उसी के बारे में मुख्य बात बताता है। उदाहरण के लिए, जहाँ तुम जाओ, वहाँ मैं जाऊँगा में “जहाँ तुम जाओ” जगह को खुला छोड़ता है; वह जगह तुम चुनोगे। “वहाँ मैं जाऊँगा” उसी जगह जाने की बात कहता है।
दोनों हिस्सों का अपना काम होता है
जो–वह का मतलब यह नहीं कि हर बार जो के बाद वह ही आएगा। दूसरे हिस्से में वह, वे, उसे, उन्हें, उसका आदि में से उचित रूप आएगा। तुलना करें:
- जो लड़की आई है, वह मेरी पड़ोसन है। — लड़की की पहचान बताई जा रही है।
- जो लड़की आई है, उसे यह चिट्ठी दे दो। — चिट्ठी उस लड़की को देनी है।
- जिस लड़की को तुमने बुलाया था, वह आ गई है। — पहले हिस्से में लड़की को बुलाया गया है; दूसरे में वही आई है।
इसलिए केवल शब्दों का जोड़ा रटने के बजाय प्रत्येक हिस्से को अलग देखकर पूछें: यहाँ कौन क्या कर रहा है, किसे कुछ मिल रहा है, और किससे संबंध बताया जा रहा है?
जो, जिस और जिन
परसर्ग वे शब्द हैं जो नाम या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध बताते हैं, जैसे को, से, में, पर, ने। इनके साथ जो का रूप बदलता है। एक व्यक्ति या चीज़ के लिए सामान्यतः जिस, और एक से अधिक के लिए जिन आता है। सम्मान के कारण भी जिन आ सकता है।
| काम | एक व्यक्ति या चीज़ | एक से अधिक व्यक्ति या चीज़ें |
|---|---|---|
| बिना परसर्ग का रूप | जो आया | जो आए |
| ने के साथ | जिसने लिखा | जिन्होंने लिखा |
| को के साथ | जिसको / जिसे बुलाया | जिनको / जिन्हें बुलाया |
| से के साथ | जिससे मिला | जिनसे मिला |
| में के साथ | जिसमें रखा | जिनमें रखा |
| पर के साथ | जिस पर बैठा | जिन पर बैठा |
| संबंध या मालिकाना | जिसका घर | जिनका घर |
जिसे और जिसको, दोनों मानक रूप हैं; जिन्हें और जिनको भी सही हैं। जो अपने आप स्त्रीलिंग या बहुवचन के कारण नहीं बदलता: जो लड़की आई, जो लड़के आए, जो लड़कियाँ आईं। लिंग यानी शब्द का पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होना; संख्या से यहाँ एक या अनेक होने का मतलब है।
ने केवल इसलिए नहीं लगाते कि वाक्य बीते समय का है। जो कल आया था, वह आज नहीं आएगा में आने वाले के साथ ने नहीं है। लेकिन जिसने दरवाज़ा खोला था, वह बाहर खड़ा है में खोलने वाले के साथ ने है। यह चुनाव उस क्रिया की सामान्य बनावट पर निर्भर करता है; संबंधवाचक वाक्य बनाने से वह नियम नहीं बदलता।
जिसका, जिसकी और जिसके
इन रूपों में का, की, के उस चीज़ के अनुसार बदलते हैं जिसका संबंध बताया जा रहा है, न कि मालिक स्त्री है या पुरुष इसके अनुसार।
- जिस लड़की का बैग खो गया था, वह मिल गया। — बैग पुल्लिंग है, इसलिए का।
- जिस लड़के की साइकिल बाहर है, उसे बुलाओ। — साइकिल स्त्रीलिंग है, इसलिए की।
- जिस छात्र के जूते भीग गए हैं, उसे अंदर आने दो। — जूते पुल्लिंग बहुवचन हैं, इसलिए के।
अगर संबंधित नाम के बाद परसर्ग हो, तो रूप उस बनावट के अनुसार बदलता है: जिस महिला के घर में बैठक हुई थी, वे आज नहीं आएँगी। यहाँ “घर में” के कारण के घर में है। महिला एक ही हैं, लेकिन सम्मान में “वे” और “आएँगी” आए हैं।
जैसा–वैसा में भी रूप बदलता है
जैसा–वैसा केवल काम करने का ढंग नहीं बताता; किसी चीज़ का प्रकार या गुण भी बता सकता है। किसी नाम के साथ आने पर उसके अनुसार रूप बदलते हैं:
| उदाहरण | रूप चुनने का कारण |
|---|---|
| जैसा कमरा चाहिए, वैसा मिलना मुश्किल है। | कमरा पुल्लिंग एकवचन है। |
| जैसी चाय मुझे पसंद है, वैसी यहाँ नहीं मिलती। | चाय स्त्रीलिंग है। |
| जैसे जूते तुम ढूँढ़ रहे हो, वैसे बाज़ार में मिल जाएँगे। | जूते पुल्लिंग बहुवचन हैं। |
| जैसे तुम बोलते हो, वैसे ही लिखते भी हो। | बोलने और लिखने के ढंग की तुलना है। |
| जैसा तुम ठीक समझो, वैसा करो। | किसी खास नाम के बिना उचित तरीके की बात है। |
वाक्यक्रम और क्रिया का रूप
सीखते समय पहचान वाला हिस्सा पहले रखना सरल है: जो फ़ाइल तुमने भेजी थी, वह खुल नहीं रही है। लेकिन यह एकमात्र क्रम नहीं है:
- वह फ़ाइल, जो तुमने भेजी थी, खुल नहीं रही है।
- वह फ़ाइल खुल नहीं रही है जो तुमने भेजी थी।
तीनों बनावटें संभव हैं। अंतर इस बात में है कि सुनने वाले को पहले क्या बताया जाता है और पहचान वाली जानकारी कहाँ जोड़ी जाती है। लंबे वाक्यों में दोनों संबंधित हिस्सों को पास रखना अधिक स्पष्ट रहता है।
संबंधवाचक शब्द अपने आप कोई खास काल नहीं माँगता। जो रोज़ आता है, जो कल आया था, और जो कल आएगा, तीनों सही हैं। काल यानी काम के वर्तमान, बीते या आने वाले समय का संकेत। जो चाहो, वह करो में “चाहो” किसी तय घटना के बजाय खुली इच्छा बताता है। ऐसे संभाव्य रूपों पर आगे फिर बात होगी।
प्रसंग में उदाहरण
यहाँ सीखने और समझाने की भाषा दोनों हिंदी हैं। इसलिए दूसरे खाने में अनुवाद दोहराने के बजाय उसी बात का सरल अर्थ दिया गया है।
| हिंदी उदाहरण | सरल अर्थ | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| जो लड़का आया, वह मेरा भाई है। | आने वाला लड़का मेरा भाई है। | पहले पहचान, फिर उसके बारे में मुख्य बात। |
| जो चाबी तुम ढूँढ़ रहे हो, वह दराज़ में है। | तुम्हारी तलाश वाली चाबी दराज़ में रखी है। | जो से चीज़ की पहचान भी होती है। |
| जिन लोगों ने नाम लिखवाया है, उन्हें संदेश भेज दें। | नाम दर्ज करा चुके लोगों को संदेश भेजना है। | पहले हिस्से में ने, दूसरे में को का काम है। |
| जिससे आपने बात की थी, वह आज छुट्टी पर है। | आपके साथ बात करने वाला व्यक्ति आज नहीं आया है। | बात करना: किसी से। |
| जिस दुकान से दवा ली थी, वह बंद है। | दवा खरीदने वाली दुकान अब खुली नहीं है। | जिस से दुकान की पहचान है; वह उसी दुकान को बताता है। |
| जिसकी बारी है, वह आगे आए। | अब जिस व्यक्ति का क्रम है, उसे आगे आना चाहिए। | बारी स्त्रीलिंग है, इसलिए जिसकी। |
| जहाँ तुम जाओ, वहाँ मैं जाऊँगा। | तुम जिस जगह जाने का चुनाव करोगे, मैं भी उसी जगह जाऊँगा। | जगह अभी तय नहीं है। |
| जहाँ पहले डाकघर था, वहाँ अब पुस्तकालय है। | पुराने डाकघर की जगह पर पुस्तकालय बन गया है। | दोनों हिस्सों का समय अलग हो सकता है। |
| जब आप पहुँचें, तब मुझे फ़ोन कर दें। | पहुँचने पर मुझे ख़बर दे दीजिए। | आने वाले अवसर पर विनम्र निर्देश। |
| जब भी बिजली जाती है, तब यह बत्ती जल जाती है। | हर बार बिजली बंद होने पर यह बत्ती अपने आप जलती है। | भी से हर अवसर का अर्थ मिलता है। |
| जैसा तुमने नक्शे में दिखाया था, वैसा ही रास्ता निकला। | रास्ता तुम्हारे दिखाए हुए रास्ते से मेल खाता था। | ही समानता पर ज़ोर देता है। |
| जैसी मदद मुझे मिली थी, वैसी मैं भी दूसरों को देना चाहता हूँ। | मुझे मिली मदद जैसी सहायता मैं आगे देना चाहता हूँ। | मदद के साथ जैसी–वैसी। |
| जो चाहो, वह करो। | अपनी इच्छा के अनुसार काम चुनो। | जो के बाद कोई नाम ज़रूरी नहीं है। |
| जो भी पहले पहुँचे, वह दरवाज़ा खोल दे। | पहले आने वाला कोई भी व्यक्ति दरवाज़ा खोल सकता है। | व्यक्ति तय नहीं है। |
आम गलतियाँ
१. परसर्ग के सामने भी जो बनाए रखना
- गलत: जो से तुम मिले थे, वह मेरे शिक्षक हैं।
- सही: जिनसे तुम मिले थे, वे मेरे शिक्षक हैं।
- क्यों: से के साथ जो का रूप बदलना चाहिए। यहाँ एक शिक्षक के लिए सम्मानसूचक जिनसे और वे चुने गए हैं। बिना सम्मान के किसी एक व्यक्ति की बात हो, तो जिससे तुम मिले थे, वह मेरा दोस्त है कह सकते हैं।
२. दोनों हिस्सों में एक ही रूप लगाने की कोशिश
- गलत: जिसे तुमने बुलाया था, उसे आ गया है।
- सही: जिसे तुमने बुलाया था, वह आ गया है।
- क्यों: पहले हिस्से में किसी को बुलाया गया है, इसलिए जिसे। दूसरे में वही व्यक्ति आया है, इसलिए वह। एक हिस्से का रूप दूसरे हिस्से पर मत थोपिए।
३. जिसका का रूप मालिक के अनुसार चुनना
- गलत: जिस महिला की बैग यहाँ है, उन्हें बुलाइए।
- सही: जिस महिला का बैग यहाँ है, उन्हें बुलाइए।
- क्यों: महिला स्त्री हैं, लेकिन का का संबंध बैग से है। इसी तरह पुरुष के बारे में भी जिस आदमी की चाबी खो गई कहा जाएगा।
४. जैसा–वैसा को हर जगह जस का तस रखना
- गलत: जैसा साड़ी आपने माँगी थी, वैसा मिल गई है।
- सही: जैसी साड़ी आपने माँगी थी, वैसी मिल गई है।
- क्यों: साड़ी स्त्रीलिंग है। यहाँ जैसी, वैसी और मिल गई, सभी रूप उसी के अनुसार हैं।
५. प्रश्न और संबंध को गड़बड़ा देना
- प्रश्न पूछना हो तो गलत: जब दुकान खुलेगी?
- सही प्रश्न: दुकान कब खुलेगी?
- जुड़ा हुआ वाक्य: जब दुकान खुलेगी, तब मैं दवा ले आऊँगा।
- क्यों: कब समय पूछता है; जब उस समय को दूसरे हिस्से से जोड़ता है। इसी तरह कहाँ बैठें? सवाल है और जहाँ जगह मिले, वहाँ बैठें जगह चुनने का निर्देश है।
प्रयोग से जुड़ी बातें
दूसरा शब्द कब छूट सकता है?
जब अर्थ साफ़ हो, तो जोड़े का दूसरा शब्द अक्सर नहीं बोला जाता: जब पहुँचो, फ़ोन कर देना। यहाँ तब न होने पर भी बात पूरी समझ आती है। जहाँ जगह मिले, बैठ जाओ और जो चाहिए, ले लो भी स्वाभाविक हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि दूसरा शब्द हमेशा अनावश्यक है। जो चाबी तुम ढूँढ़ रहे हो, वह मेरे पास है में वह रखना स्पष्ट और स्वाभाविक है। लंबे वाक्यों में दूसरा शब्द पाठक को पहले हिस्से से दोबारा जोड़ता है। शुरुआती अभ्यास में पूरा जोड़ा लिखें; बाद में सुनकर देखें कि कहाँ उसे छोड़ना सहज है।
वही, वहीं और तभी का ज़ोर
वह और वही में अंतर है। वही का अर्थ संदर्भ के अनुसार “ठीक वही” या “केवल वही” हो सकता है: जो किताब तुमने सुझाई थी, वही मैंने खरीदी। इसमें चुनी गई किताब पर ज़ोर है। जहाँ गाड़ी खड़ी है, वहीं रुको में ठीक उसी जगह रुकने को कहा जा रहा है।
तभी कभी किसी खास समय पर, और कभी किसी बात की अनिवार्य शर्त पर ज़ोर देता है: जब पूरी जानकारी मिलेगी, तभी फ़ैसला करेंगे। यहाँ अधूरी जानकारी पर फ़ैसला न करने की बात है। केवल संबंध बनाने के लिए हर वाक्य में ही लगाना ज़रूरी नहीं है।
बोलचाल और लिखित भाषा
बोलचाल में वो किताब जो तुम लाए थे जैसी बनावट आम है। सामान्य लिखित हिंदी में वह और वे उपयोगी मानक रूप हैं। जिस व्यक्ति को अधिक स्पष्ट लग सकता है, जबकि जिसे छोटा और सहज है; दोनों में किसी एक को हमेशा अधिक सही मानना उचित नहीं।
अल्पविराम लंबे हिस्सों की सीमा दिखा सकता है: जिस मकान में हम पहले रहते थे, वह अब बिक गया है। लेकिन हर जो से पहले या बाद में अल्पविराम लगाने का नियम नहीं है। विरामचिह्न से अधिक ज़रूरी है कि पाठक आसानी से समझ सके कि पहचान किसकी हो रही है।
आगे की बारीकियाँ
पहचाना हुआ व्यक्ति या कोई भी व्यक्ति
जो छात्र दरवाज़े पर खड़ा है, वह मेरा साथी है में किसी खास छात्र की पहचान हो रही है। जो मेहनत करता है, वह आगे बढ़ता है एक सामान्य बात है; इसमें कोई एक व्यक्ति तय नहीं है। दोनों में बनावट मिलती-जुलती है, लेकिन अर्थ संदर्भ से बदलता है।
भी जोड़ने से खुले चुनाव का अर्थ और स्पष्ट हो सकता है: जो भी मदद माँगे, उसकी बात सुनो। इसका आशय किसी खास व्यक्ति से नहीं, मदद माँगने वाले किसी भी व्यक्ति से है। इसी तरह जहाँ भी जाओ, अपना ध्यान रखना और जब भी समय मिले, पढ़ लेना में हर उपयुक्त जगह या अवसर शामिल है।
निश्चित घटना और संभावना में अंतर
संभाव्य रूप क्रिया का वह रूप है जो किसी बात को पक्का तथ्य बताने के बजाय इच्छा, संभावना या खुले चुनाव के रूप में रखता है। तुलना करें:
- जो छात्र नियमित आता है, उसे अभ्यास समझ में आ जाता है। — एक सामान्य आदत की बात है।
- जो छात्र कल आएगा, उसे यह पर्चा दे देना। — आने वाले छात्र के लिए व्यवस्था है।
- जो भी कल आए, उसे यह पर्चा दे देना। — व्यक्ति तय नहीं; जो कोई आए, उसे देना है।
तीसरे उदाहरण में आए संभावना को खुला रखता है। फिर भी यह निष्कर्ष न निकालें कि हर जो, जब या जहाँ के बाद संभाव्य रूप ही चाहिए। जब वह आया, तब मैं बाहर था पूरी तरह सही है; घटना बीत चुकी है।
पहचान बताना और अतिरिक्त जानकारी देना
जो कर्मचारी रात की पाली में हैं, वे कल देर से आएँगे में कर्मचारियों के एक समूह को बाकी कर्मचारियों से अलग किया गया है। इसके विपरीत मेरी बहन, जो पुणे में रहती है, कल आ रही है में बहन के बारे में अतिरिक्त जानकारी दी जा सकती है; संदर्भ में उनकी पहचान पहले से साफ़ हो सकती है।
इन्हें क्रमशः पहचान सीमित करने वाली और अतिरिक्त जानकारी देने वाली बनावट समझें। हिंदी में दोनों के लिए जो का प्रयोग संभव है। केवल अल्पविराम देखकर अर्थ तय करने के बजाय संदर्भ और यह बात देखें कि सुनने वाला व्यक्ति को पहले से पहचानता है या नहीं।
जब–तब और शर्त
जब बारिश होती है, तब सड़क पर पानी भर जाता है बार-बार होने वाली घटना बताता है। अगर बारिश हुई, तो सड़क पर पानी भर जाएगा एक संभावित परिस्थिति और उसका नतीजा बताता है। जब मुख्य रूप से समय से जोड़ता है; अगर शर्त, यानी “यह बात हुई तो”, रखता है। कुछ प्रसंगों में इनके अर्थ पास आ सकते हैं, फिर भी दोनों को हर जगह बदल देना ठीक नहीं।
जैसा और जितना
समानता बताते समय प्रकार और मात्रा में फ़र्क करें:
- जैसी चाय आपने बनाई थी, वैसी ही बनाइए। — स्वाद या प्रकार की बात है।
- जितनी चाय चाहिए, उतनी ही बनाइए। — मात्रा की बात है।
जितना–उतना इसी संबंधवाचक ढाँचे का उपयोगी विस्तार है, लेकिन जैसा–वैसा का समानार्थी नहीं। यह मात्रा या हद मिलाता है: जितना अभ्यास करोगे, उतना आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अभ्यास के तरीके
१. दो छोटी बातों को जोड़ें। “एक महिला ने रास्ता बताया। वे यहीं रहती हैं।” से बनाएँ: जिन्होंने रास्ता बताया, वे यहीं रहती हैं। फिर भूमिका बदलें: “मैंने एक महिला से रास्ता पूछा। वे यहीं रहती हैं।” अब होगा: जिनसे मैंने रास्ता पूछा, वे यहीं रहती हैं। इससे समझ आएगा कि सम्मान समान रहते हुए भी जिन्होंने और जिनसे क्यों बदलते हैं।
२. एक ही प्रसंग को चार ढंग से लिखें। किसी बैठक के बारे में व्यक्ति के लिए जो–वह, जगह के लिए जहाँ–वहाँ, समय के लिए जब–तब और व्यवस्था के लिए जैसा–वैसा वाला वाक्य बनाएँ। फिर हर वाक्य में संबंधित दोनों शब्द रेखांकित करें और देखें कि वे किस चीज़ की ओर लौट रहे हैं।
३. रूप चुनकर कारण बोलें। रिक्त स्थान भरें: “___ किताब चाहिए, उसे चुन लो”; “___ तुमने फ़ोन किया था, वे घर पर नहीं हैं”; “___ मदद माँगी थी, वैसी मिल गई।” उत्तर हैं जो, जिन्हें, जैसी। पहले में किताब की पहचान है, दूसरे में सम्मानपूर्वक किसी को फ़ोन करने की बात है, और तीसरे में मदद का प्रकार बताया गया है। केवल उत्तर याद न करें; कारण भी अपने शब्दों में कहें।
संबंधित विषय
- पहले समझें: संभावना और संभाव्य रूप — जो भी आए, जब आप पहुँचें और जहाँ चाहो जैसे खुले या संभावित प्रसंगों में क्रिया का रूप समझने के लिए उपयोगी।