हिंदी में कर्मवाच्य
कर्मवाच्य
यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
कर्मवाच्य में ध्यान काम करने वाले से हटकर उस व्यक्ति या वस्तु पर जाता है जिस पर काम होता है: रसोइए ने खाना बनाया → खाना बनाया गया। इसका मुख्य ढाँचा है मुख्य क्रिया का पूर्ण रूप + जाना का उपयुक्त रूप, जैसे खाया गया, लिखी जाएगी, बोली जाती है। काम करने वाले का नाम आवश्यक न हो तो छोड़ सकते हैं; बताना हो तो प्रसंग के अनुसार से, द्वारा या के द्वारा लगाते हैं।
पहले मूल बात समझें
वाच्य क्रिया को प्रस्तुत करने का ढंग है: वाक्य किसके काम को सामने रखता है और क्रिया का रूप किसके अनुसार चलता है। कर्ता काम करने वाला है, कर्म वह व्यक्ति या वस्तु है जिस पर काम होता है, और क्रिया काम या घटना बताने वाला शब्द है। जैसे, सीमा ने चिट्ठी लिखी में सीमा कर्ता है, चिट्ठी कर्म है और लिखी क्रिया है। इसे कर्तृवाच्य कहते हैं, क्योंकि वाक्य काम करने वाले को सामने रखकर बनाया गया है।
चिट्ठी लिखी गई में वही काम दूसरे ढंग से बताया गया है। अब चिट्ठी मुख्य विषय है; सीमा का नाम बताना जरूरी नहीं। यही कर्मवाच्य है। यह केवल शब्दों का क्रम बदलना नहीं है: सीमा ने चिट्ठी लिखी → चिट्ठी सीमा ने लिखी करने से कर्मवाच्य नहीं बनता। उसके लिए लिखी गई जैसा क्रिया-समूह चाहिए।
बी१ स्तर पर यह ढाँचा सूचनाएँ, समाचार, प्रक्रियाएँ और सामान्य व्यवस्थाएँ समझने में बहुत काम आता है। यहाँ हिंदी बोली जाती है, आवेदन ऑनलाइन जमा किए जाते हैं और आपको सूचना दी जाएगी जैसे वाक्य रोज सुनाई देते हैं। पहले सरल रूप सीखें; आगे दिए गए को, असमर्थता और परिणाम बताने वाले रूपों के भेद धीरे-धीरे समझें।
कर्मवाच्य कैसे बनता है?
१. ऐसी क्रिया चुनें जिसका कर्म हो
कर्मवाच्य का सबसे सीधा आधार सकर्मक क्रिया, यानी ऐसा काम है जिसका कोई कर्म हो: खाना खाना, किताब लिखना, सामान भेजना, कमरा साफ करना। काम के साथ पूछें: क्या खाया, क्या लिखा, किसे बुलाया?
- राम ने खाना खाया। → खाना खाया गया।
- लेखिका ने किताब लिखी। → किताब लिखी गई।
- कर्मचारियों ने कमरे साफ किए। → कमरे साफ किए गए।
इसके विपरीत बच्चा सोया में सोने का कोई कर्म नहीं है। ऐसी अकर्मक क्रिया, यानी बिना कर्म वाली क्रिया, का सामान्य कर्मवाच्य इसी तरीके से नहीं बनाया जा सकता। मुझसे सोया नहीं जाता जैसे रूप अलग अर्थ और ढाँचे वाले हैं; उनका परिचय आगे है।
२. मुख्य क्रिया का पूर्ण रूप लें, केवल मूल अंश नहीं
पूर्ण रूप से यहाँ आशय खाया, लिखा, किया, दिया जैसे रूपों से है, जिनसे काम पूरा होने का भाव व्यक्त हो सकता है। कर्मवाच्य में इन्हीं के बाद जाना के रूप जुड़ते हैं। इसलिए खाना से खाना गया नहीं, बल्कि खाया गया बनता है।
| क्रिया | पुल्लिंग एकवचन का पूर्ण रूप | स्त्रीलिंग का पूर्ण रूप | कर्मवाच्य का उदाहरण |
|---|---|---|---|
| खाना | खाया | खाई | रोटी खाई गई। |
| लिखना | लिखा | लिखी | किताब लिखी गई। |
| पढ़ना | पढ़ा | पढ़ी | पत्र पढ़ा गया। |
| करना | किया | की | जाँच की गई। |
| देना | दिया | दी | अनुमति दी गई। |
| लेना | लिया | ली | राय ली गई। |
| भेजना | भेजा | भेजी | चिट्ठी भेजी गई। |
करना, देना और लेना के रूप विशेष ध्यान से सीखें। जाँच करी गई की जगह मानक लिखित हिंदी में जाँच की गई लिखें।
३. लिंग और वचन का मेल रखें
लिंग शब्द का पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होना है; वचन से एक या एक से अधिक होने का पता चलता है। जब कर्म के साथ को नहीं लगा हो, तो सामान्यतः मुख्य क्रिया और उसके बाद के रूप उसी कर्म के लिंग-वचन से मेल खाते हैं। इस मेल को अन्विति कहते हैं।
| लिंग-वचन | पूरा हुआ काम | नियमित काम | भविष्य का काम |
|---|---|---|---|
| पुल्लिंग एकवचन | पत्र भेजा गया। | पत्र भेजा जाता है। | पत्र भेजा जाएगा। |
| पुल्लिंग बहुवचन | पत्र भेजे गए। | पत्र भेजे जाते हैं। | पत्र भेजे जाएँगे। |
| स्त्रीलिंग एकवचन | चिट्ठी भेजी गई। | चिट्ठी भेजी जाती है। | चिट्ठी भेजी जाएगी। |
| स्त्रीलिंग बहुवचन | चिट्ठियाँ भेजी गईं। | चिट्ठियाँ भेजी जाती हैं। | चिट्ठियाँ भेजी जाएँगी। |
ध्यान दें: चिट्ठियाँ भेजी गईं में अंतिम रूप गईं है, लेकिन चिट्ठियाँ भेजी जाती हैं में जाती के बाद हैं आता है। हर स्त्रीलिंग बहुवचन रूप पर अपने-आप चंद्रबिंदु न लगाएँ; पूरा क्रिया-समूह देखें।
४. समय और काम की स्थिति के अनुसार जाना बदलें
कर्मवाच्य केवल भूतकाल में नहीं होता। काल घटना का समय बताता है; साथ ही क्रिया यह भी बताती है कि काम नियमित है, चल रहा है या पूरा हो चुका है। मुख्य क्रिया का पूर्ण रूप रहने पर भी पूरा वाक्य वर्तमान या भविष्य का हो सकता है: पढ़ा जाता है, पढ़ा जाएगा।
| समय या स्थिति | पुल्लिंग का उदाहरण | स्त्रीलिंग का उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य वर्तमान | कमरा साफ किया जाता है। | मेज़ साफ की जाती है। |
| भूतकाल की नियमित व्यवस्था | कमरा साफ किया जाता था। | मेज़ साफ की जाती थी। |
| अभी चल रहा काम | कमरा साफ किया जा रहा है। | मेज़ साफ की जा रही है। |
| बीते समय में चल रहा काम | कमरा साफ किया जा रहा था। | मेज़ साफ की जा रही थी। |
| पूरा हुआ काम | कमरा साफ किया गया। | मेज़ साफ की गई। |
| काम पूरा होने की वर्तमान सूचना | कमरा साफ किया गया है। | मेज़ साफ की गई है। |
| पहले ही पूरा हो चुका काम | कमरा साफ किया गया था। | मेज़ साफ की गई थी। |
| भविष्य | कमरा साफ किया जाएगा। | मेज़ साफ की जाएगी। |
गया देखकर हर बार कहीं जाने की कल्पना न करें। मोहन बाजार गया में जाना सचमुच स्थान बदलना है। पत्र भेजा गया में यह सहायक क्रिया, यानी मुख्य क्रिया को व्याकरणिक अर्थ देने वाली क्रिया है।
५. काम करने वाले का उल्लेख जरूरत पर करें
यह किताब राम द्वारा लिखी गई। में राम ने काम किया है। द्वारा उसके नाम को क्रिया से जोड़ता है। यही बात यह किताब राम के द्वारा लिखी गई से भी कही जा सकती है; कई प्रसंगों में छोटा राम द्वारा अधिक सीधा लगता है।
से भी काम करने वाले को बता सकता है, लेकिन हर जगह द्वारा का सीधा विकल्प नहीं है। यह काम मुझसे किया गया प्रसंग के अनुसार संभव है, पर बोलचाल में अक्सर यह काम मैंने किया अधिक सहज है। औपचारिक सूचना में समिति द्वारा निर्णय लिया गया स्वाभाविक है।
इसके अलावा से साधन भी बताता है: रस्सी चाकू से काटी गई में चाकू काम करने वाला नहीं, काम का साधन है। केवल से देखकर यह तय न करें कि उससे पहले का शब्द कर्ता है।
प्रसंगों में उदाहरण
नीचे दूसरे स्तंभ में अनुवाद की जगह उसी बात का सरल हिंदी अर्थ दिया गया है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कर्मवाच्य वाक्य में किस बात पर जोर है।
| कर्मवाच्य का वाक्य | सरल हिंदी में अर्थ | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| खाना खाया गया। | किसी ने खाना खा लिया। | खाना मुख्य विषय है; खाने वाले का नाम नहीं है। |
| यह किताब राम द्वारा लिखी गई। | राम ने यह किताब लिखी। | लेखक का नाम द्वारा से बताया गया है। |
| यहाँ हिंदी बोली जाती है। | यहाँ लोग हिंदी बोलते हैं। | सामान्य भाषा-प्रयोग की बात है। |
| इस केंद्र में हर शुक्रवार टीके लगाए जाते हैं। | केंद्र के कर्मचारी शुक्रवार को टीके लगाते हैं। | नियमित व्यवस्था; पुल्लिंग बहुवचन। |
| सड़क की मरम्मत की जा रही है। | अभी सड़क ठीक करने का काम चल रहा है। | चल रही क्रिया का रूप मरम्मत से मेल खाता है। |
| सभी खिड़कियाँ बंद कर दी गईं। | किसी ने सारी खिड़कियाँ बंद कर दीं। | स्त्रीलिंग बहुवचन और पूरा किया गया काम। |
| आपको कल तक सूचना दी जाएगी। | कल तक कोई आपको जानकारी देगा। | दी जाएगी का मेल सूचना से है। |
| बच्चों को अंदर बुलाया गया। | किसी ने बच्चों को अंदर आने के लिए कहा। | बच्चों को के कारण बुलाया गया का सामान्य रूप। |
| क्या आवेदन जमा कर दिया गया है? | क्या किसी ने आवेदन जमा कर दिया है? | पूरे हो चुके काम के बारे में प्रश्न। |
| यह दवा खाली पेट नहीं ली जाती। | आम तौर पर लोग यह दवा खाली पेट नहीं लेते। | किसी खास दवा के प्रयोग की सामान्य बात। |
| पुरानी फाइलें पिछले साल हटा दी गई थीं। | किसी ने पिछले साल पुरानी फाइलें हटा दी थीं। | पहले पूरा हुआ काम; स्त्रीलिंग बहुवचन। |
| बिना पहचान-पत्र के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। | पहचान-पत्र न होने पर अंदर नहीं आने देंगे। | नियम या रोक बताने वाला भविष्य। |
अंतिम जैसे सूचना-वाक्यों में यह बताने की जरूरत नहीं रहती कि प्रवेश रोकने वाला कौन होगा। संस्था, कर्मचारी या व्यवस्था प्रसंग से समझ में आ जाते हैं।
आम गलतियाँ
१. पूरा रूप छोड़कर सीधे जाना जोड़ना
- गलत: किताब लिखना गई।
- सही: किताब लिखी गई।
- कारण: लिखना क्रिया का नाम है। यहाँ उसका पूर्ण रूप लिखी चाहिए, जो किताब से मेल खाता है।
२. जाना का रूप कर्म से न मिलाना
- गलत: यह किताब लिखा गया।
- सही: यह किताब लिखी गई।
- कारण: किताब स्त्रीलिंग है। इसलिए दोनों हिस्से लिखी गई होंगे। इसी तरह ये पत्र भेजे गए, न कि ये पत्र भेजा गया।
३. पुराने कर्ता के साथ ने बनाए रखना
- गलत: यह किताब राम ने लिखी गई।
- सही: यह किताब राम द्वारा लिखी गई।
- दूसरा सही विकल्प: राम ने यह किताब लिखी।
- कारण: ने वाला कर्तृवाच्य ढाँचा और लिखी गई वाला कर्मवाच्य ढाँचा यहाँ मिला दिए गए हैं। आशय के अनुसार कोई एक पूरा ढाँचा चुनें।
४. को लगे कर्म से जबरन बहुवचन मिलाना
- गलत: बच्चों को बुलाए गए।
- सही: बच्चों को बुलाया गया।
- कारण: इस ढाँचे में बच्चों को क्रिया का लिंग-वचन तय नहीं करता। इसलिए सामान्य पुल्लिंग एकवचन बुलाया गया आता है। तुलना करें: बच्चे बुलाए गए भी सही है, लेकिन उसमें को नहीं है।
५. नियमित काम और एक बार हुए काम को मिलाना
- गलत, यदि रोज की व्यवस्था बतानी हो: यहाँ रोज चाय बनाई गई।
- सही: यहाँ रोज चाय बनाई जाती है।
- कारण: रोज की मौजूदा व्यवस्था के लिए जाती है चाहिए। किसी बीते दौर की नियमित व्यवस्था हो तो यहाँ रोज चाय बनाई जाती थी कहें। चाय बनाई गई किसी पूरे हुए काम का रूप है।
६. हर क्रिया को इसी तरह बदल देना
- गलत: बच्चा सोया गया।
- सही: बच्चा सोया।
- कारण: सोना का कर्म नहीं है। केवल वाक्य को औपचारिक बनाने के लिए गया न जोड़ें।
कहाँ और कैसे प्रयोग करें?
जब व्यक्ति से ज्यादा काम महत्वपूर्ण हो
आपका आवेदन स्वीकार कर लिया गया है में प्राप्तकर्ता के लिए निर्णय महत्वपूर्ण है, उसे स्वीकार करने वाले कर्मचारी का नाम नहीं। इसी तरह समाचार में पुल का उद्घाटन किया गया और प्रक्रिया में दूध को गर्म किया जाता है स्वाभाविक हैं।
कर्ता को हटाने के कई कारण हो सकते हैं: उसका नाम मालूम नहीं, प्रसंग से स्पष्ट है, या बात उसके बारे में नहीं है। इसलिए कर्मवाच्य का अर्थ हमेशा यह नहीं कि कोई जानबूझकर जिम्मेदारी छिपा रहा है। फिर भी गलतियाँ की गईं जैसा वाक्य जिम्मेदार व्यक्ति को अस्पष्ट छोड़ सकता है। जरूरी हो तो स्पष्ट नाम जोड़ें या कर्तृवाच्य चुनें।
बोलचाल और औपचारिक लेखन
बोलचाल में किसी ने मेरा बैग उठा लिया अक्सर मेरा बैग उठा लिया गया से अधिक सहज है। लेकिन मुझे बताया गया था कि दुकान खुली है जैसी बात बातचीत में भी बिल्कुल सामान्य है। कर्मवाच्य को केवल सरकारी भाषा न समझें।
आपको सूचित किया जाता है कि… औपचारिक पत्र का ढाँचा है। घर में उसी बात के लिए आपको बता दूँ कि… अधिक सहज हो सकता है। सही रूप चुनने के साथ यह भी देखें कि बातचीत किससे और किस उद्देश्य से हो रही है।
निषेध, प्रश्न और निर्देश
निषेध, यानी किसी बात को नकारना या रोकना, सामान्यतः नहीं से बनता है: यहाँ गाड़ियाँ खड़ी नहीं की जातीं। प्रश्न में ढाँचा नहीं बदलता: क्या यहाँ गाड़ियाँ खड़ी की जाती हैं?, फैसला कब लिया जाएगा?
निर्देशों में कृपया दरवाजा बंद किया जाए और सभी दस्तावेज साथ लाए जाएँ मिलते हैं। ये औपचारिक निर्देश हैं। सीधे कृपया दरवाजा बंद करें और सभी दस्तावेज साथ लाएँ भी सही हैं। कर्मवाच्य अपने-आप हर अनुरोध को अधिक विनम्र नहीं बनाता।
आगे की बारीकियाँ
को होने पर किससे मेल होगा?
पहला नियम याद रखें: को लगा पद सामान्यतः क्रिया का लिंग-वचन तय नहीं करता। लेकिन वाक्य में कोई दूसरा, बिना को वाला कर्म हो तो क्रिया उससे मेल खा सकती है।
- लड़कियों को बुलाया गया। — यहाँ बुलाने वाले व्यक्ति के नाम के बिना भी वाक्य पूरा है; रूप बुलाया गया रहता है।
- लड़कियों को किताबें दी गईं। — यहाँ किताबें दी गई हैं; रूप उनसे मेल खाता है।
- लड़कियों को पत्र दिए गए। — अब पत्र पुल्लिंग बहुवचन है, इसलिए दिए गए है।
दूसरे और तीसरे वाक्य में लड़कियों को पाने वाला पक्ष है। उसे कभी अप्रत्यक्ष कर्म, यानी वह व्यक्ति जिसे कोई वस्तु दी जाती है, कहा जाता है। पहले यह पहचानें कि क्या दिया गया, फिर क्रिया का मेल जाँचें।
संभावना और आवश्यकता
कर्मवाच्य के साथ सकना जोड़कर संभावना या अनुमति बताई जाती है: यह फॉर्म ऑनलाइन भरा जा सकता है, ये किताबें घर ले जाई जा सकती हैं। यहाँ दो बातें साथ हैं: काम कौन करेगा, यह मुख्य नहीं; और काम करना संभव या अनुमत है।
जरूरत या उचित काम के लिए चाहिए आता है: यह गलती सुधारी जानी चाहिए, सभी दरवाजे बंद किए जाने चाहिए। जानी/जाने का मेल भी ध्यान देने योग्य है।
यह काम किया जाना है तय या अपेक्षित काम बताता है। यह काम किया जाना चाहिए उसे उचित या आवश्यक बताता है। दोनों को एक ही अर्थ में न लें।
कर्मवाच्य और परिणाम की स्थिति
इन वाक्यों में फर्क देखें:
- दरवाजा बंद किया गया। — किसी ने उसे बंद करने का काम किया।
- दरवाजा बंद है। — अभी उसकी स्थिति बंद है।
- दरवाजा बंद हो गया। — उसकी स्थिति बदली; उसे किसने या किस कारण बंद किया, यह नहीं बताया।
इसी तरह पत्र लिखा गया है लिखने की घटना की सूचना देता है, जबकि पत्र लिखा हुआ है लिखे होने की स्थिति सामने रखता है। कई प्रसंगों में दोनों से मिलती-जुलती जानकारी मिलती है, लेकिन हर हुआ वाला रूप कर्मवाच्य नहीं है।
संयुक्त क्रिया का कर्मवाच्य
संयुक्त क्रिया में दो क्रियाएँ मिलकर काम का ढंग या पूरा होना बताती हैं, जैसे लिख देना, कर लेना। कर्मवाच्य में यह अतिरिक्त भाव बना रह सकता है:
- कर्मचारी ने सूची बना दी। → सूची बना दी गई।
- समिति ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। → प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया।
सूची बनाई गई केवल बनाने की घटना बताता है। सूची बना दी गई में काम पूरा करके निपटा देने का भाव अधिक उभर सकता है। हर वाक्य में दिया या लिया जोड़ना जरूरी नहीं।
से के साथ असमर्थता और भाववाच्य की सीमा
मुझसे यह काम नहीं किया जाता का अर्थ अक्सर यह होता है कि मैं यह काम कर नहीं पाता। यह केवल मेरे द्वारा यह काम नहीं किया जाता वाली तटस्थ सूचना नहीं है। मुझसे यह बोझ नहीं उठाया जाता में असमर्थता का अर्थ विशेष रूप से स्पष्ट है।
मुझसे चला नहीं जाता और उससे बैठा नहीं जाता में कोई कर्म नहीं है; फिर भी जाता वाला ढाँचा आता है। ऐसे प्रयोगों को सामान्यतः भाववाच्य, यानी व्यक्ति या कर्म के बजाय क्रिया के होने या न हो पाने को प्रमुख बनाने वाला ढाँचा, पढ़ते समय समझाया जाता है। व्याकरण की अलग पुस्तकों में सीमांत उदाहरणों का वर्गीकरण कुछ अलग हो सकता है। व्यावहारिक बात यह है: इन्हें साधारण किताब लिखी गई वाले नियम का सीधा विस्तार मानकर न बनाएँ।
मुझसे गलती हो गई में अनजाने में कुछ हो जाने का भाव है। यह भी मेरे द्वारा गलती की गई का हर प्रसंग में समान विकल्प नहीं है। से का अर्थ हमेशा पूरे वाक्य और प्रसंग से समझें।
अभ्यास के तरीके
१. एक काम, चार रूप लिखें। पहले पत्र भेजा गया लिखें। फिर पत्र को बहुवचन में रखें और उसके बाद उसकी जगह चिट्ठी तथा चिट्ठियाँ रखकर पूरे वाक्य बनाएँ: पत्र भेजे गए, चिट्ठी भेजी गई, चिट्ठियाँ भेजी गईं। फिर यही क्रम भेजा जाता है और भेजा जाएगा के साथ दोहराएँ। केवल आखिरी शब्द नहीं, पूरा क्रिया-समूह बोलें।
२. सूचनाओं में काम और समय पहचानें। किसी सूचना-पट्ट या संदेश से तीन वाक्य चुनें। उनमें देखें: क्या काम हुआ है, क्या रोज होता है, क्या आगे होगा? आवेदन लिए जाते हैं और आवेदन लिए जाएँगे का अंतर अपने शब्दों में समझाएँ। काम करने वाला स्पष्ट न हो तो उसे अपनी ओर से निश्चित न मानें।
३. पहले बदलें, फिर स्वाभाविकता जाँचें। इन वाक्यों को कर्मवाच्य में लिखें: रीना ने रिपोर्ट भेजी, कर्मचारियों ने दरवाजे खोले, शिक्षक ने बच्चों को बुलाया। संभावित उत्तर हैं: रिपोर्ट भेजी गई, दरवाजे खोले गए, बच्चों को बुलाया गया। उसके बाद पूछें कि किस प्रसंग में नया वाक्य उपयोगी होगा। यदि व्यक्ति का नाम ही मुख्य जानकारी है, तो मूल कर्तृवाच्य बेहतर रह सकता है।
संबंधित विषय
- पहले दोहराएँ: सामान्य भूतकाल — खाया, लिखा, किया और दिया जैसे रूप कर्मवाच्य बनाने की बुनियाद हैं।
- इसके बाद पढ़ें: भाववाच्य — मुझसे चला नहीं जाता जैसे प्रयोगों को सामान्य कर्मवाच्य से अलग पहचानने में मदद मिलेगी।