उर्दू में परोक्ष कथन: किसी की बात कैसे बताएँ
بالواسطہ بیان
यह लेख Settemila Lingue पर उर्दू व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
उर्दू में किसी की बात अपने शब्दों में बताने का सामान्य ढाँचा है: कहने या बताने वाली क्रिया + کہ + कही गई बात। जैसे ماں نے بتایا کہ کھانا تیار ہے۔ — “माँ ने बताया कि खाना तैयार है।” मूल बोलने वाला, सुनने वाला और समय बदल जाए तो उनके अनुसार शब्द बदलते हैं, लेकिन کہا के बाद हर वाक्य को अपने-आप भूतकाल में करना ज़रूरी नहीं है।
एक नज़र में
किसी का संदेश पहुँचाना, बैठक में हुई चर्चा बताना या डॉक्टर की सलाह घर पर दोहराना—इन सभी में हमें किसी और की कही बात बतानी पड़ती है। प्रत्यक्ष कथन में उसके शब्द सीधे रखे जाते हैं; परोक्ष कथन में वही बात अपने वाक्य का हिस्सा बनाकर बताई जाती है। उर्दू में परोक्ष कथन को بالواسطہ بیان कहते हैं।
हिन्दीभाषी के लिए इसका बुनियादी ढाँचा परिचित है: “उसने कहा कि…” के सामने उर्दू में اس نے کہا کہ… आता है। हिन्दी का “कि” और उर्दू का کہ लगभग वही जोड़ने वाला काम करते हैं। इसलिए यहाँ किसी बिल्कुल नई सोच से शुरुआत नहीं करनी है। असली अभ्यास यह पहचानने में है कि “मैं”, “तुम”, “हम”, “आज” और “कल” अब किसकी ओर इशारा कर रहे हैं।
इस विषय का मुख्य अभ्यास बी२ स्तर पर आता है। इस स्तर पर केवल साधारण खबर बताना नहीं, बल्कि सवाल, अनुरोध और पिछले वादे को भी साफ़ ढंग से दोहराना सीखना उपयोगी है। पहले सामान्य कथन का ढाँचा समझें; बाद के हिस्सों में समय, आदर और एक से अधिक वक्ताओं से जुड़ी बारीकियाँ मिलेंगी।
वाक्य कैसे बनता है
१. सीधे शब्द रखना और बात बताना
नीचे दोनों वाक्यों में अली अपने आने की बात कर रहा है। पहले में उसके शब्द ज्यों के त्यों हैं; दूसरे में कोई उसकी बात बता रहा है।
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | क्या बदला? |
|---|---|---|
| علی نے کہا: «میں آؤں گا۔» | अली ने कहा, “मैं आऊँगा।” | सीधे उद्धरण में अली का अपना “मैं” है। |
| علی نے کہا کہ وہ آئے گا۔ | अली ने कहा कि वह आएगा। | अली की बात बताने वाले ने उसके लिए “वह” रखा। |
کہ का अर्थ यहाँ “कि” है। इसके बाद आने वाला उपवाक्य यानी बड़े वाक्य के भीतर की छोटी बात बताता है कि क्या कहा गया। उर्दू में भी इसकी सामान्य शब्द-व्यवस्था हिन्दी जैसी है: “वह कल आएगा”, न कि “वह आएगा कल” को कोई अनिवार्य नया ढाँचा समझना चाहिए।
کہ के बाद सीधे उद्धरण में भी वक्ता का अपना “मैं” बना रह सकता है। इसलिए केवल کہ देखकर यह तय न करें कि सर्वनाम बदलना ही होगा। यहाँ सीखने का शुरुआती तरीका यह है: किसी और की बात स्पष्ट रूप से अपने शब्दों में बतानी हो तो व्यक्ति और संदर्भ जाँचें; शब्दशः उद्धरण देना हो तो उसे अलग पहचान दें।
२. कहने, पूछने और बताने की क्रियाएँ
क्रिया वह शब्द है जिससे काम या स्थिति का पता चलता है। किसी की बात बताने में ये तीन क्रियाएँ विशेष उपयोगी हैं:
| उर्दू रूप | हिन्दी अर्थ | सामान्य प्रयोग |
|---|---|---|
| کہنا | कहना | कथन, राय या वादा दोहराना |
| پوچھنا | पूछना | पहले पूछे गए सवाल को बताना |
| بتانا | बताना | जानकारी या खबर पहुँचाना |
| بولا | बोला | बोलने की घटना; सीधे संवाद में भी सामान्य |
इनसे اس نے کہا — “उसने कहा”, اس نے پوچھا — “उसने पूछा”, और اس نے بتایا — “उसने बताया” बनते हैं। हिन्दी का “उसने मुझसे कहा” उर्दू में اس نے مجھ سے کہا और “उसने मुझे बताया” اس نے مجھے بتایا होगा। सुनने वाले को जोड़ते समय भी हिन्दी के परिचित अंतर से मदद लें।
एक बात की सूचना देने के लिए بتانا और किसी सवाल को दोहराने के लिए پوچھنا चुनें। کہنا बहुत व्यापक है, लेकिन “उसने कहा कि हम तैयार हैं” और “उसने पूछा कि क्या हम तैयार हैं” एक ही घटना नहीं बताते।
३. सर्वनाम व्यक्ति के अनुसार बदलें
सर्वनाम यानी नाम की जगह आने वाले शब्द—जैसे मैं, हम, तुम और वह—को बदलना अक्सर सबसे ज़रूरी कदम है। कोई पक्की सूची नहीं है कि “मैं” हमेशा “वह” होगा। पहले तय करें कि अब बात कौन बता रहा है।
अली ने मुझसे कहा:
- «میں تمہاری مدد کروں گا۔» — “मैं तुम्हारी मदद करूँगा।”
अब मैं किसी तीसरे व्यक्ति को बताता हूँ:
- علی نے مجھ سے کہا کہ وہ میری مدد کرے گا۔ — “अली ने मुझसे कहा कि वह मेरी मदद करेगा।”
यहाँ अली का میں अब وہ हुआ और मुझसे कहा गया تمہاری अब میری हुआ। लेकिन यदि अली खुद अपनी बात दोहराए, तो वह कह सकता है:
- میں نے کہا کہ میں تمہاری مدد کروں گا۔ — “मैंने कहा कि मैं तुम्हारी मदद करूँगा।”
इसी तरह ہم — “हम” तभी रहेगा जब बात बताने वाला भी उस समूह में हो। यदि समूह में दूसरे लोग हों, तो وہ — “वे” अधिक ठीक हो सकता है। पहले वास्तविक लोगों की पहचान करें, उसके बाद शब्द चुनें।
४. काल को अर्थ देखकर रखें
काल से पता चलता है कि स्थिति या काम किस समय का है। उर्दू में कहने की क्रिया भूतकाल में होने का अर्थ यह नहीं कि आगे का हर रूप भी भूतकाल में ही हो। हिन्दी में भी “उसने कहा कि दुकान बंद है” और “उसने कहा कि दुकान बंद थी” अलग बातें हैं। उर्दू में भी यही अंतर उपयोगी है:
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | समय का संकेत |
|---|---|---|
| اس نے کہا کہ دکان بند ہے۔ | उसने कहा कि दुकान बंद है। | बंद होने की स्थिति वर्तमान रूप में बताई गई है। |
| اس نے کہا کہ دکان بند تھی۔ | उसने कहा कि दुकान बंद थी। | बंद होने की स्थिति पिछले समय में रखी गई है। |
| اس نے کہا کہ وہ کل آئے گا۔ | उसने कहा कि वह कल आएगा। | आने की बात कही गई थी; भविष्य का रूप बना है। |
ہے को تھا / تھی करना केवल बाहरी क्रिया की नकल नहीं, बल्कि समय-दृष्टि का चुनाव है। पुरानी स्थिति का वर्णन हो तो भूतकाल उपयोगी होगा; किसी बात को अभी लागू सूचना की तरह बताया जाए तो वर्तमान रूप स्वाभाविक हो सकता है। साथ ही, किसी कथन में वर्तमान रूप होने से यह साबित नहीं होता कि बात बताने वाला उसकी सच्चाई की गारंटी दे रहा है।
५. सवाल को कैसे दोहराएँ
हाँ या नहीं वाले सवाल में کیا — “क्या” रखा जा सकता है:
- استاد نے پوچھا کہ کیا ہم تیار ہیں۔ — “अध्यापक ने पूछा कि क्या हम तैयार हैं।”
यहाँ کہ बात जोड़ता है और کیا बताता है कि उसके भीतर हाँ या नहीं वाला सवाल है। साफ़ लिखित रूप में यह बहुत उपयोगी ढाँचा है। बातचीत में اس نے پوچھا، کیا تم تیار ہو؟ — “उसने पूछा, क्या तुम तैयार हो?” जैसी सीधी शैली भी सुनाई देती है।
जहाँ सवाल में पहले से प्रश्नवाचक शब्द हो, वही रखें। प्रश्नवाचक शब्द यानी कौन, कहाँ, कब, क्यों जैसे सवाल पूछने वाले शब्द:
- اس نے پوچھا کہ تم کہاں رہتے ہو۔ — “उसने पूछा कि तुम कहाँ रहते हो।”
- میں نے پوچھا کہ گاڑی کب آئے گی۔ — “मैंने पूछा कि गाड़ी कब आएगी।”
“कहाँ” वाले सवाल में केवल इसलिए अतिरिक्त کیا न डालें कि वह सवाल है। सामान्य परोक्ष सवाल में पूरी पंक्ति किसी सवाल के पूछे जाने की खबर देती है, इसलिए अंत में पूर्णविराम हो सकता है। सीधे सवाल में प्रश्नचिह्न रखें।
६. आदेश और अनुरोध में इच्छित काम बताएँ
किसी की बात हमेशा सूचना नहीं होती। “दरवाज़ा बंद करो” जैसी बात दोहराते समय बताएँ कि किससे क्या करने को कहा गया।
- استاد نے ہم سے کہا کہ خاموش رہیں۔ — “अध्यापक ने हमसे कहा कि चुप रहें।”
- امی نے مجھ سے کہا کہ دیر نہ کروں۔ — “अम्मी ने मुझसे कहा कि देर न करूँ।”
رہیں और کروں यहाँ हो चुके काम की सूचना नहीं देते; वे अपेक्षित काम बताते हैं। इसे संभावनार्थक रूप कहते हैं—ऐसा रूप जो इच्छा, संभावना या अपेक्षा को व्यक्त कर सकता है। अपनी बात में सही व्यक्ति रखें: “मुझसे कहा कि मैं न करूँ” और “हमसे कहा कि हम न करें” के रूप एक जैसे नहीं होंगे।
प्रसंग सहित उदाहरण
इन उदाहरणों में घर, यात्रा, काम और पढ़ाई की स्थितियाँ हैं। जहाँ समय अस्पष्ट हो सकता है, टिप्पणी पढ़ें।
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| اس نے کہا کہ وہ کل آئے گا۔ | उसने कहा कि वह कल आएगा। | अकेले वाक्य में “वह” किसके लिए है, यह प्रसंग से पता चलता है। |
| استاد نے پوچھا کہ کیا ہم تیار ہیں۔ | अध्यापक ने पूछा कि क्या हम तैयार हैं। | हाँ या नहीं वाला सवाल। |
| ماں نے بتایا کہ کھانا تیار ہے۔ | माँ ने बताया कि खाना तैयार है। | सूचना वर्तमान रूप में रखी गई है। |
| وہ بولا: «میں نہیں جاؤں گا۔» | वह बोला, “मैं नहीं जाऊँगा।” | सीधा उद्धरण; मूल वक्ता का “मैं” बना है। |
| سارہ نے کہا کہ وہ آج دفتر نہیں آئے گی۔ | सारा ने कहा कि वह आज दफ़्तर नहीं आएगी। | स्त्री के लिए भविष्य का रूप बदला है। |
| ڈاکٹر نے بتایا کہ رپورٹ ٹھیک ہے۔ | डॉक्टर ने बताया कि रिपोर्ट ठीक है। | मिलने वाली जानकारी बताई गई है। |
| علی نے مجھ سے پوچھا کہ میں کہاں جا رہا ہوں۔ | अली ने मुझसे पूछा कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। | मूल सवाल मुझसे था; अब मैं उसे बता रहा हूँ। |
| انہوں نے بتایا کہ گاڑی دس منٹ دیر سے آئے گی۔ | उन्होंने बताया कि गाड़ी दस मिनट देर से आएगी। | भविष्य की सूचना भी परोक्ष कथन हो सकती है। |
| مریم نے کہا کہ اس کی بہن لاہور میں رہتی ہے۔ | मरियम ने कहा कि उसकी बहन लाहौर में रहती है। | “उसकी” का संबंध प्रसंग से समझें। |
| میں نے اسے بتایا کہ مجھے راستہ معلوم نہیں ہے۔ | मैंने उसे बताया कि मुझे रास्ता मालूम नहीं है। | अपने ही पुराने कथन में “मुझे” रह सकता है। |
| دکاندار نے کہا کہ یہ دوا اس وقت موجود نہیں تھی۔ | दुकानदार ने कहा कि यह दवा उस समय उपलब्ध नहीं थी। | पुरानी स्थिति स्पष्ट की गई है। |
| اس نے پوچھا کہ ملاقات کب شروع ہوگی۔ | उसने पूछा कि मुलाक़ात कब शुरू होगी। | “कब” सुरक्षित है; अतिरिक्त “क्या” नहीं चाहिए। |
| والد نے بچوں سے کہا کہ شور نہ کریں۔ | पिता ने बच्चों से कहा कि शोर न करें। | मनाही को अपेक्षित काम के रूप में बताया गया है। |
आम गलतियाँ
१. व्यक्ति बदल गया, लेकिन “मैं” नहीं बदला
अली ने कहा था कि वह स्वयं थका है। कोई दूसरा व्यक्ति यह बात स्पष्ट परोक्ष रूप में बता रहा है:
- इस अर्थ के लिए गलत: علی نے کہا کہ میں تھکا ہوا ہوں۔
- सही: علی نے کہا کہ وہ تھکا ہوا ہے۔ — “अली ने कहा कि वह थका हुआ है।”
पहले वाक्य में میں उद्धरण जैसी शैली में अली की आवाज़ भी हो सकता है, या कुछ प्रसंगों में बात बताने वाले की ओर जा सकता है। इसलिए उसे हर हालत में अशुद्ध न कहें। लेकिन स्पष्ट परोक्ष अभ्यास में अली के लिए وہ रखें। केवल सर्वनाम नहीं, उसके साथ ہوں → ہے भी बदलता है।
२. “क्या” को “कहाँ” वाले सवाल में घुसा देना
- गलत: اس نے پوچھا کہ کیا میں کہاں رہتا ہوں۔
- सही: اس نے پوچھا کہ میں کہاں رہتا ہوں۔ — “उसने पूछा कि मैं कहाँ रहता हूँ।”
यहाँ पहले से کہاں है। हाँ या नहीं वाले सवाल का کیا इस साधारण अर्थ में नहीं चाहिए।
३. हर बार “है” को “था” कर देना
माँ ने अभी बताया कि खाना तैयार है और हम खाने बैठने जा रहे हैं:
- इस प्रसंग में अनावश्यक बदलाव: ماں نے بتایا کہ کھانا تیار تھا۔
- उपयुक्त: ماں نے بتایا کہ کھانا تیار ہے۔ — “माँ ने बताया कि खाना तैयार है।”
पहला वाक्य अपने-आप अशुद्ध नहीं है; वह पिछली स्थिति बताता है। गलती यह मानना है कि بتایا आते ही ہے निषिद्ध हो जाता है।
४. मनाही को केवल नकारात्मक सूचना बना देना
- गलत: امی نے مجھ سے کہا کہ دیر مت کروں۔
- सही: امی نے مجھ سے کہا کہ دیر نہ کروں۔ — “अम्मी ने मुझसे कहा कि देर न करूँ।”
सीधे आदेश में مت स्वाभाविक है: «دیر مت کرو۔» — “देर मत करो।” लेकिन यहाँ अपने लिए کروں वाला रूप रखते हुए सामान्य परोक्ष मनाही में نہ चुनें। सीधे आदेश और परोक्ष अपेक्षा के रूप न मिलाएँ।
५. आदर के साथ क्रिया का रूप भूल जाना
- गलत: انہوں نے کہا کہ وہ جلد آئے گا۔ — यदि दोनों जगह एक ही आदरणीय व्यक्ति का उल्लेख है।
- सही: انہوں نے کہا کہ وہ جلد آئیں گے۔ — “उन्होंने कहा कि वे जल्दी आएँगे।”
पहला वाक्य तब सही हो सकता है जब “उन्होंने” किसी दूसरे पुरुष के बारे में कहा हो। लेकिन एक ही आदरणीय व्यक्ति के लिए “उन्होंने” और फिर अनादरसूचक एकवचन रूप रखना अपेक्षित आदर नहीं बनाए रखता।
प्रयोग से जुड़ी बातें
हिन्दी की समानता का लाभ लें
हिन्दी का “उसने बताया कि…” सोचकर उर्दू का اس نے بتایا کہ… बनाना उचित शुरुआत है। दोनों में सवाल की सामान्य शब्द-व्यवस्था भी मिलती है: “उसने पूछा कि वह कहाँ रहता है।” इसलिए परोक्ष सवाल बनाते समय शब्दों को किसी विदेशी ढाँचे की तरह उलटने की ज़रूरत नहीं।
लिपि में एक उपयोगी अंतर याद रखें: उर्दू में यहाँ کہ लिखते हैं। کے दूसरा रूप है, जो “के” जैसे संबंधों में आता है। उच्चारण से शब्द पहचानते समय भी दोनों की लिखावट न मिलाएँ।
सीधे उद्धरण उर्दू में स्वाभाविक हैं
कहानी, बातचीत और किसी संदेश को नाटकीय ढंग से सुनाने में प्रत्यक्ष कथन बहुत सामान्य है। وہ بولا: «میں نہیں جاؤں گا۔» में बोलने वाले की आवाज़ सीधे सुनाई देती है। परोक्ष रूप اس نے کہا کہ وہ نہیں جائے گا۔ — “उसने कहा कि वह नहीं जाएगा” वही मुख्य बात अधिक तटस्थ ढंग से पहुँचाता है।
सीधा उद्धरण चुनना कोई कमी नहीं है। जब ठीक शब्द महत्त्वपूर्ण हों, उन्हें उद्धरण में रखें। जब सार बताना हो, परोक्ष कथन अधिक सुविधाजनक होता है। लिखित पाठ में उद्धरण-चिह्न और स्पष्ट नाम पाठक को पहचानने में मदद करते हैं कि किसकी आवाज़ चल रही है।
“कहा” में अपना विश्वास न जोड़ें
اس نے کہا کہ… — “उसने कहा कि…” केवल कथन का स्रोत बताता है। यह न तो उस बात को निश्चित सच ठहराता है, न झूठ। इसी कारण खबर, कामकाजी संदेश और व्यक्तिगत बातचीत में किसने कहा, यह साफ़ रखना उपयोगी है। अपना अंदाज़ा जोड़ना हो तो उसे व्यक्ति के मूल कथन से अलग रखें।
आगे की बारीकियाँ
“आज”, “कल”, “यहाँ” और “वहाँ”
ये शब्द बोलने के समय और स्थान पर निर्भर करते हैं। इन्हें संदर्भसूचक शब्द कहा जाता है—ऐसे शब्द जिनका ठीक अर्थ स्थिति से मिलता है। उर्दू का کل, हिन्दी के “कल” की तरह, बीते या आने वाले दिन के लिए हो सकता है; क्रिया और प्रसंग अर्थ स्पष्ट करते हैं।
मान लें, सोमवार को सारा ने कहा:
- «میں کل آؤں گی۔» — “मैं कल आऊँगी।”
उसी सोमवार को यह बताना सहज है:
- سارہ نے کہا کہ وہ کل آئے گی۔ — “सारा ने कहा कि वह कल आएगी।”
लेकिन कई दिन बाद वही کل ज्यों का त्यों रखने पर पाठक उलझ सकता है। तारीख़ या दिन से बात स्पष्ट करें:
- سارہ نے پیر کو کہا تھا کہ وہ منگل کو آئے گی۔ — “सारा ने सोमवार को कहा था कि वह मंगलवार को आएगी।”
यहाँ भविष्य का रूप पुराने वादे के भीतर बना है। इससे यह अपने-आप पता नहीं चलता कि वह सचमुच आई थी या नहीं। वह जानकारी अलग से देनी होगी।
इसी तरह یہاں — “यहाँ” को हर बार وہاں — “वहाँ” नहीं करना है। यदि बात बताने वाला अब भी उसी जगह पर है, तो “यहाँ” ठीक हो सकता है। कसौटी कोई रटी हुई परिवर्तन-सूची नहीं, वास्तविक समय और स्थान हैं।
“अपना” किसका है?
اپنا / اپنی / اپنے हिन्दी के “अपना / अपनी / अपने” की तरह काम करते हैं। इन्हें निजवाचक रूप कहते हैं—ऐसे शब्द जो वाक्य में किसी व्यक्ति की ओर वापस इशारा करके उसके अपने संबंध या अधिकार को बताते हैं।
- علی نے کہا کہ وہ اپنی کتاب لائے گا۔ — “अली ने कहा कि वह अपनी किताब लाएगा।”
- علی نے کہا کہ وہ اس کی کتاب لائے گا۔ — “अली ने कहा कि वह उसकी किताब लाएगा।”
पहले उदाहरण में सहज अर्थ है कि आने वाला अपनी किताब लाएगा। दूसरे में किसी और की किताब का अर्थ हो सकता है। परोक्ष कथन में कई लोग हों तो नाम दोहराना बेहतर है। हिन्दी की तरह उर्दू में भी एक से अधिक उपवाक्य होने पर “अपना” का संबंध कभी संदर्भ पर निर्भर हो सकता है; इसे केवल सबसे पास वाले शब्द से जोड़कर न पढ़ें।
दो स्तर की कही हुई बात
- علی نے بتایا کہ مریم نے کہا ہے کہ وہ نہیں آ سکے گی۔ — “अली ने बताया कि मरियम ने कहा है कि वह नहीं आ सकेगी।”
यहाँ अली मरियम की बात पहुँचा रहा है। दो बार کہ आना अपने-आप गलत नहीं है, लेकिन लंबी शृंखला से यह भूलना आसान है कि किसने क्या कहा। अस्पष्टता हो तो दो वाक्य करें:
- علی نے مریم کا پیغام دیا۔ مریم نہیں آ سکے گی۔ — “अली ने मरियम का संदेश दिया। मरियम नहीं आ सकेगी।”
दूसरे रूप में संदेश देने और संदेश की बात को अलग किया गया है। कामकाजी सूचना में ऐसा स्पष्ट लेखन अक्सर लंबे वाक्य से बेहतर है।
भूतकाल के भीतर पहले का कथन
کہا تھا का अर्थ “कहा था” है। इससे किसी बाद की पिछली घटना से पहले का कथन या याद दिलाया जा रहा पुराना कथन सामने आ सकता है:
- میں نے کہا تھا کہ مجھے وقت چاہیے۔ — “मैंने कहा था कि मुझे समय चाहिए।”
यहाँ کہا تھا से पुरानी कही हुई बात सामने आती है, लेकिन چاہیے को सिर्फ़ उसके कारण बदलना नहीं पड़ता। बात कहने का समय और कही गई बात का समय अलग-अलग देखें। यही सावधानी लंबी कहानियों और पुरानी चर्चाओं में सबसे अधिक काम आती है।
अभ्यास के तरीके
१. तीन लोगों का छोटा दृश्य बनाएँ। एक व्यक्ति “मैं तुम्हें फ़ोन करूँगा” कहे। दूसरा किसी तीसरे को यह बताए। पहले हर सर्वनाम के नीचे असली व्यक्ति का नाम लिखें, फिर उर्दू वाक्य बनाएँ। दूसरे दौर में वक्ता और संदेश पहुँचाने वाले की भूमिकाएँ बदलें।
२. एक कथन को दो अलग दिनों में बताएँ। “मैं कल आऊँगी” को उसी दिन और तीन दिन बाद दोहराएँ। दूसरे रूप में दिन या तारीख़ जोड़ें। जाँचें कि वाक्य पढ़कर आने का दिन समझ आता है या केवल “कल” देखकर अनुमान लगाना पड़ता है।
३. सूचना, सवाल और अनुरोध की तिकड़ी बनाएँ। उदाहरण के लिए “खाना तैयार है”, “क्या खाना तैयार है?” और “खाना तैयार कर दो” लें। इन्हें क्रमशः बताने, पूछने और कहने के ढाँचे में रखें। पहले हिन्दी में अर्थ जाँचें, फिर उर्दू में लिखें। केवल کہ जोड़ने के बजाय यह देखें कि कही गई बात किस प्रकार की है।
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