उर्दू में कर्मवाच्य के विशेष रूप और अर्थछटाएँ
مجہول کی مختلف اقسام
यह लेख Settemila Lingue पर उर्दू व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
उर्दू में مجھ سے چلا نہیں جاتا۔ का अर्थ है ‘मुझसे चला नहीं जाता’, न कि ‘कोई मुझे चलाता नहीं है’। سے के साथ व्यक्ति और क्रिया का جاتا वाला रूप अक्सर शारीरिक असमर्थता, भावनात्मक कठिनाई या किसी परिस्थिति में काम न हो पाने का भाव देता है। مجھ سے یہ کام نہیں ہوتا۔ भी इसी अर्थ-क्षेत्र में आता है, हालाँकि उसकी बनावट में جاتا नहीं है। व्यक्ति का उल्लेख न हो, तो یہاں بیٹھا نہیں جاتا۔ का अर्थ ‘यहाँ बैठा नहीं जाता’ या ‘यहाँ बैठना मुश्किल है’ हो सकता है।
परिचय
हिन्दी बोलने वाले के लिए यह विषय सुनने में परिचित है। ‘मैं नहीं चल सकता’ और ‘मुझसे चला नहीं जाता’ दोनों असमर्थता बताते हैं, पर दूसरे वाक्य में शरीर, मन या परिस्थिति की रुकावट अधिक उभरती है। उर्दू में भी यही अंतर काम आता है। इसलिए केवल शब्द पहचानना पर्याप्त नहीं; यह समझना ज़रूरी है कि बोलने वाला अपनी क्षमता बता रहा है, अपनी परेशानी जता रहा है या किसी जगह की हालत पर टिप्पणी कर रहा है।
कर्मवाच्य, जिसे उर्दू में مجہول कहते हैं, वह बनावट है जिसमें काम करने वाले से अधिक काम या उसके असर को प्रमुखता मिलती है। सामान्य उदाहरण है خط لکھا جاتا ہے۔ — ‘पत्र लिखा जाता है।’ लेकिन इस लेख में ऐसे रूप भी आएँगे जिनमें किसी चीज़ पर काम होने के बजाय किसी व्यक्ति से काम हो पाना मुख्य बात है। چلنا ‘चलना’ और بیٹھنا ‘बैठना’ जैसी क्रियाएँ भी इस विशेष प्रयोग में आ सकती हैं।
यह विषय उन्नत अध्ययन में आता है, क्योंकि सही अर्थ केवल क्रिया का रूप देखकर नहीं निकलता। نہیں, سے, आसपास के शब्द और बातचीत की परिस्थिति मिलकर अर्थ बनाते हैं। पहले परिचित हिन्दी वाक्यों से ढाँचा समझें; फिर उर्दू में रूप-मिलान, काल और भाव के अंतर पर ध्यान दें।
बनावट और अर्थ कैसे काम करते हैं
१. सामान्य कर्मवाच्य से अंतर
इन दोनों वाक्यों में پڑھا جاتا है, लेकिन उनका उद्देश्य अलग है:
- یہ خط روز پڑھا جاتا ہے۔ — यह पत्र रोज़ पढ़ा जाता है।
- مجھ سے یہ خط پڑھا نہیں جاتا۔ — मुझसे यह पत्र पढ़ा नहीं जाता।
पहला वाक्य रोज़ होने वाले काम की सूचना देता है। दूसरे में पढ़ने की कोशिश करने वाला व्यक्ति مجھ سے है और बात उसके लिए पढ़ना कठिन होने की है। कारण आँखों की तकलीफ़, लिखावट या पत्र की दुखद सामग्री हो सकता है; अकेला वाक्य कारण तय नहीं करता।
इसलिए हर جاتا को केवल ‘किया जाता है’ वाली सूचना न समझें। जाँचें कि वाक्य नियमित क्रिया बता रहा है या काम न हो पाने का अनुभव।
२. व्यक्ति के साथ से वाला रूप
असमर्थता अनुभव करने वाला व्यक्ति प्रायः سے के साथ आता है। हिन्दी के ‘मुझसे, तुमसे, उससे’ यहाँ बहुत उपयोगी संकेत हैं। सर्वनाम यानी नाम की जगह आने वाले शब्द का रूप سے से पहले बदल सकता है।
| उर्दू रूप | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| مجھ سے | मुझसे |
| ہم سے | हमसे |
| تم سے | तुमसे |
| آپ سے | आपसे |
| اس سے | उससे |
| ان سے | उनसे |
| علی سے | अली से |
यहाँ سے का अर्थ केवल ‘द्वारा’ नहीं है। علی سے چلا نہیں جاتا۔ में अली किसी दूसरे को नहीं चला रहा; अली स्वयं चल नहीं पा रहा। اس سے से स्त्री या पुरुष, दोनों का उल्लेख हो सकता है; लिंग संदर्भ से समझना पड़ता है।
३. क्रिया के कौन-से रूप लगते हैं?
प्रचलित ढाँचा है: से वाला व्यक्ति + क्रिया का पूर्ण रूप + नहीं + जाना का उपयुक्त रूप। ‘पूर्ण रूप’ से यहाँ کیا، پڑھا، چلا، بیٹھی जैसे रूप अभिप्रेत हैं, जो दूसरे वाक्यों में ‘किया, पढ़ा, चला, बैठी’ भी बताते हैं। इस बनावट में केवल इन्हें देखकर बीते समय का अर्थ न निकालें। समय पूरे क्रिया-समूह से पता चलता है।
| मूल क्रिया | यहाँ काम आने वाला रूप | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| چلنا | چلا نہیں جاتا | चला नहीं जाता |
| بیٹھنا | بیٹھا نہیں جاتا | बैठा नहीं जाता |
| پڑھنا | پڑھا نہیں جاتا | पढ़ा नहीं जाता |
| کرنا | کیا نہیں جاتا | किया नहीं जाता |
| دیکھنا | دیکھا نہیں جاتا | देखा नहीं जाता |
مجھ سے یہ خط پڑھا نہیں جاتا۔ — ‘मुझसे यह पत्र पढ़ा नहीं जाता’ में پڑھا और جاتا दोनों वाक्य की बनावट के अनुसार रूप लेते हैं। نہیں पहले भी आ सकता है: مجھ سے یہ خط نہیں پڑھا جاتا۔ इसका सामान्य आशय भी ‘मुझसे यह पत्र पढ़ा नहीं जाता’ है। शब्द-क्रम और बोलने का ज़ोर किसी हिस्से को अधिक उभार सकते हैं; केवल क्रम बदलने से हर बार एक अलग निश्चित अर्थ नहीं बनता।
इन नकारात्मक वाक्यों में वर्तमान का ہے प्रायः नहीं आता। مجھ سے چلا نہیں جاتا۔ अपने आप में पूरा और स्वाभाविक वाक्य है। दूसरे कालों में ज़रूरी सहायक रूप बने रहते हैं, जैसे تھا ‘था’।
४. लिंग और वचन किसके अनुसार बदलते हैं?
लिंग-वचन का मेल यानी शब्दों का पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, एकवचन या बहुवचन के अनुसार बदलना। سے के साथ आया व्यक्ति अकेले यह मेल तय नहीं करता। नीचे व्यक्ति वही है, लेकिन पढ़ी जाने वाली चीज़ बदलने पर क्रिया बदल रही है:
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | रूप का आधार |
|---|---|---|
| مجھ سے یہ خط پڑھا نہیں جاتا۔ | मुझसे यह पत्र पढ़ा नहीं जाता। | पत्र पुल्लिंग एकवचन है। |
| مجھ سے یہ کتاب پڑھی نہیں جاتی۔ | मुझसे यह किताब पढ़ी नहीं जाती। | किताब स्त्रीलिंग एकवचन है। |
| مجھ سے یہ خطوط پڑھے نہیں جاتے۔ | मुझसे ये पत्र पढ़े नहीं जाते। | पत्र पुल्लिंग बहुवचन हैं। |
| مجھ سے یہ کتابیں پڑھی نہیں جاتیں۔ | मुझसे ये किताबें पढ़ी नहीं जातीं। | किताबें स्त्रीलिंग बहुवचन हैं। |
जिस क्रिया के लिए कोई सीधा कर्म नहीं है — यानी जिस काम का असर किसी अलग वस्तु पर नहीं पड़ रहा — उसके निर्वैयक्तिक प्रयोग में सामान्यतः पुल्लिंग एकवचन मिलता है: مجھ سے چلا نہیں جاتا۔ — ‘मुझसे चला नहीं जाता।’ बोलने वाली स्त्री भी अपनी असमर्थता के लिए यही रूप कह सकती है। इसे ‘मैं चली’ वाली बनावट समझकर न बदलें।
५. होता वाले वाक्य भी क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
مجھ سے یہ کام نہیں ہوتا۔ — ‘मुझसे यह काम नहीं होता’ में ہونا ‘होना’ है। इसे کیا جاتا वाले नियमित कर्मवाच्य की हूबहू बनावट न मानें। यह संबंधित अभिव्यक्ति बताती है कि काम व्यक्ति से हो नहीं पा रहा।
इसी प्रकार اس سے سردی برداشت نہیں ہوتی۔ — ‘उससे ठंड बर्दाश्त नहीं होती’ में برداشت ہونا सहन हो पाने का भाव देता है। यहाँ ہوتی का स्त्रीलिंग रूप سردی ‘ठंड’ के अनुसार है, न कि उस व्यक्ति के लिंग के अनुसार।
दोनों बनावटों का उपयोग सीखना ज़रूरी है, लेकिन جاتا और ہوتا को हर जगह परस्पर बदलने योग्य न समझें। उदाहरण के लिए ‘चलना’ के इस भाव में چلا نہیں جاتا स्वाभाविक ढाँचा है; उसकी जगह मनमाने ढंग से چلا نہیں ہوتا न बनाएँ।
प्रसंग सहित उदाहरण
इन वाक्यों में असमर्थता कभी शारीरिक है, कभी भावनात्मक और कभी आसपास की परिस्थिति से पैदा होती है। हिन्दी अर्थ में जानबूझकर अलग-अलग स्वाभाविक अभिव्यक्तियाँ दी गई हैं।
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | प्रसंग या अर्थछटा |
|---|---|---|
| مجھ سے یہ کام نہیں ہوتا۔ | मुझसे यह काम नहीं होता। | काम करने में कठिनाई या असमर्थता। |
| اس سے سردی برداشت نہیں ہوتی۔ | उससे ठंड बर्दाश्त नहीं होती। | शारीरिक असुविधा सह न पाना। |
| اتنی دور نہیں چلا جاتا۔ | इतनी दूर चला नहीं जाता। | सामान्य दूरी-संबंधी कठिनाई; व्यक्ति अनकहा है। |
| یہ دیکھا نہیں جاتا۔ | यह देखा नहीं जाता; इसे देखना असहनीय है। | दुखद या परेशान करने वाला दृश्य। |
| آج مجھ سے زیادہ دیر کھڑا نہیں ہوا جاتا۔ | आज मुझसे ज़्यादा देर खड़ा नहीं हुआ जाता। | थकान या तकलीफ़ के कारण। |
| یہاں شور میں پڑھا نہیں جاتا۔ | यहाँ शोर में पढ़ा नहीं जाता। | वातावरण पढ़ने नहीं देता। |
| اس گرمی میں یہاں بیٹھا نہیں جاتا۔ | इस गर्मी में यहाँ बैठना मुश्किल है। | किसी जगह की असहनीय हालत। |
| مجھ سے یہ بھاری صندوق اٹھایا نہیں جاتا۔ | मुझसे यह भारी संदूक उठाया नहीं जाता। | शारीरिक क्षमता की सीमा। |
| ہم سے کسی کا دل توڑا نہیں جاتا۔ | हमसे किसी का दिल तोड़ा नहीं जाता। | मन या संवेदना इसकी इजाज़त नहीं देती। |
| مجھ سے اب یہ کتاب پڑھی نہیں جاتی۔ | अब मुझसे यह किताब पढ़ी नहीं जाती। | पढ़ना कठिन या भावनात्मक रूप से भारी है। |
| بچپن میں مجھ سے تیز دوڑا نہیں جاتا تھا۔ | बचपन में मुझसे तेज़ दौड़ा नहीं जाता था। | बीते समय की सामान्य असमर्थता। |
| کیا آپ سے یہ کام اکیلے ہو جائے گا؟ | क्या आपसे यह काम अकेले हो जाएगा? | क्षमता और काम पूरा हो पाने का प्रश्न। |
یہ دیکھا نہیں جاتا۔ का भाव समझने के लिए प्रसंग महत्त्वपूर्ण है। किसी दुर्घटना का दृश्य देखकर यह कहें, तो अर्थ ‘यह मुझसे देखा नहीं जा रहा’ हो सकता है। दूसरी ओर, किसी कम देखे जाने वाले कार्यक्रम की चर्चा में मिलती-जुलती बनावट वास्तविक देखने की आदत भी बता सकती है। असहनीयता का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, स्थिति से निकलता है।
आम गलतियाँ
१. से से पहले सर्वनाम का गलत रूप लगाना
- गलत: میں سے یہ کام نہیں ہوتا۔
- सही: مجھ سے یہ کام نہیں ہوتا۔
- अर्थ: मुझसे यह काम नहीं होता।
इस अर्थ में میں ‘मैं’ के बजाय مجھ चाहिए। हिन्दी में भी ‘मैंसे’ नहीं, ‘मुझसे’ कहते हैं। इसी परिचित बदलाव को उर्दू रूपों से जोड़ें।
२. किताब के साथ पुल्लिंग रूप रखना
- गलत: مجھ سے یہ کتاب پڑھا نہیں جاتا۔
- सही: مجھ سے یہ کتاب پڑھی نہیں جاتی۔
- अर्थ: मुझसे यह किताब पढ़ी नहीं जाती।
کتاب स्त्रीलिंग है, इसलिए پڑھی और جاتی दोनों बदलेंगे। केवल आख़िरी शब्द बदल देना पर्याप्त नहीं।
३. वक्ता स्त्री है, इसलिए चला को चली कर देना
- इस अर्थ के लिए गलत: مجھ سے اتنی دور چلی نہیں جاتی۔
- सही: مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا۔
- अर्थ: मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता।
यह बिना सीधे कर्म वाला असमर्थता-प्रयोग है। यहाँ रूप का मेल مجھ سے के साथ नहीं किया जाता। स्त्री वक्ता के लिए भी यही सामान्य बनावट रखें।
४. नहीं करता को असमर्थता का पूरा समानार्थी मान लेना
- ‘मैं कर नहीं पाता’ कहना हो तो अधूरा चुनाव: میں یہ کام نہیں کرتا۔ — मैं यह काम नहीं करता।
- स्पष्ट असमर्थता: مجھ سے یہ کام نہیں ہوتا۔ — मुझसे यह काम नहीं होता।
पहला वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही है, लेकिन आदत, निर्णय या इनकार भी बता सकता है। दूसरा वाक्य काम न हो पाने को सामने लाता है। सही वाक्य होना और सही भाव व्यक्त करना अलग बातें हैं।
५. होता और जाता को मनमाने ढंग से बदलना
- गलत: مجھ سے اتنی دور چلا نہیں ہوتا۔
- सही: مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا۔
- अर्थ: मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता।
کام نہیں ہوتا ‘काम नहीं होता’ और چلا نہیں جاتا ‘चला नहीं जाता’ को अलग प्रचलित ढाँचों के रूप में सीखें। अर्थ में निकटता होने से क्रिया के सारे रूप अदला-बदली योग्य नहीं हो जाते।
प्रयोग-संबंधी बातें
कठिनाई, इनकार और संवेदना
مجھ سے یہ نہیں ہوتا۔ — ‘मुझसे यह नहीं होता’ कभी वास्तविक असमर्थता है, तो कभी सीधा ‘मैं नहीं करूँगा’ कहने के बजाय अपनी सीमा बताने का तरीका। مجھ سے جھوٹ بولا نہیں جاتا۔ — ‘मुझसे झूठ बोला नहीं जाता’ में सामान्यतः बोलने की शारीरिक क्षमता की कमी नहीं है। व्यक्ति अपने स्वभाव, संकोच या नैतिक रुकावट की बात कर रहा है।
इसी तरह किसी बीमार व्यक्ति के बारे में ‘उससे चला नहीं जाता’ सहानुभूति जता सकता है। उसी ढाँचे में झुँझलाहट भरा स्वर किसी पर टिप्पणी जैसा लग सकता है। बनावट अपने आप विनम्रता या दयालुता की गारंटी नहीं देती; स्वर और संबंध भी मायने रखते हैं।
व्यक्ति को छोड़ देना
یہاں بیٹھا نہیں جاتا۔ — ‘यहाँ बैठा नहीं जाता’ एक निर्वैयक्तिक प्रयोग है: किसी खास व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया, बल्कि सामान्य अनुभव बताया गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि सचमुच दुनिया का कोई भी व्यक्ति वहाँ बैठ ही नहीं सकता। अक्सर वक्ता अपनी कठिनाई को सामान्य कथन की तरह रखता है।
व्यक्ति छोड़ने से शिकायत सीधे किसी पर नहीं जाती: اس شور میں سویا نہیں جاتا۔ — ‘इस शोर में सोया नहीं जाता।’ फिर भी शोर करने वाले को इससे अप्रत्यक्ष शिकायत समझ आ सकती है।
मनाही से अंतर
‘यहाँ बैठा नहीं जाता’ और ‘यहाँ बैठना मना है’ अलग बातें हैं। पहले में जगह असुविधाजनक हो सकती है; दूसरे में नियम है। स्पष्ट मनाही के लिए یہاں بیٹھنا منع ہے۔ — ‘यहाँ बैठना मना है’ अधिक साफ़ है।
हालाँकि یہاں ایسا نہیں کیا جاتا۔ — ‘यहाँ ऐसा नहीं किया जाता’ सामाजिक रिवाज या व्यवहार की सीमा भी बता सकता है। इसीलिए नकारात्मक कर्मवाच्य देखकर हर वाक्य को असमर्थता न समझें।
आगे की बारीकियाँ
सकता के साथ तुलना
سکنا किसी काम की क्षमता या संभावना बताने वाली क्रिया है। हिन्दी का ‘सकना’ इसके बहुत निकट है। लेकिन दोनों अभिव्यक्तियों में ज़ोर अलग पड़ सकता है:
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | मुख्य ज़ोर |
|---|---|---|
| میں اتنی دور نہیں چل سکتا۔ | मैं इतनी दूर नहीं चल सकता। | अपनी क्षमता या सीमा का सीधा कथन। |
| مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا۔ | मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता। | चलने में महसूस होने वाली कठिनाई। |
| میں یہ منظر نہیں دیکھ سکتا۔ | मैं यह दृश्य नहीं देख सकता। | कारण प्रसंग से मिलेगा; क्षमता या भावनात्मक सीमा हो सकती है। |
| مجھ سے یہ منظر دیکھا نہیں جاتا۔ | मुझसे यह दृश्य देखा नहीं जाता। | दृश्य सहन करने की भावनात्मक कठिनाई अधिक उभरती है। |
यह अंतर प्रवृत्ति है, कोई अटल विभाजन नहीं। نہیں دیکھ سکتا भी दुख या घृणा बता सकता है, और دیکھا نہیں جاتا भी शारीरिक कठिनाई से जुड़ सकता है। अर्थ तय करते समय आसपास की बात पढ़ें।
سکنا वाले वाक्य में वक्ता का लिंग क्रिया में दिख सकता है: میں اتنی دور نہیں چل سکتی۔ — ‘मैं इतनी दूर नहीं चल सकती।’ लेकिन مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا۔ — ‘मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता’ में वही व्यक्तिगत लिंग-मिलान नहीं होता। हिन्दी से मिलने वाली सहज समझ यहाँ विशेष उपयोगी है।
वर्तमान, भूत और भविष्य
पहले यह पहचानें कि बात नियमित सीमा की है, किसी पिछले अवसर की है या आगे की आशंका की। हर जगह वर्तमान वाला रूप लगा देने से समय का अंतर खो जाता है।
| उर्दू | हिन्दी अर्थ | समय या दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا۔ | मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता। | वर्तमान या सामान्य सीमा। |
| مجھ سے اتنی دور چلا نہیں جاتا تھا۔ | मुझसे इतनी दूर चला नहीं जाता था। | बीते समय की सामान्य सीमा। |
| کل مجھ سے یہ صندوق اٹھایا نہیں گیا۔ | कल मुझसे यह संदूक उठाया नहीं गया। | पिछले अवसर पर काम न हो सका; प्रसंग से आशय स्पष्ट होगा। |
| مجھ سے یہ منظر دیکھا نہیں جائے گا۔ | मुझसे यह दृश्य देखा नहीं जाएगा। | आगे उसे सहन न कर पाने की आशंका। |
अंतिम दो वाक्यों में साधारण कर्मवाच्य और असमर्थता वाले अर्थ एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं। विशेषकर نہیں گیا का अर्थ केवल ‘काम किया नहीं गया’ भी हो सकता है। यदि विफलता या असमर्थता बिल्कुल स्पष्ट करनी हो, तो مجھ سے یہ صندوق اٹھایا نہیں جا سکا۔ — ‘मुझसे यह संदूक उठाया नहीं जा सका’ कहा जा सकता है। यहाँ سکا काम हो सकने की संभावना को सीधे सामने लाता है।
प्रश्न और सकारात्मक रूप
नकारात्मक वाक्य इस विषय में बहुत आम हैं, लेकिन प्रश्न भी उपयोगी हैं: کیا تم سے اتنی دور چلا جائے گا؟ — ‘क्या तुमसे इतनी दूर चला जाएगा?’ इसमें सामने वाले की क्षमता या सहनशक्ति पूछी जा रही है। यह केवल भविष्य में चलने की योजना का प्रश्न नहीं है।
सकारात्मक उत्तर देते समय हमेशा उसी ढाँचे की नकल करना आवश्यक नहीं। ہاں، میں چل سکتا ہوں۔ — ‘हाँ, मैं चल सकता हूँ’ सीधा और स्वाभाविक उत्तर है। مجھ سے یہ کام ہو جائے گا۔ — ‘मुझसे यह काम हो जाएगा’ में भरोसा है कि काम संभल जाएगा। मगर नकारात्मक ढाँचे से نہیں हटाकर बनाया गया हर वाक्य उतना ही स्वाभाविक असमर्थता का उलटा रूप नहीं बनता; वह साधारण कर्मवाच्य भी सुनाई दे सकता है।
अभ्यास के सुझाव
- एक ही क्रिया से तीन भाव बनाएँ। पहले ‘मैं यह नहीं करता’, फिर ‘मैं यह नहीं कर सकता’ और अंत में ‘मुझसे यह नहीं होता’ लिखें। उर्दू में क्रमशः میں یہ نہیں کرتا۔ / میں یہ نہیں کر سکتا۔ / مجھ سے یہ نہیں ہوتا۔ के साथ एक-एक परिस्थिति जोड़ें। केवल अनुवाद नहीं, बोलने वाले का कारण भी सोचें।
- वस्तु बदलकर रूप जाँचें। पढ़ने वाले उदाहरण में पत्र, किताब, पत्रों और किताबों को रखें। हर बार क्रिया के दोनों हिस्से जाँचें: پڑھا … جاتا، پڑھی … جاتی، پڑھے … جاتے، پڑھی … جاتیں। इनका हिन्दी रूप क्रमशः ‘पढ़ा … जाता, पढ़ी … जाती, पढ़े … जाते, पढ़ी … जातीं’ है। फिर वही वाक्य भूतकाल में बोलें।
- दिनभर की तीन वास्तविक कठिनाइयाँ लिखें। एक शरीर से जुड़ी, एक मन से और एक वातावरण से: अधिक चलना, दुखद दृश्य देखना, शोर में पढ़ना। पहले व्यक्ति के साथ वाक्य बनाएँ, फिर जहाँ अर्थ स्वाभाविक रहे वहाँ व्यक्ति हटा दें। देखें कि निजी अनुभव कब सामान्य टिप्पणी बन जाता है।
संबंधित विषय
- पहले समझें: उर्दू में सामान्य कर्मवाच्य — काम को प्रमुखता देने वाली मूल बनावट समझने के बाद असमर्थता और असहनीय अनुभव वाले विशेष अर्थ पहचानना आसान होता है।