B2

स्वाहिली में प्रेरणार्थक क्रियाएँ: -ish-, -esh-, -z-

Kauli ya Kusababisha

यह लेख Settemila Lingue पर स्वाहिली व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।

संक्षेप में

स्वाहिली में प्रेरणार्थक क्रिया वह रूप है जिसमें कोई किसी से काम करवाता है या किसी घटना का कारण बनता है: pika ‘पकाना’ → pikisha ‘किसी से खाना पकवाना’, lala ‘सोना’ → lalisha ‘सुलाना’। इसके लिए अक्सर क्रिया के भीतर -ish- या -esh- जुड़ता है; कुछ प्रचलित रूपों में -z- मिलता है, जैसे ingia ‘अंदर जाना’ → ingiza ‘अंदर लाना या डालना’। हर रूप का अर्थ ज़बरदस्ती करवाना नहीं होता, और endesha gari का सहज अर्थ ‘गाड़ी चलाना’ है।

एक नज़र में

हिंदी के ‘सोना–सुलाना’, ‘पढ़ना–पढ़ाना’ और ‘करना–करवाना’ जैसे संबंध इस विषय को समझने में मदद करते हैं। स्वाहिली में इसे Kauli ya Kusababisha कहते हैं। यहाँ क्रिया यानी काम या स्थिति बताने वाला शब्द बदलता है: किसी का सोना बताने के बजाय आप उसे सुलाने वाले व्यक्ति की बात करते हैं। B2 स्तर पर यह संबंध पहचानना इसलिए उपयोगी है कि बहुत-सी परिचित क्रियाएँ इसी ढाँचे से जुड़ी होती हैं।

यह केवल आदेश देने का तरीका नहीं है। माता-पिता बच्चे को सुलाते हैं, कोई आवाज़ आपको जगाती है, कोई व्यक्ति गाड़ी चलाता है और शिक्षक बच्चों को पढ़ाता है। कहीं सचेत कोशिश है, कहीं किसी घटना का परिणाम। प्रेरणार्थक रूप अपने आप यह नहीं बताता कि काम प्यार से, अनुमति से, पैसे देकर या दबाव डालकर करवाया गया।

हिंदी से एक महत्वपूर्ण अंतर भी ध्यान में रखें। हिंदी के ‘पकाना’ में पहले से किसी चीज़ में बदलाव लाने का भाव है, लेकिन स्वाहिली का pika सामान्य ‘खाना पकाना’ है। उसका pikisha रूप बनाने पर एक और व्यक्ति जुड़ सकता है—वह व्यक्ति जिससे खाना पकवाया गया। इसलिए शब्द के अंत को देखकर नहीं, पूरे वाक्य में कौन क्या कर रहा है, यह देखकर अर्थ निकालें।

रूप कैसे बनता है और वाक्य कैसे बदलता है

1. विस्तार अंतिम स्वर से पहले जुड़ता है

क्रिया-विस्तार का मतलब है क्रिया के मूल हिस्से में जुड़ने वाला ऐसा अंश जो उसका अर्थ या उससे जुड़ने वाले लोगों और चीज़ों का संबंध बदल दे। बहुत-सी स्वाहिली क्रियाएँ -a पर समाप्त होती हैं। प्रेरणार्थक रूप में -ish- या -esh- इस अंतिम -a से पहले आता है।

उदाहरण के लिए pika में अंतिम -a हटाकर pik- लें, फिर -ish- और अंत में -a जोड़ें: pik-ish-a। ये छोटी रेखाएँ केवल समझाने के लिए हैं; सामान्य लेखन में पूरा शब्द pikisha होगा।

मूल क्रिया मूल अर्थ प्रेरणार्थक रूप सामान्य अर्थ
pika खाना पकाना pikisha किसी से खाना पकवाना
lala सोना lalisha सुलाना
rudi लौटना rudisha लौटाना, वापस करना
soma पढ़ना somesha पढ़ाना, पढ़ाई करवाना
cheka हँसना chekesha हँसाना
enda जाना endesha चलाना, संचालन करना
ingia अंदर जाना ingiza अंदर लाना या डालना
potea खो जाना poteza खो देना
jaa भरना, भरा होना jaza किसी चीज़ को भर देना

rudi → rudisha यह भी दिखाता है कि हर क्रिया मूल रूप में -a पर समाप्त नहीं होती। इन उदाहरणों को ‘जो भी अंतिम अक्षर हो, उसके बाद isha लगा दो’ वाला नियम न बनाएँ। शब्द का स्थापित रूप सीखना ज़रूरी है।

2. -ish- और -esh- का सामान्य चुनाव

स्वर-सामंजस्य यानी शब्द के स्वरों के अनुसार जुड़ने वाले हिस्से का स्वर बदलना, यहाँ उपयोगी शुरुआती नियम है। बहुत-सी नियमित क्रियाओं में मूल हिस्से का अंतिम स्वर a, i, u हो तो -ish-, और e, o हो तो -esh- मिलता है। तुलना करते समय सामान्य अंतिम -a को अलग रखें।

  • pika → pikisha: pik- में i, इसलिए -ish-।
  • lala → lalisha: lal- में a, इसलिए -ish-।
  • soma → somesha: som- में o, इसलिए -esh-।
  • cheka → chekesha: chek- में e, इसलिए -esh-।

enda → endesha भी -esh- वाला परिचित संबंध है। लेकिन यह स्वर वाला नियम पूरी शब्दावली की गारंटी नहीं है। खासकर स्वर पर समाप्त होने वाले मूल हिस्सों और बहुत प्रचलित पुराने रूपों को पूरे शब्द के रूप में याद करें।

3. -z- वाले रूप अलग से पहचानें

ingia → ingiza, potea → poteza और jaa → jaza में -z- दिखता है। इन्हें देखकर हर -ia, -ea या -aa वाली क्रिया पर एक ही काटने-जोड़ने की प्रक्रिया न लगाएँ। स्वाहिली में प्रेरणार्थक रूपों का एक बड़ा नियमित ढाँचा है, लेकिन उनके साथ स्थापित ध्वनि-परिवर्तन वाले शब्द भी हैं।

व्यावहारिक तरीका है जोड़े सीखना: ingia–ingiza ‘अंदर जाना–अंदर डालना’, potea–poteza ‘खो जाना–खो देना’। इससे शब्द का रूप और उसका सही इस्तेमाल दोनों याद रहते हैं। -ish-, -esh- और -z- मनमाने ढंग से एक-दूसरे के स्थान पर नहीं आते।

4. काम करने वाले और करवाने वाले को अलग रखें

कर्ता यानी वाक्य में जिसका काम या स्थिति बताई जा रही है। मूल वाक्य का कर्ता प्रेरणार्थक वाक्य में अक्सर कर्म, यानी क्रिया से प्रभावित व्यक्ति या चीज़, बन जाता है।

  • Mtoto analala. — बच्चा सो रहा है।
  • Mama anamlalisha mtoto. — माँ बच्चे को सुला रही है।

पहले वाक्य में mtoto ‘बच्चा’ सोने वाला है। दूसरे में mama ‘माँ’ सुलाने वाली है और बच्चा सुलाया जा रहा है। बच्चे का काम बदलकर माँ का सोना नहीं हो गया; माँ उस स्थिति का कारण बनी है।

अगर मूल क्रिया के साथ कोई वस्तु भी थी, तो प्रेरणार्थक वाक्य में वह बनी रह सकती है:

  • Juma anapika wali. — जुमा चावल पका रहा है।
  • Mama anampikisha Juma wali. — माँ जुमा से चावल पकवा रही है।

अब तीन भूमिकाएँ हैं: माँ करवाने वाली, जुमा वास्तविक पकाने वाला और चावल पकाई जाने वाली चीज़। हिंदी में ‘से’ इस संबंध को साफ करता है। स्वाहिली में क्रिया का रूप, शब्दों का क्रम और व्यक्ति से जुड़ा चिह्न मिलकर यह जानकारी देते हैं; हिंदी के हर ‘से’ के लिए अलग स्वाहिली शब्द ढूँढ़ना ठीक नहीं होगा।

5. काल और व्यक्ति के चिह्न अपनी जगह रहते हैं

उपसर्ग यानी शब्द के आगे जुड़ने वाला छोटा अर्थपूर्ण हिस्सा। स्वाहिली में कौन काम कर रहा है, कब कर रहा है और किस पर असर पड़ रहा है—इनकी जानकारी अक्सर क्रिया के आगे के हिस्सों में होती है। प्रेरणार्थक विस्तार क्रिया के बाद वाले हिस्से में रहता है।

Mama alimlalisha mtoto में alimlalisha को सीखने के लिए ऐसे बाँट सकते हैं: a-li-m-lal-ish-a।

  • a-: वह व्यक्ति, यहाँ माँ।
  • -li-: बीते समय का चिह्न।
  • -m-: एक व्यक्ति को, यहाँ बच्चे को।
  • -lal-: सोने से जुड़ा मूल हिस्सा।
  • -ish-: सुलाने का प्रेरणार्थक विस्तार।
  • -a: इस रूप का अंतिम स्वर।

कर्म-चिह्न वह छोटा हिस्सा है जो क्रिया में प्रभावित व्यक्ति या चीज़ की ओर संकेत करता है। anawafundisha watoto में -wa- बच्चों की ओर संकेत करता है। क्रिया में यह चिह्न होने पर भी बाद में watoto ‘बच्चे’ कहना सामान्य है; यह हिंदी में अनावश्यक दोहराव जैसा लगे, फिर भी स्वाहिली में स्वाभाविक है।

नीचे एक ही क्रिया endesha के वर्तमान रूप हैं। हिंदी अनुवाद में बोलने वाले के अनुसार ‘रहा’ या ‘रही’ चुना जाएगा; स्वाहिली के इन रूपों में वह लिंग-अंतर नहीं है।

व्यक्ति स्वाहिली वाक्य हिंदी अर्थ
मैं Ninaendesha gari. मैं गाड़ी चला रहा/रही हूँ।
तुम Unaendesha gari. तुम गाड़ी चला रहे/रही हो।
वह Anaendesha gari. वह गाड़ी चला रहा/रही है।
हम Tunaendesha gari. हम गाड़ी चला रहे हैं।
तुम लोग Mnaendesha gari. तुम लोग गाड़ी चला रहे हो।
वे Wanaendesha gari. वे गाड़ी चला रहे हैं।

प्रसंग में उदाहरण

पहले वास्तविक स्थिति समझें, फिर देखें कि प्रेरणार्थक क्रिया किस संबंध को व्यक्त कर रही है। जहाँ हिंदी में एक सामान्य क्रिया पर्याप्त है, वहाँ अनुवाद में हर बार ‘करवाना’ जोड़ना आवश्यक नहीं।

स्वाहिली हिंदी ध्यान देने की बात
Mwalimu anawafundisha watoto. शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। fundisha का प्रचलित अर्थ पढ़ाना या सिखाना है।
Mama alimlalisha mtoto. माँ ने बच्चे को सुलाया। सोने वाला बच्चा है, सुलाने वाली माँ।
Ninaendesha gari. मैं गाड़ी चला रहा/रही हूँ। इसका स्वाभाविक अर्थ वाहन चलाना है।
Mama alimpikisha Juma wali. माँ ने जुमा से चावल पकवाए। जुमा पकाने वाला है; चावल पकाए जाते हैं।
Baba anawasomesha watoto wake. पिता अपने बच्चों की पढ़ाई करवा रहे हैं। पढ़ाई का इंतज़ाम या खर्च उठाना भी समझा जा सकता है।
Hadithi hiyo iliwachekesha watoto. उस कहानी ने बच्चों को हँसा दिया। कारण कोई व्यक्ति ही हो, यह ज़रूरी नहीं।
Tafadhali rudisha kitabu kesho. कृपया किताब कल लौटा दें। rudisha का अर्थ वापस करना है।
Aliingiza sanduku ndani ya nyumba. उसने संदूक घर के अंदर रखा। अंदर जाने वाली चीज़ संदूक है।
Nimepoteza funguo zangu. मैंने अपनी चाबियाँ खो दी हैं। यहाँ जानबूझकर काम करवाने का भाव नहीं है।
Jaza chupa hii maji. इस बोतल में पानी भर दें। jaa की भरी होने की स्थिति पैदा करना।
Usimchekeshe mtoto wakati anakula. बच्चा जब खा रहा हो, तब उसे मत हँसाइए। मना करने पर भी प्रेरणार्थक अर्थ बना रहता है।
Tutawarudisha wageni hotelini. हम मेहमानों को होटल वापस पहुँचा देंगे। लोगों को वापस ले जाने के लिए भी rudisha आता है।

इन उदाहरणों में somesha और fundisha के बीच फर्क खास उपयोगी है। Mwalimu anawafundisha watoto में शिक्षक स्वयं पढ़ा रहे हैं। Baba anawasomesha watoto wake में पिता बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कर रहे हो सकते हैं; यह ज़रूरी नहीं कि वे खुद उन्हें पाठ पढ़ाएँ।

आम गलतियाँ

1. हर जगह -ish- लगा देना

  • गलत: Ninachekisha watoto.
  • सही: Ninachekesha watoto. — मैं बच्चों को हँसा रहा/रही हूँ।
  • क्यों: cheka के लिए प्रचलित रूप chekesha है। यहाँ -esh- आता है; केवल -ish- याद करना पर्याप्त नहीं।

2. -z- वाले परिचित रूप को नियमित बनाने की कोशिश

  • गलत: Ninaingiisha sanduku ndani.
  • सही: Ninaingiza sanduku ndani. — मैं संदूक अंदर रख रहा/रही हूँ।
  • क्यों: ‘अंदर डालना’ के लिए ingiza सीखें। किसी संभव लगने वाली जोड़-तोड़ से बनाया गया शब्द सामान्य रूप का स्थान नहीं ले सकता।

3. सोने और सुलाने में अंतर मिटा देना

  • गलत, यदि अर्थ ‘माँ ने बच्चे को सुलाया’ है: Mama alilala mtoto.
  • सही: Mama alimlalisha mtoto.
  • क्यों: alilala का अर्थ है कि माँ स्वयं सोई। बच्चे को सुलाने के लिए प्रेरणार्थक lalisha चाहिए; यहाँ -m- बच्चे को दर्शाता है।

4. पकवाने के वाक्य में गलत वस्तु रख देना

  • अस्वाभाविक, यदि सीधा अर्थ खाना पकवाना है: Alimpikisha kazi.
  • स्पष्ट विकल्प: Alimpikisha chakula. — उसने उससे खाना पकवाया।
  • क्यों: kazi का अर्थ ‘काम’ है, पकाई जाने वाली चीज़ नहीं। ‘उसने उससे काम करवाया’ कहना हो तो Alimfanya afanye kazi कहा जा सकता है। केवल प्रेरणार्थक रूप बना देने से उसके बाद कोई भी शब्द स्वाभाविक नहीं हो जाता।

5. अनुवाद में अपने आप ज़बरदस्ती जोड़ देना

  • गलत निष्कर्ष: Mama alimlalisha mtoto का अर्थ है कि माँ ने बच्चे को ज़बरदस्ती सुलाया।
  • सही समझ: सामान्य अर्थ सिर्फ ‘माँ ने बच्चे को सुलाया’ है।
  • क्यों: प्रेरणार्थक विस्तार कारण या करवाने का संबंध बताता है, दबाव का स्तर नहीं। ज़बरदस्ती की जानकारी प्रसंग या किसी अतिरिक्त अभिव्यक्ति से आएगी।

प्रयोग की बातें

सामान्य बोलचाल का हिस्सा

ये रूप केवल औपचारिक लेखन के लिए नहीं हैं। endesha gari, rudisha kitabu और jaza chupa जैसे प्रयोग रोज़मर्रा में मिलते हैं: गाड़ी चलाना, किताब लौटाना और बोतल भरना। इन्हें हर बार मूल क्रिया से निकालकर समझने के बजाय सामान्य शब्द-समूहों की तरह भी सीखें।

हिंदी के ‘करवाना’ से अधिक व्यापक अर्थ

हिंदी में ‘उसने कार चलवाई’ सुनकर लगता है कि किसी और ने कार चलाई। लेकिन स्वाहिली में Aliendesha gari का सामान्य अर्थ ‘उसने कार चलाई’ है। इसलिए endesha को हमेशा ‘चलवाना’ कहना अर्थ बदल सकता है। मूल संबंध ‘जाने का कारण बनना’ रूप समझने में मदद करता है, लेकिन वास्तविक प्रयोग में क्रिया का प्रचलित अर्थ अधिक महत्वपूर्ण है।

इसी तरह Nimepoteza funguo zangu में किसी से चाबियाँ गुम करवाने की बात नहीं है। यह ‘मैंने अपनी चाबियाँ खो दी हैं’ है। किसी परिणाम का कारण बनना अनजाने में भी हो सकता है।

अनुरोध और आदेश का लहजा अलग विषय है

Rudisha kitabu का अर्थ ‘किताब लौटाओ’ है। Tafadhali rudisha kitabu में tafadhali ‘कृपया’ जोड़ने से अनुरोध नरम होता है। विनम्रता प्रेरणार्थक विस्तार की वजह से नहीं आती। इसी तरह किसी वाक्य में प्रेरणार्थक रूप होने भर से वह रूखा आदेश नहीं बन जाता।

आगे की बारीकियाँ

प्रेरणार्थक और लाभार्थक विस्तार में अंतर

लाभार्थक विस्तार से यहाँ मतलब उस क्रियारूप से है जो किसी के लिए, किसी तक या किसी विशेष संबंध में काम करने को व्यक्त करता है; सही अर्थ मूल क्रिया और प्रसंग पर निर्भर है। दोनों विस्तारों के बीच एक सरल तुलना देखें:

  • Mama anampikia mtoto chakula. — माँ बच्चे के लिए खाना पका रही है।
  • Mama anampikisha mtoto chakula. — माँ बच्चे से खाना पकवा रही है।

पहले में pikia है: बच्चा उस भोजन का लाभ पाने वाला है, खाना माँ पका रही है। दूसरे में pikisha है: बच्चा खाना बनाने वाला है और माँ उससे बनवा रही है। दोनों वाक्यों में -m- बच्चे की ओर संकेत करता है, लेकिन बच्चे की भूमिका समान नहीं। हिंदी में ‘के लिए’ और ‘से’ का अंतर यहाँ बहुत मदद करता है।

प्रेरणार्थक के साथ कर्मवाच्य

कर्मवाच्य यानी ऐसा वाक्य जिसमें काम करने वाले के बजाय उससे प्रभावित व्यक्ति या चीज़ को सामने रखा जाता है। स्वाहिली में प्रेरणार्थक रूप के बाद कर्मवाच्य का -w- जुड़ सकता है:

  • Mwalimu anawafundisha watoto. — शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
  • Watoto wanafundishwa na mwalimu. — बच्चों को शिक्षक द्वारा पढ़ाया जा रहा है।

यहाँ fundisha → fundishwa हुआ। पढ़ाने का अर्थ बना रहता है; बदलता यह है कि वाक्य बच्चों से शुरू होकर उनकी पढ़ाई को सामने रखता है। समझने के लिए अंतिम हिस्सा fund-ish-w-a के रूप में देखा जा सकता है।

दूसरा उपयोगी जोड़ा है ingiza → ingizwa। Sanduku liliingizwa ndani का अर्थ है ‘संदूक अंदर लाया गया’। कौन लाया, यह न बताया जाए तब भी वाक्य पूरा है।

हर प्रेरणार्थक संबंध एक जैसा पारदर्शी नहीं होता

कुछ जोड़ों का अर्थ तुरंत समझ में आता है: cheka–chekesha ‘हँसना–हँसाना’। दूसरे शब्दों में प्रयोग अधिक विशिष्ट हो गया है। endesha वाहन चलाने के अलावा कामकाज का संचालन करने के लिए भी आता है: Anaendesha biashara ndogo — वह एक छोटा कारोबार चलाता/चलाती है।

इसीलिए किसी नए शब्द में -ish- या -esh- देखकर उसका अर्थ पूरी तरह तय न करें। वह किसी प्रेरणार्थक परिवार का सदस्य हो सकता है, फिर भी उसका स्थापित अर्थ और उसके साथ आने वाले शब्द अलग से सीखने पड़ेंगे। एक से अधिक विस्तार वाले नए रूप बनाते समय भी केवल हिंदी अर्थ के आधार पर क्रम न चुनें; पहले प्रचलित उदाहरण जाँचें।

नकार और इच्छित काम का रूप

नकार यानी काम न होने या न करने की बात। वर्तमान में Ninaendesha gari ‘मैं गाड़ी चला रहा/रही हूँ’ के सामने Siendeshi gari ‘मैं गाड़ी नहीं चलाता/चलाती’ मिलता है। अंतिम स्वर बदल सकता है, लेकिन भीतर का प्रेरणार्थक हिस्सा बना रहता है।

किसी को काम न करने के लिए कहना हो तो Usimchekeshe mtoto ‘बच्चे को मत हँसाओ’ जैसे रूप में अंतिम -e दिखता है। इसलिए केवल -isha या -esha पर समाप्त शब्दों को ही प्रेरणार्थक मानना अधूरा तरीका है। पूरे वाक्य में क्रिया का रूप बदल सकता है; उसके भीतर का विस्तार पहचानना सीखें।

अभ्यास के तरीके

  1. दो लोगों की भूमिकाएँ लिखें। Mtoto analala ‘बच्चा सो रहा है’ से Mama anamlalisha mtoto ‘माँ बच्चे को सुला रही है’ बनाएँ। हर बार पूछें: मूल काम कौन कर रहा है और उसका कारण कौन बन रहा है? फिर Juma anapika wali ‘जुमा चावल पका रहा है’ से माँ के चावल पकवाने वाला वाक्य बनाएँ।
  2. जोड़ा, अर्थ और एक वस्तु साथ याद करें। ingia–ingiza के साथ संदूक अंदर रखने का वाक्य, jaa–jaza के साथ बोतल भरने का वाक्य, और rudi–rudisha के साथ किताब लौटाने का वाक्य लिखें। इससे केवल प्रत्यय नहीं, क्रिया का वास्तविक इस्तेमाल याद होगा।
  3. ‘के लिए’ और ‘से’ की परीक्षा लें। ‘माँ बच्चे के लिए खाना पका रही है’ तथा ‘माँ बच्चे से खाना पकवा रही है’ को अलग-अलग स्वाहिली में लिखें। उत्तर मिलाते समय खास तौर पर pikia और pikisha देखें। अंत में हर प्रेरणार्थक वाक्य का सहज हिंदी अनुवाद करें और जाँचें कि कहीं बिना कारण ‘ज़बरदस्ती’ या ‘किसी और से’ तो नहीं जोड़ दिया।

संबंधित अवधारणाएँ

पूर्व-आवश्यकता

स्वाहिली भाषा में अप्लाइड/पूर्वसर्गीय विस्तार (-i-/-e-/-li-/-le-) (Kauli ya Kutendea)B1

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