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हिन्दी में आज्ञा काल: जा, जाओ और जाइए

आज्ञा काल

यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।

संक्षेप में

हिन्दी में किसी से कुछ करने के लिए कहते समय क्रिया का रूप संबोधन के अनुसार बदलता है: तू जा, तुम जाओ, आप जाइए। सामान्यतः क्रिया से ना हटाकर तू का रूप मिलता है, तुम के लिए ओ और आप के लिए इए जुड़ता है; कुछ आम क्रियाओं के अलग रूप हैं, जैसे करो—कीजिए। किसी काम से रोकने के लिए मत लगाएँ: मत जाओ, मत जाइए।

परिचय

आज्ञा काल का प्रयोग केवल हुक्म देने में नहीं होता। अंदर आइए, थोड़ा पानी पी लो, अपना ध्यान रखना और यहाँ मत बैठिए—इन सबमें बोलने वाला सामने वाले से कोई काम करने या न करने को कह रहा है। इसे आज्ञार्थक रूप भी कहते हैं, यानी क्रिया का वह रूप जिससे आदेश, अनुरोध, सलाह या मनाही व्यक्त होती है। क्रिया वह शब्द है जो काम या स्थिति बताता है, जैसे जाना, पढ़ना और बैठना।

इस विषय का मूल नियम आरंभिक स्तर पर, लगभग ए२ में, सीखा जा सकता है। कठिनाई केवल रूप बनाने की नहीं है: यह भी समझना होता है कि सामने वाला दोस्त है, अपरिचित है या कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे आदर से बात करनी है। बैठ, बैठो और बैठिए एक ही काम बताते हैं, पर सुनने वाले पर उनका असर अलग होता है।

नाम में ‘काल’ होने पर भी यहाँ मुख्य बात समय नहीं, बोलने का उद्देश्य है। दरवाज़ा बंद करते हो किसी आदत के बारे में कहता है; दरवाज़ा बंद करो सामने वाले से काम करने को कहता है। पहले तीन संबोधनों के रूप सीखें, फिर आगे दिए गए विनम्रता, मनाही और बाद में किए जाने वाले काम के भेद देखें।

रूप कैसे बनते हैं?

१. पहले संबोधन चुनें

सर्वनाम वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति के नाम की जगह आते हैं, जैसे मैं, तुम और आप। आज्ञार्थक वाक्य में सामने वाले के लिए मुख्य विकल्प तू, तुम और आप हैं।

संबोधन सामान्य प्रयोग जाने के लिए कहना
तू बहुत घनिष्ठ संबंध; दूसरे प्रसंगों में अपमानजनक भी जा!
तुम परिचितों, मित्रों या बच्चों से सहज बातचीत जाओ।
आप सम्मान, औपचारिक बातचीत या अपरिचित व्यक्ति जाइए।

तू को केवल ‘दोस्त वाला रूप’ मान लेना ठीक नहीं। कुछ परिवारों और घनिष्ठ संबंधों में यह सहज है, लेकिन किसी अपरिचित के लिए अपमानजनक लग सकता है। संबंध स्पष्ट न हो तो आप सुरक्षित विकल्प है। तुम एक व्यक्ति या कई परिचित लोगों के लिए हो सकता है; आप भी एक या कई लोगों के लिए हो सकता है।

२. क्रिया से ‘ना’ हटाएँ

क्रिया का सामान्य शब्दकोश वाला रूप अक्सर ना पर समाप्त होता है: पढ़ना, बैठना, बोलना। इससे ना हटाने पर जो हिस्सा बचता है, उसे यहाँ मूल रूप कहेंगे। उदाहरण के लिए, पढ़ना → पढ़, बैठना → बैठ।

सरल नियम इस प्रकार है:

  • तू: मूल रूप—पढ़, बैठ, बोल।
  • तुम: मूल रूप के साथ ओ—पढ़ो, बैठो, बोलो।
  • आप: मूल रूप के साथ इए—पढ़िए, बैठिए, बोलिए।
क्रिया तू तुम आप
पढ़ना पढ़ पढ़ो पढ़िए
लिखना लिख लिखो लिखिए
बोलना बोल बोलो बोलिए
बैठना बैठ बैठो बैठिए
सुनना सुन सुनो सुनिए
देखना देख देखो देखिए
रखना रख रखो रखिए
खाना खा खाओ खाइए
जाना जा जाओ जाइए
आना आ आओ आइए

खा + ओ → खाओ और जा + ओ → जाओ में दोनों स्वर सुनाई देते हैं। इन्हें खो या जो न बना दें। इसी तरह आप के रूप खाइए, जाइए, आइए को पूरे शब्द के रूप में पढ़कर याद करें।

३. बहुत काम आने वाले विशेष रूप

कुछ क्रियाओं में केवल अंतिम हिस्सा जोड़ देने से सामान्य रूप नहीं मिलता। इन्हें अलग से याद करना उपयोगी है।

क्रिया तू तुम आप
करना कर करो कीजिए
लेना ले लो लीजिए
देना दे दो दीजिए
पीना पी पियो पीजिए

करना का आदरसूचक रूप करिए भी प्रचलित और स्वीकार्य है; सीखने की शुरुआत में कीजिए याद रखना पर्याप्त है। लीजिए, दीजिए और पीजिए में सुनाई देने वाला ज सामान्य इए वाले नियम से सीधे नहीं निकलता, इसलिए इन रूपों को यांत्रिक ढंग से न बनाएँ।

४. पुरुष और स्त्री के लिए रूप समान रहता है

यहाँ पढ़ो या बैठिए का रूप सामने वाले के पुरुष या स्त्री होने से नहीं बदलता। रीना, बैठो और अमन, बैठो दोनों सही हैं। आदर के साथ रीना जी, बैठिए और अमन जी, बैठिए कहेंगे।

कई लोगों से भी यही रूप कह सकते हैं: बच्चो, बैठो। आप सब बैठिए। कई लोगों को स्पष्ट रूप से संबोधित करना हो तो तुम लोग, आप दोनों या आप सब जोड़ सकते हैं।

५. सर्वनाम हर बार कहना आवश्यक नहीं

आप यहाँ बैठिए और यहाँ बैठिए दोनों सही हैं। क्रिया का रूप अक्सर संबोधन का स्तर बता देता है। इसलिए हर अनुरोध में आप दोहराने की जरूरत नहीं होती।

सर्वनाम जोड़ने से अंतर या ज़ोर स्पष्ट हो सकता है: आप यहीं रुकिए; मैं टिकट ले आता हूँ। यहाँ बताया जा रहा है कि रुकना सामने वाले को है और टिकट लेने का काम बोलने वाला करेगा।

६. मनाही के लिए ‘मत’

निषेध, यानी किसी काम को न करने के लिए कहना, सामान्य बोलचाल में मत से बनता है। मत क्रिया से पहले आता है; बाकी रूप संबोधन के अनुसार रहता है।

तू तुम आप
मत जा। मत जाओ। मत जाइए।
मत बोल। मत बोलो। मत बोलिए।
मत कर। मत करो। मत कीजिए।

इसलिए आप मत जाना की जगह सामान्य आदरसूचक मनाही के लिए आप मत जाइए कहें। आप चिंता न करें और कृपया यहाँ न बैठें भी स्वाभाविक विनम्र रूप हैं; उनका ढाँचा आगे समझाया गया है।

प्रसंग के साथ उदाहरण

यहाँ उदाहरण और उनका सरल आशय दोनों हिन्दी में हैं। आशय वाला स्तंभ अनुवाद के बजाय यह स्पष्ट करता है कि उस स्थिति में वाक्य से क्या कहा जा रहा है।

उदाहरण सरल आशय प्रसंग या सावधानी
जा! देर हो रही है। अब निकल; समय कम है। बहुत घनिष्ठ व्यक्ति से या कड़े स्वर में।
तुम पहले घर जाओ। पहले घर पहुँचो। परिचित व्यक्ति को निर्देश।
आप अंदर जाइए। भीतर चले जाइए। सम्मान के साथ रास्ता बताना।
कृपया यहाँ बैठिए। इस जगह बैठने का अनुरोध है। अतिथि या अपरिचित से।
ज़रा मेरी बात सुनो। थोड़ी देर मेरी बात पर ध्यान दो। परिचित से ध्यान माँगना।
मुझे वह कागज़ दीजिए। वह कागज़ मुझे दे दें। देना का विशेष रूप।
यह दवा पानी के साथ लीजिए। दवा पानी के साथ लें। सम्मान के साथ निर्देश।
थोड़ा पानी पी लो। अपने लिए कुछ पानी पी लेना अच्छा होगा। परिचित को सहज सलाह।
कृपया अपना नाम लिखिए। अपना नाम लिखने का अनुरोध है। पंजीकरण या कार्यालय का प्रसंग।
सड़क पर मत दौड़ो। सड़क पर दौड़ना बंद करो या उससे बचो। परिचित को सुरक्षा की चेतावनी।
यहाँ तस्वीरें मत खींचिए। इस जगह तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं है। सम्मानपूर्ण मनाही।
मुझसे नाराज़ मत हो। मुझ पर गुस्सा न करो। घनिष्ठ या सहज बातचीत; तुम का हो रूप।
पहुँचकर मुझे फ़ोन करना। पहुँचने के बाद मुझे खबर देना। बाद में किए जाने वाले काम की याद।
अगली बार हमारे घर आइएगा। आगे कभी हमारे घर आने का निमंत्रण है। भविष्य का विनम्र निमंत्रण।

इन उदाहरणों में एक बात पर ध्यान दें: कृपया हर आदरसूचक वाक्य में आवश्यक नहीं है। मुझे वह कागज़ दीजिए अपने आप में सम्मानपूर्ण हो सकता है। वास्तविक विनम्रता रूप के साथ स्वर, स्थिति और बात कहने के ढंग पर निर्भर करती है।

आम गलतियाँ

१. ‘आप’ के साथ ‘तुम’ वाला रूप लगाना

  • गलत: आप यहाँ बैठो।
  • सही: आप यहाँ बैठिए।
  • क्यों: मानक हिन्दी में सर्वनाम और क्रिया का संबोधन-स्तर मेल खाना चाहिए। तुम यहाँ बैठो भी सही है, लेकिन उससे संबंध की शैली बदल जाती है। कुछ स्थानीय बोलियों में मिश्रित रूप सुनाई दे सकते हैं; आरंभ में नियमित मेल सीखें।

२. ‘कृपया’ जोड़कर बाकी रूप न बदलना

  • अपरिचित से अनुपयुक्त: कृपया तू यह कर।
  • उपयुक्त: कृपया आप यह कीजिए।
  • क्यों: कृपया अनुरोध का संकेत है, लेकिन वह तू को आदरसूचक नहीं बना देता। संबोधन और क्रिया भी स्थिति के अनुकूल चुनें।

३. सभी क्रियाओं पर एक ही नियम लगाना

  • गलत: मुझे पानी देइए।
  • सही: मुझे पानी दीजिए।
  • क्यों: देना का सामान्य मानक आदरसूचक रूप दीजिए है। इसी समूह में लीजिए, पीजिए भी अलग से याद करें।

४. सीधी मनाही में कथन वाला रूप लगा देना

  • रोकने के उद्देश्य से गलत: अभी वहाँ नहीं जाते हो।
  • सही: अभी वहाँ मत जाओ।
  • क्यों: नहीं जाते हो किसी आदत या व्यवहार के बारे में कथन है। सामने वाले को सीधे रोकने के लिए मत जाओ अधिक स्पष्ट है। नहीं दूसरे ढाँचों में मनाही बता सकता है, जैसे वहाँ नहीं जाना है, लेकिन वह अलग बनावट है।

५. स्त्री के लिए अनावश्यक रूप बदलना

  • गलत: सीमा, यह किताब पढ़ीओ।
  • सही: सीमा, यह किताब पढ़ो।
  • क्यों: यहाँ पुरुष और स्त्री के अनुसार क्रिया नहीं बदलती। पढ़ो और पढ़िए का चुनाव निकटता या आदर से होता है।

६. हर ‘ना’ वाले अंत को मूल क्रिया समझना

  • आदरसूचक अनुरोध में अनुपयुक्त: आप कल समय पर आना।
  • अधिक उपयुक्त: आप कल समय पर आइएगा।
  • क्यों: कल समय पर आना परिचित से भविष्य की याद दिलाने का सामान्य तरीका है। स्पष्ट आदरसूचक संबोधन के साथ आइए या आइएगा चुनना बेहतर है।

बोलचाल और व्यवहार की बातें

आदेश, अनुरोध और निमंत्रण में रूप एक हो सकता है

अंदर आइए निमंत्रण हो सकता है; पहले यह कागज़ पढ़िए निर्देश हो सकता है; अभी यहाँ से जाइए कड़ा आदेश हो सकता है। केवल इए लगा होने से हर वाक्य नरम अनुरोध नहीं बन जाता। वही रूप तेज़ आवाज़ या ज़ोर के साथ सख्त लग सकता है।

ज़रा, कृपया, एक बार या थोड़ा कई अनुरोधों को सहज बनाते हैं: ज़रा रास्ता दीजिए, एक बार यह देखिए। फिर भी इनका असर प्रसंग पर निर्भर है। झुँझलाकर कहा गया ज़रा चुप रहिए! विनम्र नहीं लगेगा।

‘तू’ से बचना कब बेहतर है?

नए सहकर्मी, पड़ोसी, दुकानदार या किसी अपरिचित से सामान्यतः आप से शुरू करें। केवल किसी की उम्र कम होने से तू उचित नहीं हो जाता। घनिष्ठ संबंधों में लोग खुद तय करते हैं कि कौन-सा संबोधन सहज है। धार्मिक प्रार्थना या कविता में तू प्रेम और निकटता भी दिखा सकता है; वहाँ इसे सामान्य सामाजिक अपमान की तरह नहीं समझना चाहिए।

लिखावट में दिखने वाले विकल्प

जाइए/जाइये, कीजिए/कीजिये, लीजिए/लीजिये जैसे रूप पढ़ने को मिल सकते हैं। इस लेख में एकरूपता के लिए जाइए, कीजिए, लीजिए लिखे गए हैं। अलग वर्तनी देखकर उसे नया संबोधन-स्तर न मानें। लिखने का अभ्यास करते समय एक सुसंगत शैली अपनाएँ।

आगे की समझ: शुरुआती नियमों से आगे

इस भाग के सभी रूप तुरंत याद करना आवश्यक नहीं है। पहले करो—कीजिए और मत करो—मत कीजिए जैसे जोड़े सहज करें। आगे के रूप पढ़ते-सुनते समय पहचानना उपयोगी होगा।

१. बाद के काम के लिए ‘करना’ और ‘कीजिएगा’

खाना खाओ अभी खाना खाने को कह सकता है। घर पहुँचकर खाना खा लेना बाद में किए जाने वाले काम की सलाह है। परिचितों से आना, जाना, करना जैसे ना वाले रूप अक्सर निर्देश या याद दिलाने के काम आते हैं: कल अपनी किताब लाना।

आदर के साथ आइएगा, जाइएगा, कीजिएगा, लीजिएगा, दीजिएगा जैसे रूप मिलते हैं। इन्हें भविष्यत् आज्ञार्थक कहा जाता है, यानी आगे किए जाने वाले काम के लिए आदेश या अनुरोध का रूप।

उदाहरण सरल आशय विशेषता
कल समय पर आना। कल देर मत करना। परिचित को याद दिलाना।
समय मिले तो फ़ोन कीजिएगा। सुविधा होने पर फ़ोन करें। आगे के लिए विनम्र अनुरोध।
रास्ते में पानी ले लीजिएगा। रास्ते में पानी लेना याद रखें। सम्मान के साथ सलाह।

कीजिएगा कभी तत्काल अनुरोध को भी नरम बनाने के लिए आता है: ज़रा सुनिएगा। इसलिए इसे केवल दूर के भविष्य से न जोड़ें। सामने वाली स्त्री हो या पुरुष, कीजिएगा में यह गा सामान्य संबोधन में नहीं बदलता; कीजिएगी बनाने की जरूरत नहीं है।

२. ‘करें’ और ‘कीजिए’ का अंतर

कृपया प्रतीक्षा करें और कृपया प्रतीक्षा कीजिए दोनों आदरपूर्ण निर्देश हैं। करें, जाएँ, बैठें जैसे रूप अनुरोध, सुझाव और लिखित निर्देशों में मिलते हैं। इनके दूसरे प्रयोग इच्छा या संभावना भी व्यक्त करते हैं; यहाँ बस इनका निर्देश देने वाला प्रयोग पहचानना पर्याप्त है।

बैठिए अक्सर सामने मौजूद व्यक्ति से सीधा संबोधन लगता है। कृपया अपनी बारी की प्रतीक्षा करें सूचना-पट्ट, घोषणा या सामान्य लिखित निर्देश में बहुत स्वाभाविक है। मनाही में भी कृपया प्रवेश न करें मिलता है; इसका अर्थ अंदर मत आइए के करीब है।

३. प्रश्न के रूप में अनुरोध

हर अनुरोध आज्ञार्थक क्रिया से नहीं बनता। क्या आप दरवाज़ा बंद कर सकते हैं? और क्या आप मेरी मदद करेंगे? व्याकरण की दृष्टि से प्रश्न हैं, लेकिन व्यवहार में उनसे काम करने का अनुरोध किया जाता है।

इससे एक उपयोगी भेद समझ आता है: दरवाज़ा बंद कीजिए में आदरसूचक क्रिया है, फिर भी कुछ स्थितियों में वह सीधा निर्देश लगेगा। प्रश्न के रूप में कहने से सामने वाले को अपनी सुविधा बताने की जगह मिल सकती है। कोई एक तरीका हर परिस्थिति में सबसे विनम्र नहीं होता।

४. दो क्रियाओं वाले रूप: ‘कर लो’, ‘कर दो’, ‘करते रहो’

दो क्रियाएँ मिलकर काम का ढंग या भाव बदल सकती हैं। इन्हें यहाँ संयुक्त क्रिया, यानी मिलकर अर्थ देने वाला क्रियाओं का समूह, समझें। संबोधन का बदलाव अंतिम क्रिया में दिखता है।

  • यह काम कर लो → यह काम कर लीजिए। काम पूरा कर लेने या अपने लिए कर लेने की सलाह।
  • दरवाज़ा बंद कर दो → दरवाज़ा बंद कर दीजिए। बंद करने का काम पूरा करने के लिए कहना; अक्सर किसी की सुविधा के लिए।
  • अभ्यास करते रहो → अभ्यास करते रहिए। काम जारी रखने को कहना।

बैठ जाओ—बैठ जाइए और ध्यान से सुन लो—ध्यान से सुन लीजिए भी इसी तरह उपयोगी जोड़े हैं। केवल आखिरी हिस्सा बदलने से संबोधन बदल जाता है।

५. ‘ना’ से आग्रह और मिलकर कुछ करने का सुझाव

बैठो ना, सुनिए ना में अंत का ना आग्रह या अपनापन जोड़ सकता है। यह मत वाली मनाही नहीं है। न जाओ का अर्थ जाने से रोकना है, जबकि जाओ ना अक्सर जाने का आग्रह है। शब्द की जगह और बोलने का स्वर दोनों ध्यान से सुनें।

चलो, खाना खाएँ और आइए, शुरू करें में बोलने वाला खुद को भी काम में शामिल करता है। ये केवल सामने वाले को आदेश नहीं, मिलकर कुछ करने के प्रस्ताव हैं। आइए का अर्थ ऐसे प्रसंग में हमेशा सचमुच पास आने को कहना नहीं होता।

अभ्यास के तरीके

१. एक क्रिया को तीन रिश्तों में रखें। रोज़ पाँच क्रियाएँ चुनें और उनके तीन रूप बोलें: बैठ—बैठो—बैठिए, दे—दो—दीजिए। फिर हर समूह का मनाही वाला रूप बनाएँ। इससे केवल अंत याद नहीं होगा, संबोधन के साथ उसका संबंध भी बनेगा।

२. एक ही काम अलग प्रसंगों में कहें। मित्र, अतिथि और कार्यालय के आगंतुक से पानी लेने के लिए कैसे कहेंगे? पानी ले लो, पानी लीजिए, कृपया पानी ले लीजिए बोलकर देखें। तय करें कि कौन-सा वाक्य किस संबंध में सहज है; केवल सबसे लंबा वाक्य चुनना लक्ष्य नहीं है।

३. छोटे संवाद लिखकर जाँचें। घर से निकलने, रास्ता पूछने या किसी को भोजन पर बुलाने का चार-पंक्ति संवाद बनाएँ। एक बार केवल तुम, दूसरी बार केवल आप का संबंध रखें। अंत में जाँचें कि करो/कीजिए, आओ/आइए और मत जाओ/मत जाइए कहीं आपस में मिल तो नहीं गए।

संबंधित विषय

  • पहले पढ़ें: पुरुषवाचक सर्वनाम — तू, तुम और आप का अंतर समझने से आज्ञार्थक रूप सही चुनना आसान होता है।

पूर्व-आवश्यकता

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