हिंदी में बुनियादी विधि अभिव्यक्तियाँ: चाहिए और करना है
बुनियादी विधि अभिव्यक्ति
यह लेख Settemila Lingue पर हिन्दी व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।
संक्षेप में
मुझे पानी चाहिए किसी चीज़ की ज़रूरत बताता है; मुझे जाना है जाने का काम, आवश्यकता या तय इरादा बताता है; मुझे जाना चाहिए जाने की सलाह या उचित होने का भाव बताता है। इन ढाँचों में व्यक्ति के लिए मैं की जगह मुझे, आप की जगह आपको जैसे रूप आते हैं। पहले चीज़ की ज़रूरत, करने का काम और सलाह का यह अंतर समझें; फिर करना, करनी, करने के रूप सीखें।
एक नज़र में
रोज़मर्रा की हिंदी में किसी बात को केवल घटना के रूप में नहीं बताया जाता। हम यह भी बताते हैं कि हमें क्या चाहिए, कौन-सा काम करना है और क्या करना ठीक होगा। व्याकरण में ऐसे अर्थों को विधि का भाव कहते हैं: यानी काम के साथ जुड़ी ज़रूरत, बाध्यता, सलाह या संभावना। इस लेख में मुख्य ध्यान ज़रूरत, तय काम और सलाह पर है।
शुरुआती स्तर पर ये तीन छोटे वाक्य बहुत काम आते हैं: मुझे पानी चाहिए। मुझे जाना है। आपको यह करना चाहिए। दुकान पर सामान माँगने से लेकर घर की योजना बनाने और सहकर्मी को सुझाव देने तक इनका उपयोग होता है। इन्हें सीखते समय केवल आख़िरी शब्द न बदलें; यह भी देखें कि आप किस तरह की बात कहना चाहते हैं।
हिंदी पढ़ लेने वाला व्यक्ति भी मैं जाता हूँ और मुझे जाना है के बीच उलझ सकता है। पहले वाक्य में जाने की आदत या नियमित काम बताया जाता है; दूसरे में जाने का काम सामने है। इस विषय की शुरुआत आधारभूत स्तर पर होती है, लेकिन समय, नकार और बोलने के लहजे से इसके अर्थ में आने वाले बदलाव आगे भी उपयोगी रहते हैं।
वाक्य कैसे बनते हैं?
१. व्यक्ति को बताने वाले रूप: मैं से मुझे
इन वाक्यों में ज़रूरत महसूस करने वाला या काम करने वाला व्यक्ति अक्सर को वाले रूप में आता है। इसे संप्रदान-रूपी कर्ता कहा जाता है: सरल शब्दों में, वह व्यक्ति जिससे ज़रूरत या काम जुड़ा है, लेकिन जिसके लिए मैं, तुम, वह की जगह मुझे, तुम्हें, उसे जैसे रूप लगते हैं। यहाँ कर्ता का मतलब उस व्यक्ति से है जिसके बारे में काम की बात कही जा रही है।
सर्वनाम किसी नाम की जगह आने वाला शब्द है, जैसे मैं, हम, आप। सामान्य सर्वनाम और इन ढाँचों में लगने वाले रूप साथ देखें।
| सामान्य रूप | ज़रूरत या काम बताने वाला रूप | उदाहरण |
|---|---|---|
| मैं | मुझे / मुझको | मुझे पानी चाहिए। |
| हम | हमें / हमको | हमें निकलना है। |
| तू | तुझे / तुझको | तुझे आराम करना चाहिए। |
| तुम | तुम्हें / तुमको | तुम्हें पढ़ना है। |
| आप | आपको | आपको बैठना चाहिए। |
| यह / वह | इसे / उसे, इसको / उसको | उसे घर जाना है। |
| ये / वे | इन्हें / उन्हें, इनको / उनको | उन्हें मदद चाहिए। |
किसी व्यक्ति का नाम हो तो उसके बाद सीधे को लगाएँ: रीना को जाना है। मोहन को दवा चाहिए। समूह के लिए भी यही तरीका है: बच्चों को सोना चाहिए।
मुझे और मुझको दोनों सही हैं। सामान्य बातचीत में मुझे, हमें, तुम्हें बहुत स्वाभाविक हैं। इनके बाद दोबारा को नहीं जोड़ते: मुझे को पानी चाहिए नहीं, मुझे पानी चाहिए। आपको सम्मान के लिए एक व्यक्ति से भी कहा जाता है और कई लोगों से भी। तू बहुत घनिष्ठ संबंधों में मिलता है, पर अनजान व्यक्ति के लिए अनुचित लग सकता है।
२. किसी चीज़ की ज़रूरत: व्यक्ति + चीज़ + चाहिए
संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, जगह या भाव का नाम है, जैसे पानी, किताब, मदद। जब किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो यह ढाँचा अपनाएँ:
व्यक्ति का को-वाला रूप + संज्ञा + चाहिए
- मुझे पानी चाहिए। — पानी की ज़रूरत है।
- हमें दो कुर्सियाँ चाहिए। — दो कुर्सियों की आवश्यकता है।
- उसे थोड़ी मदद चाहिए। — किसी की मदद की ज़रूरत है।
यहाँ चाहिए को व्यक्ति के अनुसार नहीं बदलते। मुझे चाहिए, हमें चाहिए, आपको चाहिए और उन्हें चाहिए सभी में यही रूप रहता है। वस्तु स्त्रीलिंग हो या पुल्लिंग, शुरुआती उपयोग में यही नियम काम आता है: मुझे दवा चाहिए। मुझे दूध चाहिए। स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों के वे व्याकरणिक वर्ग हैं जिनके कारण दूसरे शब्दों के रूप बदल सकते हैं।
सामान्य वाक्य में अंत में है जोड़ने की ज़रूरत नहीं: मुझे पानी चाहिए, न कि मुझे पानी चाहिए है। बोलचाल में चाहिए से केवल अनिवार्य आवश्यकता ही नहीं, पसंद की माँग भी व्यक्त होती है: दुकान पर मुझे नीली वाली कमीज़ चाहिए कहना स्वाभाविक है।
३. करने का काम: व्यक्ति + क्रिया का मूल रूप + है
क्रिया काम या अवस्था बताने वाला शब्द है। जाना, पढ़ना, करना, सोना उसके मूल रूप हैं; शब्दकोश में आम तौर पर इसी तरह मिलते हैं। इनके अंत में ना पहले से है, इसलिए इसे फिर से न जोड़ें।
व्यक्ति का को-वाला रूप + करना / जाना आदि + है
- मुझे जाना है। — मेरे सामने जाने का काम या आवश्यकता है।
- हमें सुबह निकलना है। — निकलने का समय तय है।
- आपको यहाँ रुकना है। — आपके रुकने की व्यवस्था या अपेक्षा है।
यह ढाँचा केवल मजबूरी नहीं बताता। मुझे शाम को दोस्त से मिलना है एक तय मुलाक़ात हो सकती है। मुझे आज ही शुल्क भरना है में अंतिम समय-सीमा का दबाव हो सकता है। अर्थ आसपास की बात से साफ़ होता है।
है को केवल व्यक्ति देखकर हूँ, हो, हैं में न बदलें। कहें मुझे जाना है, तुम्हें जाना है, आपको जाना है, हमें जाना है। आप के सम्मान के कारण यहाँ आपको जाना हैं नहीं होगा। जिन वाक्यों में कोई वस्तु नहीं है, उनमें यह शुरुआती नियम विशेष रूप से आसान है।
४. सलाह और उचित काम: व्यक्ति + क्रिया का मूल रूप + चाहिए
व्यक्ति का को-वाला रूप + करना / जाना आदि + चाहिए
- आपको यह करना चाहिए। — यह करना उचित या अच्छा होगा।
- मुझे थोड़ा आराम करना चाहिए। — आराम करना मेरे लिए अच्छा होगा।
- हमें समय पर पहुँचना चाहिए। — समय पर पहुँचने की अपेक्षा है।
तुलना करें: मुझे आज पढ़ना है में पढ़ने का काम या योजना है; मुझे आज पढ़ना चाहिए में पढ़ने की सलाह या ज़िम्मेदारी का भाव है। सलाह अपने लिए भी हो सकती है, केवल किसी दूसरे व्यक्ति के लिए नहीं।
चाहिए हर बार हल्की सलाह नहीं देता। हमें अपना वादा निभाना चाहिए में नैतिक ज़िम्मेदारी है। फिर भी, करना है और करना चाहिए को बिना सोचे एक-दूसरे की जगह न रखें: एक तय काम बताता है, दूसरा उसके उचित होने का आकलन करता है।
५. करना, करनी, करने: रूप किससे बदलता है?
शुरुआत में मुझे जाना है जैसे वाक्य सीखें। उसके बाद उन वाक्यों पर ध्यान दें जिनमें काम का असर किसी चीज़ पर पड़ता है। उस चीज़ को कर्म कहते हैं: जैसे किताब पढ़ना में किताब वह चीज़ है जिसे पढ़ा जाता है।
इन ढाँचों में बिना को वाला कर्म अक्सर क्रिया के मूल रूप से मेल कराता है, यानी उसके लिंग और संख्या के अनुसार क्रिया का अंत बदलता है। करना है वाले ढाँचे में है/हैं भी बदल सकता है।
| जिस चीज़ पर काम हो रहा है | तय काम | सलाह |
|---|---|---|
| एक पुल्लिंग वस्तु: पत्र | मुझे पत्र लिखना है। | मुझे पत्र लिखना चाहिए। |
| एक स्त्रीलिंग वस्तु: चिट्ठी | मुझे चिट्ठी लिखनी है। | मुझे चिट्ठी लिखनी चाहिए। |
| कई पुल्लिंग वस्तुएँ: कपड़े | मुझे कपड़े धोने हैं। | मुझे कपड़े धोने चाहिए। |
| कई स्त्रीलिंग वस्तुएँ: किताबें | मुझे किताबें पढ़नी हैं। | मुझे किताबें पढ़नी चाहिए। |
इन रूपों को बोलने वाले के लिंग से न जोड़ें। पुरुष और महिला दोनों कहेंगे मुझे चिट्ठी लिखनी है, क्योंकि चिट्ठी स्त्रीलिंग है। इसी तरह कई लोगों के लिए भी हमें जाना है होगा; हमें देखकर अपने-आप जाने हैं नहीं बनता।
प्रसंग में उदाहरण
नीचे हर वाक्य के साथ सरल हिंदी में उसका आशय दिया गया है। लक्ष्य शब्दों का अनुवाद याद करना नहीं, बल्कि स्थिति देखकर सही ढाँचा चुनना है।
| हिंदी वाक्य | सरल अर्थ | परिस्थिति या ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| मुझे पानी चाहिए। | मुझे पीने के लिए पानी की ज़रूरत है। | चीज़ की आवश्यकता |
| हमें दो टिकट चाहिए। | हमारे लिए दो टिकट चाहिए। | एक से अधिक वस्तुओं की माँग |
| आपको और समय चाहिए? | क्या आपके लिए अभी और समय ज़रूरी है? | बातचीत का सहज प्रश्न |
| रीना को आपकी मदद चाहिए। | रीना चाहती है कि आप उसकी मदद करें। | नाम के बाद को |
| मुझे जाना है। | अब मेरे जाने का काम है। | स्थिति के अनुसार आवश्यकता या योजना |
| हमें नौ बजे तक पहुँचना है। | हमारे पहुँचने का समय नौ बजे तक है। | समय-सीमा |
| आपको यह पर्ची भरनी है। | यह पर्ची भरना आपका अगला काम है। | पर्ची के कारण भरनी |
| मुझे आज कपड़े धोने हैं। | कपड़े धोना आज के मेरे कामों में है। | कपड़े के साथ धोने हैं |
| आपको यह करना चाहिए। | यह करना आपके लिए उचित होगा। | सलाह या अपेक्षा |
| तुम्हें थोड़ा आराम करना चाहिए। | आराम करना तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा। | देखभाल की सलाह |
| हमें दवा समय पर लेनी चाहिए। | दवा लेने का समय नहीं चूकना चाहिए। | दवा के साथ लेनी |
| आपको इतनी जल्दी नहीं करनी चाहिए। | इतनी जल्दबाज़ी करना ठीक नहीं है। | किसी काम के विरुद्ध सलाह |
| मुझे अभी चाय नहीं चाहिए। | इस समय मुझे चाय की ज़रूरत या इच्छा नहीं है। | चीज़ की माँग का नकार |
| क्या हमें अपना पहचान-पत्र लाना है? | क्या पहचान-पत्र लाना हमारे लिए ज़रूरी है? | आवश्यक काम की पुष्टि |
आम गलतियाँ
१. मैं और मुझे को एक जैसा मानना
- गलत: मैं पानी चाहिए।
- सही: मुझे पानी चाहिए।
- कारण: इस ढाँचे में ज़रूरत वाले व्यक्ति का को-वाला रूप चाहिए। मैं पानी पीता हूँ अलग ढाँचा है; उसे देखकर यहाँ मैं न लगाएँ।
२. व्यक्ति के अनुसार है बदल देना
- गलत: मैं कहना चाहता हूँ कि मुझे जाना हूँ।
- सही: मैं कहना चाहता हूँ कि मुझे जाना है।
- कारण: मुझे जाना है में है, सामान्य मैं हूँ की तरह व्यक्ति के अनुसार नहीं बदलता। हमें जाना है भी इसी नियम से बनता है।
३. चाहिए के बाद अनावश्यक है जोड़ना
- गलत: आपको आराम करना चाहिए है।
- सही: आपको आराम करना चाहिए।
- कारण: वर्तमान की इस सलाह में चाहिए ही पर्याप्त है। करना है और करना चाहिए को मिलाकर नया रूप न बनाएँ।
४. चाहिए को क्षमता समझ लेना
- गलत, यदि आशय तैरने की क्षमता है: मुझे तैरना चाहिए।
- सही: मैं तैर सकता हूँ। / मैं तैर सकती हूँ।
- कारण: तैरना चाहिए तैरने की सलाह देता है। सकना किसी काम को कर पाने की क्षमता या संभावना बताता है। यह अंतर समझना उपयोगी है, भले ही सकना के सभी रूप अभी न सीखे हों।
५. चीज़ के साथ मेल भूलना
- गलत, मानक लिखित हिंदी में: मुझे यह किताब पढ़ना है।
- सही: मुझे यह किताब पढ़नी है।
- कारण: यहाँ किताब स्त्रीलिंग कर्म है, इसलिए पढ़नी आएगा। मुझे पढ़ना है अपने-आप में सही है, क्योंकि उसमें किसी विशेष किताब का उल्लेख नहीं है।
६. सलाह के नकार को अनुमति समझना
- गलत, यदि मतलब है कि देर करना अनुचित है: तुम्हें देर नहीं करनी है, इसलिए देर कर सकते हो।
- सही: तुम्हें देर नहीं करनी चाहिए।
- कारण: नहीं करना चाहिए काम के विरुद्ध सलाह देता है। नहीं करना है भी संदर्भ में सीधा निषेध हो सकता है; उसे अपने-आप छूट या अनुमति न समझें।
बोलचाल और व्यवहार में उपयोग
सवाल पूछना
हाँ या नहीं में उत्तर पाने के लिए शुरू में क्या जोड़ सकते हैं: क्या आपको मदद चाहिए? क्या मुझे यहाँ हस्ताक्षर करना है? क्या हमें पहले फ़ोन करना चाहिए? बातचीत में आवाज़ के उतार-चढ़ाव से भी प्रश्न बनता है: आपको मदद चाहिए?
जानकारी माँगने के लिए प्रश्नवाचक शब्द रखें: आपको क्या चाहिए? हमें कब निकलना है? मुझे कहाँ बैठना चाहिए? पहले में चीज़ पूछी जा रही है, दूसरे में समय और तीसरे में उचित जगह।
विनम्र माँग और अनचाही सलाह
मुझे एक गिलास पानी चाहिए साफ़ और सामान्य माँग है। अधिक नरमी के लिए कह सकते हैं: कृपया मुझे एक गिलास पानी दे दीजिए या क्या मुझे थोड़ा पानी मिल सकता है? केवल चाहिए लगा देने से हर माँग विनम्र नहीं हो जाती; आवाज़ और संबंध भी महत्त्व रखते हैं।
इसी तरह आपको यह करना चाहिए व्याकरण की दृष्टि से सही है, लेकिन किसी अपरिचित व्यक्ति को बार-बार ऐसी सलाह देना उपदेश जैसा लग सकता है। नरम सुझाव के लिए आप चाहें तो थोड़ा आराम कर लें या शायद थोड़ा आराम करना अच्छा रहेगा कह सकते हैं।
व्यक्ति का नाम न कहना
जब बात सभी पर लागू हो, व्यक्ति का उल्लेख छोड़ सकते हैं: समय पर पहुँचना चाहिए। पानी बचाना चाहिए। जब व्यक्ति पहले से स्पष्ट हो, तब भी अब चलना है स्वाभाविक है। शुरुआती अभ्यास में व्यक्ति जोड़कर बोलना मददगार है; बाद में प्रसंग के अनुसार उसे छोड़ा जा सकता है।
आगे की बारीकियाँ: शुरुआती नियम से आगे
इन बातों को पहले दिन याद करना आवश्यक नहीं। जब मूल तीन ढाँचे सहज लगने लगें, तब इन्हें देखें।
नकार के तीन अलग अर्थ
नकार यानी किसी बात को नहीं से अस्वीकार करना। यहाँ केवल नहीं जोड़ना पर्याप्त नहीं; पूरा आशय भी देखना पड़ता है।
- मुझे चाय नहीं चाहिए। — अभी चाय की माँग या ज़रूरत नहीं है।
- मुझे वहाँ नहीं जाना चाहिए। — वहाँ जाना उचित नहीं होगा।
- मुझे वहाँ नहीं जाना है। — मेरा वहाँ जाने का इरादा या काम नहीं है; संदर्भ के अनुसार न जाने का निर्णय भी हो सकता है।
तुम्हें यह बटन नहीं दबाना है निर्देशों में साफ़ मनाही हो सकती है। यदि केवल यह कहना हो कि काम अनिवार्य नहीं है, तो अधिक स्पष्ट ढाँचा चुनें: आपके लिए वहाँ जाना ज़रूरी नहीं है या आपको वहाँ जाने की ज़रूरत नहीं है। इससे मनाही और बाध्यता न होने का अंतर साफ़ रहता है।
इच्छा, योजना और मजबूरी
मुझे घर जाना है, मैं घर जाना चाहता हूँ / चाहती हूँ और मुझे घर जाना पड़ेगा पास-पास के अर्थ दे सकते हैं, पर एक जैसे नहीं हैं।
जाना चाहता हूँ सीधे इच्छा बताता है। जाना है जाने को सामने के काम या इरादे के रूप में रखता है। जाना पड़ेगा परिस्थितियों के कारण काम करने की मजबूरी को अधिक उभारता है। उदाहरण के लिए, दवा ख़त्म हो गई है; मुझे दुकान जाना पड़ेगा में परिस्थिति जाने के लिए बाध्य कर रही है।
इसीलिए मुझे जाना है का अर्थ हर बार भारी मजबूरी नहीं है। मुझे अगले साल संगीत सीखना है एक निजी लक्ष्य भी हो सकता है।
भूत और भविष्य की झलक
भूतकाल यानी बीते समय में चीज़ की ज़रूरत के लिए चाहिए था/थी/थे/थीं मिलते हैं: मुझे पैसे चाहिए थे। उसे मदद चाहिए थी। यहाँ ज़रूरी चीज़ के अनुसार रूप बदलता है।
काम के लिए कह सकते हैं मुझे जाना था, मुझे चिट्ठी लिखनी थी, मुझे कपड़े धोने थे। इससे पता चलता है कि काम पहले तय या अपेक्षित था; केवल इस ढाँचे से हमेशा यह तय नहीं होता कि काम वास्तव में हुआ या नहीं।
मुझे पहले निकलना चाहिए था अक्सर पीछे मुड़कर दी गई सलाह या अफ़सोस व्यक्त करता है। आपको फ़ोन करना चाहिए था प्रसंग के अनुसार शिकायत भी बन सकता है। भविष्य की आवश्यकता में मुझे कल जाना होगा जैसे रूप मिलेंगे।
जब कर्म के साथ को हो
ऊपर मुझे चिट्ठी लिखनी है में चिट्ठी से मेल देखा। पर मुझे रीना को बुलाना है में रीना को है, इसलिए बुलाना सामान्य रूप में रहता है। मुझे रीना को बुलानी है मानक रूप नहीं है।
तुलना करें: मुझे बच्चों को बुलाना है और मुझे किताबें पढ़नी हैं। पहले वाक्य में बच्चों को होने से बुलाना है रहता है; दूसरे में बिना को वाला किताबें रूप बदलवाता है। ऐसे वाक्यों को पहले पूरे उदाहरण के रूप में सीखना, हर बार नियम गिनने से आसान हो सकता है।
चाहिए से अपेक्षा का अनुमान
अब तक बस आ जानी चाहिए का अर्थ बस को सलाह देना नहीं है। इसका भाव है कि समय या जानकारी के हिसाब से बस के पहुँच जाने की अपेक्षा है। चाबी मेज़ पर होनी चाहिए भी चाबी की ज़रूरत नहीं बताता; बोलने वाले को लगता है कि चाबी वहीं होगी।
यह चाहिए का आगे का उपयोग है। शुरुआती सीख में मुझे चाबी चाहिए को ज़रूरत और चाबी मेज़ पर होनी चाहिए को अनुमान के रूप में अलग पहचान लेना पर्याप्त है।
अभ्यास के तरीके
१. एक स्थिति, तीन बातें। घर से निकलने की कल्पना करें। लिखें: मुझे टिकट चाहिए। मुझे स्टेशन जाना है। मुझे समय से निकलना चाहिए। फिर अस्पताल, दफ़्तर या यात्रा की स्थिति लेकर यही तीन अर्थ अपने शब्दों में बनाएँ। हर बार जाँचें: चीज़, काम या सलाह?
२. एक ही काम की वस्तु बदलें। मुझे पत्र लिखना है, मुझे चिट्ठी लिखनी है, मुझे दो पत्र लिखने हैं बोलें। फिर इन्हीं में चाहिए लगाएँ। केवल अपना नाम या बोलने वाले का लिंग बदलने से रूप न बदलें; काम की वस्तु पर ध्यान दें।
३. सवाल और स्पष्ट नकार बनाएँ। अपने किसी वाक्य से सवाल बनाएँ: क्या मुझे कल आना है? फिर दो अलग उत्तर लिखें: नहीं, आपके आने की ज़रूरत नहीं है और नहीं, आपको कल नहीं आना चाहिए। पहले में आने की बाध्यता नहीं है; दूसरे में न आने की सलाह है। यह अभ्यास अर्थ की गड़बड़ी पकड़ने में मदद करेगा।
संबंधित विषय
- पहले समझें: होना — वर्तमान काल — है, हैं, हूँ जैसे रूप पहचानने का आधार। इस लेख में ख़ास ध्यान रखें कि मुझे जाना है को सामान्य मैं हूँ वाले नियम से नहीं बनाया जाता।