A1

योरूबा में ‘होना’: ni और jẹ́

Ní/Jẹ́ (Ìṣe)

यह लेख Settemila Lingue पर योरूबा व्याकरण-वृक्ष का हिस्सा है।

संक्षेप में

योरूबा में हिंदी के ‘है, हूँ, हैं’ का हर जगह एक ही अनुवाद नहीं होता। पहचान या पेशा बताने के लिए ni और jẹ́ मिलते हैं: Olùkọ́ ni mí. — ‘मैं शिक्षक हूँ’; Ó jẹ́ dókítà. — ‘वह डॉक्टर है।’ पहचान का खंडन करने के लिए kìí ṣe और किसी की जगह बताने के लिए wà सीखें: Ó kìí ṣe dókítà. — ‘वह डॉक्टर नहीं है’; Ó wà nílé. — ‘वह घर पर है।’

पहले बात समझें

‘मैं शिक्षक हूँ’, ‘यह मेरा है’ और ‘वह घर पर है’ में हिंदी एक ही क्रिया ‘होना’ इस्तेमाल करती है। योरूबा इन बातों को अलग-अलग ढंग से कहती है। इसलिए हिंदी वाक्य में ‘है’ देखकर तुरंत कोई एक योरूबा शब्द रख देना सही तरीका नहीं है। पहले पूछें: क्या मैं किसी की पहचान बता रहा हूँ, कोई गुण बता रहा हूँ या उसकी जगह बता रहा हूँ?

इस लेख का मुख्य विषय पहचान जोड़ने वाले ni और jẹ́ हैं। व्याकरण में ऐसे जोड़ को योजक कहते हैं: वह किसी व्यक्ति या वस्तु को उसके नाम, पेशे, संबंध या श्रेणी से जोड़ता है। ‘वह डॉक्टर है’ में किसी काम के होने की बात नहीं, बल्कि यह बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति कौन है।

यह A1 स्तर की बुनियादी बात है, लेकिन ni के साथ शब्दों का क्रम और ज़ोर भी बदल सकता है। शुरुआत में दो पूरे ढाँचे याद करें: Olùkọ́ ni mí. — ‘मैं शिक्षक हूँ’ और Mo jẹ́ olùkọ́. — ‘मैं शिक्षक हूँ।’ बाद में समझेंगे कि एक ही पहचान को अलग क्रम में रखने से बातचीत में क्या अंतर आता है।

वाक्य कैसे बनता है?

१. ni के साथ पहचान का सामान्य ढाँचा

संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, पेशे या धारणा का नाम है, जैसे ‘शिक्षक’, ‘बच्चा’ या ‘डॉक्टर’। योरूबा में पेशा या श्रेणी बताने के लिए यह बहुत उपयोगी ढाँचा है:

पहचान या श्रेणी + ni + व्यक्ति

Olùkọ́ ni Adé. — ‘अदे शिक्षक है।’

यहाँ olùkọ́ का अर्थ ‘शिक्षक’ है। हिंदी में हम पहले ‘अदे’ और फिर ‘शिक्षक’ कहते हैं; इस योरूबा ढाँचे में ‘शिक्षक’ पहले आता है। इसलिए ni को हिंदी के ‘है’ की तरह वाक्य के अंत में रखने की आदत न बनाएं।

Olùkọ́ ni mí. — ‘मैं शिक्षक हूँ।’

इस वाक्य को पूरा याद करना विशेष रूप से उपयोगी है। mí यहाँ ‘मैं’ को व्यक्त करने वाला रूप है। योरूबा में ‘मैं’ के सभी रूप हर स्थान पर एक जैसे नहीं होते।

२. ni के पहले किस बात को रखा गया है, यह देखें

ni केवल दो नामों के बीच लगाया जाने वाला बराबरी का चिह्न नहीं है। इसके पहले की बात बातचीत का केंद्र बन सकती है। इसे ज़ोर का केंद्र कह सकते हैं: वह जानकारी जिसे वक्ता खास तौर पर चुनकर सामने रख रहा है।

  • Olùkọ́ ni Adé. — ‘अदे शिक्षक है।’ पेशा बताने का उपयोगी सामान्य ढाँचा।
  • Adé ni olùkọ́. — संदर्भ में ‘अदे शिक्षक है’, खासकर ‘शिक्षक अदे है’ या ‘अदे ही शिक्षक है।’

दूसरा वाक्य तब समझ में आता है जब किसी समूह में शिक्षक की पहचान की जा रही हो। दोनों वाक्यों को हर संदर्भ में बिल्कुल एक-जैसा न मानें। यदि बस किसी का पेशा बताना है, तो पहला ढाँचा या Adé jẹ́ olùkọ́. — ‘अदे शिक्षक है’ — शुरुआती अभ्यास के लिए अधिक स्पष्ट है।

इसी तरह Èmi ni ọmọ rẹ̀. का अर्थ ‘मैं उसका बच्चा हूँ’ है; किसी के सवाल या गलतफ़हमी के उत्तर में इसका भाव ‘उसका बच्चा मैं हूँ’ या ‘मैं ही उसका बच्चा हूँ’ हो सकता है। हिंदी में यह अंतर अक्सर ‘ही’ या बोलते समय दिए गए ज़ोर से सामने आता है। योरूबा में वाक्य का क्रम भी इसमें भाग लेता है।

३. jẹ́ के साथ व्यक्ति पहले आता है

jẹ́ के साथ हिंदी पाठक को क्रम अधिक परिचित लगेगा:

कर्ता + jẹ́ + पहचान या पेशा

कर्ता वह व्यक्ति या वस्तु है जिसके बारे में वाक्य कुछ बताता है। Ó jẹ́ dókítà. में ó कर्ता है और dókítà उसका पेशा बताता है। अर्थ है ‘वह डॉक्टर है।’ Ó से अपने-आप यह नहीं पता चलता कि बात पुरुष की है या स्त्री की।

सर्वनाम नाम की जगह आने वाले शब्द हैं, जैसे ‘मैं’, ‘तुम’, ‘वह’। नीचे jẹ́ के साथ सामान्य कर्ता-सर्वनाम दिए गए हैं। jẹ́ खुद ‘हूँ, है, हैं’ की तरह व्यक्ति के अनुसार नहीं बदलता।

योरूबा हिंदी
Mo jẹ́ olùkọ́. मैं शिक्षक हूँ।
O jẹ́ olùkọ́. तुम शिक्षक हो।
Ó jẹ́ olùkọ́. वह शिक्षक है।
A jẹ́ olùkọ́. हम शिक्षक हैं।
Ẹ jẹ́ olùkọ́. आप शिक्षक हैं। / तुम लोग शिक्षक हो।
Wọ́n jẹ́ olùkọ́. वे शिक्षक हैं।

jẹ́ केवल सर्वनामों के साथ नहीं आता: Adé jẹ́ olùkọ́. — ‘अदे शिक्षक है’ भी संभव है। इसलिए ‘नाम के साथ हमेशा ni, सर्वनाम के साथ हमेशा jẹ́’ जैसा नियम न बनाएं। दोनों ढाँचों को अलग-अलग पहचानना अधिक उपयोगी है।

४. पहचान का खंडन: kìí ṣe

नकार यानी किसी बात को ‘नहीं’ कहकर खारिज करना। पहचान या पेशे के खंडन के लिए kìí ṣe का ढाँचा याद करें:

कर्ता + kìí ṣe + पहचान

  • Adé kìí ṣe olùkọ́. — ‘अदे शिक्षक नहीं है।’
  • Ó kìí ṣe dókítà. — ‘वह डॉक्टर नहीं है।’
  • Èmi kìí ṣe ọmọ rẹ̀. — ‘मैं उसका बच्चा नहीं हूँ।’

जब संदर्भ से स्पष्ट हो कि किस चीज़ की बात हो रही है, तो छोटा उत्तर भी मिलता है:

Kìí ṣe tèmi. — ‘यह मेरा नहीं है।’

tèmi का अर्थ ‘मेरा वाला’ या ‘मेरा’ है। सामने रखा सामान देखकर यह वाक्य पूरा समझ में आ जाता है, भले उसमें हिंदी के ‘यह’ के लिए अलग शब्द न हो। kìí ṣe को अभी एक इकाई की तरह सीखें; इसे सकारात्मक वाक्य में ni के साथ जोड़कर नकार बनाने की कोशिश न करें।

५. जगह बतानी हो तो wà

‘डॉक्टर है’ पहचान है; ‘घर पर है’ स्थान है। स्थान के लिए wà इस्तेमाल करें:

  • Ó jẹ́ dókítà. — ‘वह डॉक्टर है।’
  • Ó wà nílé. — ‘वह घर पर है।’

nílé का अर्थ ‘घर पर’ है। यहाँ wà मौजूद होने या किसी जगह होने की बात कहता है। स्थान के नकार में kò sí का बहुत उपयोग होता है:

Ó kò sí nílé. — ‘वह घर पर नहीं है।’

यानी हिंदी का ‘नहीं है’ भी हमेशा एक ही योरूबा ढाँचा नहीं बनेगा। ‘डॉक्टर नहीं है’ के लिए kìí ṣe, लेकिन ‘घर पर नहीं है’ के लिए kò sí सीखें।

रोज़मर्रा के संदर्भों में उदाहरण

नीचे पहले पहचान, फिर खंडन और अंत में स्थान का अंतर दिया गया है। जहाँ योरूबा में लिंग स्पष्ट नहीं है, वहाँ हिंदी का ‘उसका’ संदर्भ के अनुसार किसी पुरुष या स्त्री, दोनों के लिए हो सकता है।

योरूबा हिंदी ध्यान दें
Olùkọ́ ni Adé. अदे शिक्षक है। पेशा पहले रखा गया है।
Adé ni olùkọ́. शिक्षक अदे है। संदर्भ में अदे की पहचान पर ज़ोर।
Èmi ni ọmọ rẹ̀. मैं उसका बच्चा हूँ। उत्तर में ‘मैं ही’ का भाव आ सकता है।
Ó jẹ́ dókítà. वह डॉक्टर है। व्यक्ति, फिर पेशा।
Mo jẹ́ akẹ́kọ̀ọ́. मैं विद्यार्थी हूँ। अपना परिचय।
Ọ̀rẹ́ mi ni Adé. अदे मेरा दोस्त है। किसी से संबंध बताना।
Adé jẹ́ olùkọ́. अदे शिक्षक है। नाम के साथ भी jẹ́ संभव है।
Ó kìí ṣe dókítà. वह डॉक्टर नहीं है। पेशे के बारे में गलत धारणा सुधारना।
Adé kìí ṣe olùkọ́. अदे शिक्षक नहीं है। नाम के साथ पहचान का खंडन।
Kìí ṣe tèmi. यह मेरा नहीं है। सामने रखी वस्तु के बारे में छोटा उत्तर।
Tèmi ni. यह मेरा है। अपने सामान की पहचान।
Ó wà nílé. वह घर पर है। पेशा नहीं, स्थान।
Ó kò sí nílé. वह घर पर नहीं है। स्थान का नकार।
Ta ni olùkọ́? शिक्षक कौन है? किसी की पहचान पूछना।

इनमें Tèmi ni. और Kìí ṣe tèmi. को साथ पढ़ें। फिर Ó jẹ́ dókítà. और Ó wà nílé. की जोड़ी बोलें। इससे हिंदी के एक ही ‘है’ के पीछे छिपे अलग-अलग अर्थ स्पष्ट होने लगेंगे।

आम गलतियाँ

१. हिंदी की तरह ni को आखिर में रख देना

  • गलत: Mo olùkọ́ ni.
  • सही: Mo jẹ́ olùkọ́. — ‘मैं शिक्षक हूँ।’
  • दूसरा सही ढाँचा: Olùkọ́ ni mí. — ‘मैं शिक्षक हूँ।’

हिंदी में ‘मैं शिक्षक हूँ’ का अंतिम ‘हूँ’ देखकर अंतिम स्थान पर ni नहीं रख सकते। ढाँचा बदलने पर शब्दों का क्रम और सर्वनाम का रूप भी बदल सकता है।

२. हर स्थान पर एक ही सर्वनाम रखना

  • गलत: Mo ni ọmọ rẹ̀. — जब कहना हो ‘मैं उसका बच्चा हूँ’।
  • सही: Èmi ni ọmọ rẹ̀. — ‘मैं उसका बच्चा हूँ।’

Mo सामान्य कर्ता-सर्वनाम है, जबकि Èmi स्वतंत्र रूप से और ज़ोर के साथ आने वाला रूप है। ऊपर के गलत विकल्प से इच्छित पहचान व्यक्त नहीं होती; ni और ní का भेद भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। केवल हिंदी के ‘मैं’ को देखकर दोनों योरूबा रूपों को एक न मानें।

३. पहचान वाले ni को ní लिख देना

  • गलत: Olùkọ́ ní mí. — जब मतलब हो ‘मैं शिक्षक हूँ’।
  • सही: Olùkọ́ ni mí. — ‘मैं शिक्षक हूँ।’

योरूबा में अक्षर के ऊपर का चिह्न सजावट नहीं है। ni का स्वर मध्य है; ní का स्वर ऊँचा है और वह दूसरे काम करता है। ‘मेरे पास… है’ और ‘किसी जगह पर’ जैसे ढाँचों में मिलने वाले ní को पहचान वाले ni से अलग सीखें।

४. घर पर होने के लिए jẹ́ लगाना

  • गलत: Ó jẹ́ nílé. — जब कहना हो ‘वह घर पर है’।
  • सही: Ó wà nílé. — ‘वह घर पर है।’

यहाँ व्यक्ति का पेशा, संबंध या पहचान नहीं बताई जा रही। उसके मौजूद होने की जगह बताई जा रही है, इसलिए wà चाहिए।

५. हिंदी के ‘नहीं’ की जगह बस kò जोड़ देना

  • गलत: Ó kò ni dókítà. — जब कहना हो ‘वह डॉक्टर नहीं है’।
  • सही: Ó kìí ṣe dókítà. — ‘वह डॉक्टर नहीं है।’

पहचान का खंडन अपने पूरे ढाँचे से सीखें। kò ní वाला वाक्य अलग अर्थ दे सकता है; उसे ‘है’ वाले वाक्य का सीधा नकार न समझें।

प्रयोग से जुड़ी बातें

स्वर और वर्तनी को साथ सीखें

योरूबा स्वरभेदी भाषा है: आवाज़ की ऊँचाई बदलने से शब्द या उसका व्याकरणिक काम बदल सकता है। jẹ́, kìí, ṣe, wà और ní के चिह्न ध्यान से लिखें। ẹ और ọ भी साधारण e और o के सजावटी रूप नहीं, अलग स्वर हैं।

देवनागरी में अनुमानित उच्चारण लिख लेना शुरुआती सहारा हो सकता है, लेकिन उससे योरूबा के स्वर और सभी ध्वनियाँ ठीक-ठीक नहीं मिलतीं। इसलिए मूल वर्तनी को ही पहचान का आधार बनाएं। विशेष रूप से O — ‘तुम’ और Ó — ‘वह’ का अंतर ऊपर की सारणी में फिर देखें।

हिंदी का लिंग और आदर अपने-आप न जोड़ें

Ó jẹ́ dókítà. किसी पुरुष या स्त्री, दोनों के लिए कहा जा सकता है। हिंदी में अनुवाद करते समय ‘वह डॉक्टर है’ सहज है; योरूबा सर्वनाम से लिंग निकालने की ज़रूरत नहीं है। इसी तरह ọmọ ‘बच्चा’ है, जरूरी नहीं कि केवल ‘बेटा’ हो।

Ẹ अनेक लोगों को संबोधित कर सकता है और एक व्यक्ति के लिए आदरपूर्ण संबोधन भी हो सकता है। कुछ संदर्भों में wọ́n भी एक सम्मानित व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है। आदर की यह व्यवस्था हिंदी के ‘तुम/आप’ और ‘वह/वे’ से कुछ हद तक मिलती है, पर हर स्थिति में सीधा मेल नहीं बैठता। इस लेख की सारणी में wọ́n का मूल बहुवचन अर्थ दिया गया है।

आगे की समझ: शुरुआत में केवल पहचानना काफ़ी है

ni और ज़ोर वाले बड़े वाक्य

सरल पहचान-वाक्यों से आगे ni किसी काम को करने वाले व्यक्ति या किसी दूसरी जानकारी को खास तौर पर सामने लाता है।

Adé ni ó wá. — ‘अदे ही आया था।’

यह केवल ‘अदे है’ नहीं कहता। पहले अदे को सामने रखा गया है, फिर ó wá — ‘वह आया’ — से घटना बताई गई है। हिंदी में ‘अदे ही आया था’ या ‘जो आया था, वह अदे था’ जैसा भाव बनता है।

इसीलिए शुरुआती Adé ni olùkọ́. को केवल ‘व्यक्ति + है + पेशा’ की यांत्रिक पंक्ति मानना आगे चलकर परेशानी पैदा करता है। ni के पहले क्या रखा गया है और बातचीत किस सवाल का उत्तर दे रही है, दोनों देखें। अभी ऐसे लंबे वाक्य बनाना आवश्यक नहीं; उन्हें पहचानना पर्याप्त है।

हर गुण के लिए ni या jẹ́ नहीं चाहिए

हिंदी में ‘वह शिक्षक है’ और ‘वह लंबा है’ एक जैसे दिखते हैं। लेकिन पहला किसी श्रेणी में रखता है; दूसरा गुण बताता है। योरूबा के कई गुण बताने वाले शब्द बिना अलग योजक के सीधे आते हैं:

Ó ga. — ‘वह लंबा है।’

इसलिए ‘है’ का अनुवाद कभी ni, कभी jẹ́, कभी wà, और कभी कोई अलग शब्द लगाए बिना भी हो सकता है। हर हिंदी विशेषण के लिए एक ही योरूबा नियम न बनाएं। विशेषण, यानी गुण बताने वाला शब्द, हिंदी और योरूबा में हमेशा एक-जैसा व्यवहार नहीं करता।

आगे का समय बताना और ni की सीमा

jẹ́ समय या स्थिति बदलने वाले दूसरे शब्दों के साथ भी आता है। उदाहरण के लिए:

Ó máa jẹ́ olùkọ́. — ‘वह शिक्षक बनेगा/बनेगी।’

यहाँ máa भविष्य की ओर संकेत करता है। इसे देखकर ni के साथ भी बिल्कुल वही शब्दक्रम बनाने की कोशिश न करें: ni और jẹ́ हर ढाँचे में एक-दूसरे की जगह नहीं रखे जा सकते। भविष्य के अलग-अलग अर्थ और उनके संकेत अलग विषय हैं; अभी इतना याद रखें कि jẹ́ बड़े क्रिया-ढाँचे का हिस्सा बन सकता है।

jẹ́ से मिलते रूप देखकर अर्थ न मिला दें

jẹ́ के दूसरे प्रयोग भी हैं, इसलिए किसी लंबे वाक्य में उसे देखकर हमेशा ‘है’ मानना ठीक नहीं। साथ ही jẹ — ‘खाना’ — और jẹ́ की वर्तनी अलग है। ध्वनि और चिह्न के साथ पूरा वाक्य सीखने से ऐसे भ्रम कम होते हैं।

अभ्यास के उपयोगी तरीके

१. हिंदी के ‘है’ को पहले तीन खाने में बाँटें। ‘वह शिक्षक है’, ‘वह घर पर है’, ‘वह लंबा है’ लिखें। फिर क्रमशः Ó jẹ́ olùkọ́., Ó wà nílé., Ó ga. से मिलाएं। प्रतिदिन ऐसे तीन छोटे वाक्य लें। अनुवाद से पहले अर्थ पहचानना इस विषय का सबसे उपयोगी अभ्यास है।

२. पहचान के दो पूरे ढाँचे बोलें। Mo jẹ́ olùkọ́. और Olùkọ́ ni mí. — दोनों ‘मैं शिक्षक हूँ’। फिर olùkọ́ की जगह akẹ́kọ̀ọ́ रखकर ‘मैं विद्यार्थी हूँ’ कहें। अलग शब्द बदलते समय ढाँचे को न बिगाड़ें। इसके बाद Ó kìí ṣe olùkọ́. — ‘वह शिक्षक नहीं है’ जोड़ें।

३. एक छोटी पहचान-स्थिति बनाएं। तीन व्यक्तियों के नाम लिखकर उनमें से एक को शिक्षक मानें। पूछें Ta ni olùkọ́? — ‘शिक्षक कौन है?’ फिर उत्तर दें Adé ni olùkọ́. — ‘शिक्षक अदे है।’ इस तरह समझ आएगा कि कभी पेशा बताना लक्ष्य होता है और कभी उस पेशे वाले व्यक्ति को चुनना।

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